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वर्दी से उभरी दरिंदगी..

Bhola Tiwari Dec 06, 2019, 9:09 AM IST टॉप न्यूज़
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रमेश कुमार रिपु

छत्तीसगढ़ के नक्सली क्षेत्रों में वर्दी से दरिंदगी उभरने की घटनाओं में एक और नाम जुड़ गया। ताडमेटला या मीना खलको रेप कांड के बाद सारकेगुड़ा कांड की न्यायिक जांच की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि पुलिस ग्रामीण आदिवासियों को नक्सली बताकर गोली मारी थी। ताड़मेटला कांड हो या फिर हिड़मा कांड अथवा मीना खलको रेप कांड। तीनों कांड ने तत्कालीन सरकार की बड़ी फजीहत की। यह दुर्भाग्य की बात है कि छत्तीसगढ़ में किसी भी पार्टी की सरकार हो पुलिस ने दरिंदगी में कोताही नहीं की। बीजापुर जिले के सारकेगुड़ा में खुले मैदान में ग्रामीण बीज पंडूम का त्योहार कैसे मनाया जाय ,इसके लिए रात नौ बजे एक बैठक कर रहे थे। तभी सुरक्षा बलों की एक टुकड़ी नक्सली बताकर उन पर अंधाधुंध गोली बरसा दी। जिससे घटना स्थल पर ही 17 लोगों की मौत हो गई। जिसमें 10 लोग घायल भी हुए थे। 13 और 15 साल के मारे गये बच्चों सहित सभी 17 लोगों के खिलाफ पुलिस ने बासागुड़ा थाने में नक्सली बताकर एफआइआर दर्ज की थी।


सारकेगुड़ा कांड की न्यायिक जांच में आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विजय कुमार अग्रवाल ने जांच में पाया कि ग्रामीणों की बैठक के दौरान नक्सलियों की मौजूदगी के कोई साबूत नहीं मिले। सुरक्षा कर्मियों की फायरिंग से ही छह जवान घायल हुए थे। पुलिस की जांच में हेराफेरी की गई है। इसके कोई सबूत नहीं मिले कि ग्रामीणों की ओर से सुरक्षा बलों पर फायरिंग की गई है। ऐसे कोई हालात नहीं थे कि पुलिस को गोली चलानी पड़े। गांव वालों को सुरक्षा बल के जवानों ने पीटा और शारिरिक रूप से प्रताड़ित किया। घटना के दूसरे दिन एक ग्रामीण के घर जाकर उसकी हत्या की। सुरक्षा बल ने अनुचित और जानबुझकर घातक बल का प्रयोग किया गया। सारकेगुड़ा गांव के लोग इस न्यायिक जांच से खुश नहीं है। अब भी गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों का कहना है जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती,खुशी नहीं मनायेंगे।

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