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दलित, आदिवासी को नुमाइंदगी मुस्लिम महरूम क्यों

Bhola Tiwari Apr 19, 2019, 12:04 PM IST टॉप न्यूज़
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कृपासिंधु तिवारी ( राजनीतिक विशेषज्ञ) 


विशेष रिपोर्ट :-


 गोड्डा : लोकसभा चुनाव में प्रतियाशियों के चयन को लेकर देश की सबसे पुरानी एंव धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस पर मुसलमानों की अनदेखी का गंभीर आरोप पार्टी के ही दिग्गज नेता लगा रहे हैं।लड़खड़ाती कांग्रेस को मज़बूती प्रदान करने वाले डॉ शकील अहमद एंव फुरकान अंसारी जैसे मास लीडर को आज कांग्रेस ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया है।कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व की कमान ऐसे हाथों में है जो कांग्रेस को समाप्त करना चाहते हैं यह आरोप झारखण्ड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने लगाया है।ज्ञात ही कि कांग्रेस पार्टी की सदस्य्ता लेने से पूर्व डॉ अजय कुमार झाविमो से जुड़े हुये थे।फुरकान अंसारी का कहना है कि वे कांग्रेस में रहते हुये झाविमो के हितों को ही तरजीह दे रहे हैं जिसका खमियाजा कांग्रेस को भुगतना होगा,झारखण्ड में एक सीट पर भी कांग्रेस का खाता नहीं खुलने जारहा है।ज्ञात हो कि गोड्डा लोकसभा सीट से दूसरे नंबर पर रहे फुरकान अंसारी को 3 लाख 19 हजार 818 वोट मिले थे जबकि झाविमो के प्रदीप यादव तीसरे नंबर पर रहे थे और मात्र एक लाख 93 हजार 306 वोट ही मिल पाये थे। फुरकान अंसारी का कहना है कांग्रेस की कमान संभाल रहे हाल ही में कांग्रेस से जुड़ने वाले डॉ अजय कुमार को ठीक से इस बात की जानकारी तक नहीं है कि राज्य भर में कांग्रेस के कितने समर्पित कार्यकर्ता हैं।फुरकान अंसारी केवल गोड्डा ही नहीं समस्त झारखण्ड के मुसलमानों की नुमाइंदगी करते हैं।गोड्डा सीट पर पहले भी वे चुनाव जीत चुके हैं और मात्र कुछ हजार वोटों से वे पिछला चुनाव हार गये थे और इस हार के लिये भी वे प्रदीप यादव को ज़िम्मेदार मानते हैं जिसने वोट काटकर भाजपा के लिये जीत की राह हमवार की थी।फुरकान अंसारी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाले मुस्लिम मतदाताओं के वे अकेले ऐसे नुमाइंदे हैं , जो भाजपा को मात देकर गोड्डा सीट कोंग्रेस और महागठबंधन की झोली में डाल सकते हैं।

स्वाभाविक रूप से नाराजगी सिर्फ़ फुरकान अंसारी को नही बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय में है। संथाल परगना में गोड्डा और राजमहल सीट पर मुस्लिम मतदाता चुनाव परिणाम को अपने बल पर प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं।

राजमहल सीट सुरक्षित रहने के कारण और बात है , जबकि राजमहल मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 5 लाख 19 हजार से अधिक है , और संथाल आदिवासी 4 लाख 26 हजार से कुछ ही अधिक हैं। फिर भी सुरक्षित सीट रहने के कारण इस सीट पर कोई दावेदारी नही है। जबकि आदिवासी मतदाताओं में ईसाई भी शामिल है , और सुरक्षित सीट रहने के कारण ईसाई आदिवासी भी यहाँ उम्मीदवार होते हैं , लेकिन अल्पसंख्यक एंव अधिक संख्या होने के बाद भी मुस्लिम को कोई फायदा नही मिलता।लेकिन गोड्डा सीट पर तो किसी मुस्लिम प्रत्याशी की दावेदारी बनती है।संथाल की तीन सीट दुमका , गोड्डा और राजमहल में से किसी सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी का नहीं होना अकलियत हज़म नही कर पा रहे। गठबंधन को एक सन्तुलन बना कर दुमका में मूल आदिवासी गुरुजी शिबू सोरेन , राजमहल में ईसाई आदिवासी विजय हासदा के साथ गोड्डा में फुरकान अंसारी को टिकट मिलना चाहिए , ये आवाज़ अकलियतों के बीच से आ रही है।

स्वयं फुरकान अंसारी ने खुल कर ऑन केमरा अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि जिस प्रदीप यादव ने भाजपा से मंत्री रहते हुए उन्हें जेल भिजवाया था , उसे वो कैसे वोट दिलवाने की अपील अकलियतों से कर सकते हैं। उन्होंने अपने प्रदेश अध्यक्ष पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोंग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष झाविमो को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। 

मुस्लिम समुदाय के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि मुस्लिमों की नुमाइंदगी लोकसभा में नहीं हो इसका षड्यंत्र रचा गया है, मुसलमान केवल वोट बैंक बनकर रह जायें और उन्हें भाजपा का भय दिखाकर कांग्रेस(महागठबंधन) के पक्ष में मतदान करना पड़े ऐसा दुष्प्रचार कर मुस्लिम समुदाय में संदेश देने का कार्य किया गया है।अंजुमन के अध्यक्ष इबरार कहते हैं कि हमें इस साज़िश को समझना होगा,दलितों एंव आदिवासियों को टिकट उनकी जनसंख्या अनुपात से अधिक मिल सकता है तो मुसलमानों को क्यों नहीं।

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