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....पाखंडी उदारवादियों का बौद्धिक सन्निपात

Bhola Tiwari Dec 07, 2019, 8:46 AM IST टॉप न्यूज़
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 रंजीत कुमार

इतना आदर्शवाद मत उवाचें कि आप आदमी नहीं एलियन लगने लगें। कौन नहीं जानता कि इस देश में रोजाना पुलिस हजारों कानून को तोड़ती है, कानून को ठेंगा पर रखकर गलत को सही और सही को गलत बनाती है। अगर यह एनकाउंटर कानून और व्यवस्था से बाहर जाकर ही कर दिया गया है, तो कौन नया पहाड़ टूटेगा। इस एनकाउंटर का समर्थन इसलिए कि गलत तरीके से ही सही, मगर पुलिस के हाथों एक अच्छा काम हुआ है। सिर्फ इसलिए नहीं कि दरींदे मारे गए, बल्कि इसलिए भी कि इससे समाज का मनोबल बढ़ा है। लोगों में विश्वास जगा है कि गंदगी के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने से नतीजे आते हैं। बाकी सारे आकलन खोखले हैं। यह आशंका जताना कि पुलिस अब ऐसी हो जाएगी, वैसी हो जाएगी, न्याय तंत्र अप्रसांगिक हो जाएगा... वगैरह-वगैरह। सब अपरिपक्व और पाखंडी उदारवादियों का बौद्धिक सन्निपात है। ऐसा कुछ नहीं होने वाला। सब कुछ वैसा ही रहेगा थोड़ा प्लस-माइनस के साथ। किसी भी विभाग में कोई नया ट्रेंड गलत या सही, एक घटना मात्र से सेट नहीं होता, यह व्यवस्था के ठेकेदारों की सेटिंग से तय होता है। जब तक व्यवस्था के ठेकेदार सेटिंग में नया ट्रेंड को इनैबल नहीं करते तब तक कोई नया ट्रेंड सेट नहीं होता। इसलिए ऐसी फालतू आशंका बेबुनियाद है। हम अमेरिका नहीं हैं, जहां छोटी-छोटी बातों के सभी रीपर्केशन पर विचार किया जाता है और उसे रीजॉल्व किया जाता है। कानून हर हाल में अपना काम करता है। चाहे कठघरे में कोई भी क्यों न हो। हम अब भी तदर्थवादी व्यवस्था में जीने वाले देश हैं। हमें ऐसी ही व्यवस्था में अच्छाई को बचाना है और बुराई को खत्म करना है।


सिस्टम, सिस्टम, न्यायिक सिस्टम... कुछ मूर्ख जो सिस्टम को ठेंगा पर रखते हैं वे न्यायिक सिस्टम की दुहाई दे रहे हैं। रेयरेस्ट ऑफ द रेयर इवेंट से कोई सिस्टम भंग नहीं होता। कभी-कभी इससे न्यायिक सिस्टम को मजबूती ही मिलती है। यह उसी तरह की कार्रवाई है। दुनिया की महान से महान न्याय प्रक्रिया में, यहां तक कि धार्मिक न्यायशास्त्र में भी राक्षसों को सिस्टम से बाहर जाकर खत्म करने का उदाहरण भरा पड़ा है। आज के दिन सिस्टम के हिप्पी कट प्रेमियों की नहीं ही सुनें तो अच्छा है।

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