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इस देश को....देश के बुद्धिजीवियों ने बर्बाद कर दिया

Bhola Tiwari Dec 08, 2019, 10:27 AM IST टॉप न्यूज़
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 नीरज कृष्ण

जिस देश में पिछले 7 वर्षों में 1लाख 76 हजार बलात्कार जैसे घृणित कुकृत्य के मामले देश भर के अदालतों में लंबित हो/ थानों में सूचीबद्ध हो.....उस देश का तथाकथित बुद्धिजीवी टीवी चैनल पर बैठ कर मानवाधिकार की बात करता हो, तेलंगाना पुलिस के कृत्यों पर मीमांसा करता हो.....उस देश मे आप बलात्कार के रुक जाने की उम्मीद करते हैं। दुनिया भर के तमाम अपराधों की श्रृंखला में बलात्कार ही एक मात्र ऐसा अपराध है जो इकाई अंक में (अधिकतम 9%) ही थाने तक पहुंचती है।

अब यह हमारी सामाजिक व्यवस्था के चलते ऐसा होता हो, न्याय से नाउम्मीदी के कारण होता हो, या भय अथवा लोक लज्जा के कारण.......इस पर चिंतन करने की जिम्मेवारी अपने उन संवेदनशील मित्रों पर छोड़ता हूँ जो बहुत ही संजीदे हैं, संवेदनशील है।

  42.07% बलात्कार नाबालिग लड़कियों के साथ हुआ है, जिसमे 73% अभियुक्त/दुष्कर्मी....घर का सदस्य है/नजदीकी रिश्तेदार है/.....या निकटवर्ती पड़ोसी।

   ......और ये मामले चहारदीवारी के भीतर ही लड़कियों की सिसकियों में चीखती रह गयी.....उनके साथ ताउम्र।

 निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश का जब आप उस आंकड़े पर टिप्पणी सुनेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे.....जो उन्होंने व्यक्तिगत आदेश पर आंकड़े इकट्ठे करवाये थे देश भर के बलात्कार/यौन शोषण जैसे सूचीबद्ध मामलों पर। उस देश की कुछ महिलाएं क्षमा याचना कर रही हैं कि मैं भीड़ के बहकावे में तथाकथित मुठभेड़ को जायज कही थी पहले दिन।

  थोड़ी-बहुत कानून की जानकारी है मुझे भी, मुझे भी पता है क्या गलत है और क्या सही है। मुझे इतनी समझ तो आ ही रही है कि मुठभेड़ फर्जी थी या सही..... शायद आपने ध्यान दिया हो हैदराबाद के पुलिस आयुक्त के उस पंक्ति पे '.......…, नहीं, किसी भी अभियुक्त को हथकड़ी में नही लाया गया था। न ही इसका वीडियो फुटेज बनाया गया है कि अपराधियों को कैसे लाया गया है........इतने संगीन अपराध के अभियुक्त को, जिस घटना पे समूचा भारत उबाल पड़ा है, वह बिना किसी हथकड़ी के, बिना किसी जबरदस्त तैयारी के.......मूवमेंट किया जा रहा हो,.....ज्यादा नही कहूँगा आप सभी लोग समझदार हैं, विद्धवान हैं, पुलिस की तो लाचारी है अपना जान बचाने की, पर अतीत की एक बात अवश्य याद दिलाना चाहूंगा ......जब हिटलर से पूछा गया था कि आप जिस तरह से लोगों को यातनाएं दी रहे हैं, मार देने का आदेश दे रहे हैं.....इसमें बहुत सारे निर्दोष जनता भी है जिन्हें या तो जान कर या भ्रम में फंसा दिया गया है। उन निर्दोषों को क्यों सजा दी जा रही है। तब हिटलर ने स्पष्ट उत्तर दिया था कि जब तक समाज में भय नही वयाप्त होगा गलत कार्य का, लोग नही सुधरेंगे। एक सभ्य समाज को स्थापित करने के लिए कुछ निर्दोषों को भी अपनी कुर्बानी देनी ही पड़ेगी....जिसके ऊपर एक सभ्य समाज की इमारत टिकेगी। सिर्फ हम हिटलर के एक पहलू को या तो पढ़ लिये..... या शिक्षकों द्वारा सुन कर एक निर्णय स्थापित कर लिए।

   मेरा एक छोटा सा प्रश्न है उन मानवाधिकारों के पैरोकारों से......क्या ये 1 लाख 76 हजार महिलाओं का कोई मानवाधिकार नही था......क्यों इन्हें हम सिसकियों में जीने को विवश कर दिए। जाकर खोजिए उन महिलाओं, लड़कियों को.......जिनके साथ ये अमानुषिक अत्याचार हुआ हो.......क्या वाकई जीवित हैं भी या जीते जी मर चुकी हैं।.......कहाँ चले गए मानवाधिकार की बात करने वाले लोग ........

  मानवाधिकार ......My Foot, 73 वर्षों में जिस देश ने अपने नागरिकों को न दो जून की रोटी दे सकी, न शुद्ध पानी, हवा। आज 73 वर्षों के बाद देश मे शौचालय बनाने की क्रांति हो रही हो, 117 देशों में भुखमरी में जो देश 102 वां स्थान पे हो, शुद्ध जल के मामले में जिसका स्थान अंतिम तीन देशों में आता हो.......उस देश का बुद्धिजीवी मानवाधिकार की बात करता है.....तो हँसी नही उनके सोच पर शर्म आती है।

 मानवाधिकार का अर्थ होता है .....किसी भी व्यक्ति को उसके मूल जरूरतों के साथ निर्बद्ध आगे बढ़ने में सहयोग प्रदान करना।

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