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उखड़ती सांस को जरूरत है आक्सीजन की वे तूफान की बात करते हैं...

Bhola Tiwari Dec 02, 2019, 7:05 AM IST टॉप न्यूज़
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रंजीत कुमार 

कम से कम पांच बच्चे...

प्रथम द्रष्टया आपको मेरा यह कहना हैरत में डाल सकता है। आपको यह उलटबांसी लग सकती है। लेकिन बहुत अध्ययन, शोध और वैज्ञानिक चिंतन के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि अपने अस्तित्व को बचाने और भविष्य की पीढ़ियों को गुलाम बनने से रोकने के लिए अब हिंदुओं के पास एक ही विकल्प है। जब तक जनसंख्या नियंत्रण का कठोर कानून नहीं बन जाता तब तक हर हिंदू को कम से 5 बच्चे पैदा करने चाहिए। सत्ताई राजनीति का कोई भरोसा नहीं। उन्हें सत्ता चाहिए बस। उन्हें दूर तक देखने की न शक्ति है न ही भविष्य की चिंता।

यह हम दो हमारे एक या दो की नीति उसे 40 से 50 वर्षों में ही अल्पसंख्यक बना देगी। और एक बार अगर हिंदू 60 प्रतिशत से कम हुए, बस उसके बाद सारा खेल खत्म। 60 वर्ष में हिंदू 90 प्रतिशत से घटकर 75 प्रतिशत पर आ गए हैं और वे 7 से बढ़कर 20-22 प्रतिशत हो चुके हैं। और अब यह फासले अध्याधिक तेजी से घटेंगे। क्योंकि ज्यामितीय वृद्धि हर अगले स्टेप के बाद विशालतम होती जाती है। मसलन 2 से 4, 4 से 8, 8 से 16, 16 से 32, 32 से 64, 64 से 128, 256, 512, 1024....

और इधर, 1 से 2, 2, 4,6,8,10,12,14,16.... अब फासला का अंदाजा लगाइए। जब तक आप 2 से 16 तब तक वे 2 से 1024! 

फिलहाल, जनसंख्या संतुलन को बनाए रखना ही हिंदुओं के लिए सबसे जरूरी धर्म कार्य बन गया है। मंदिर बनाने, पूजा, अष्टयाम और कीर्तन करने से भी बड़ा...।

मैंने 60-65 वर्ष के करीब दो दर्जन मुसलमानों का सर्वेक्षण किया है- किसी के 35, किसी के 40 तो किसी के 30 बेटे-पोते-पोतियां-परपोते-पोतियां हैंं। जो सबसे कम संतान वाले थे उनके बेटे-पोते-पोतियाेें की संख्या 24 थी। इसमें उनकी विवाहित बेटियों और नातियों, नतिनों की संख्या शामिल नहीं है। यह सर्वेक्षण बिहार-झारखंड के चार-पांच जिलों के मेरे दैनंदिन अनुभव पर आधारित है। लेकिन हिंदुओं में मुझे इसी उम्र समूह का एक भी आदमी नहीं मिला जिसकी संतानों की संख्या 20 भी हो। अब तक सर्वाधिक संतान वाले जो हिंदू वृद्ध मुझे मिले उनकी संतानों की संख्या 16 थी। औसतन वे 8-10 पे अटके हैं। कुछ जातियों में तो यह संख्या महज 4 या 5 तक सीमित है। इस उम्र समूह में परदादा बनने वाले हिंदू दुर्लभ ही मिलते हैं, अब। जागों हिंदुओं, जागो... जो मुद्दे मंदिर से ज्यादा जरूरी है, उस पर आपका ध्यान तक नहीं है।

धर्म गुरुओं के लिए... 

भारत में दर्जनों मंदिर, मठ, न्यास हैं जिनके पास अकूत संपत्ति है। अब समय आ गया है कि इन संपत्ति का उपयोग हिंदू धर्म की रक्षा में किया जाए। क्योंकि अगर भक्त बचेंगे, तो ही भगवान बचेंगे, धर्म बचेगा। मंदिर, मठ और न्यास भी बचेगा। इसलिए हे धर्म गुरुओं, मठपतियों, साधुओं, भक्तों को बचाओ। जब तक ठोस जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बन जाता (जिसकी संभावना नगण्य है) आप दो से ज्यादा बच्चा पैदा करने वाले हिन्दू माता-पिता को पुरस्कृत करो, बच्चों को गोद लो, उसे मुफ्त शिक्षा दो और उनका पालन-पोषण करो। यह एक बच्चे की संस्कृति हिंदू धर्म को लील जाएगी। एक पुरुष वाला परिवार कभी कोई लड़ाई नहीं लड़ सकता। देश की राजनीति जो शक्ल ले चुकी है, उसमें लड़ाई अवश्यसंभावी प्रतीत हो रही है। अब सरकारों के भरोसे हिंदुओं को नहीं छोड़ा जा सकता। आपने बहुत उपासना कर ली, अब कुछ काम करो। धर्म रक्षा के लिए सामने आओ। धर्म गुरुओं का काम केवल कर्मकांड ही नहीं है, धर्म के सामने मंडराते खतरे से निपटना भी आपका धार्मिक दायित्व है।

आने वाले समय में बुद्ध की तरह अपने ही देश में अगर गांधी जी अप्रासंगिक होंगे तो इसकी वजह गोडसे समर्थक नहीं होंगे। इसकी वजह होगी, कथित श्यूडो सेकुलर राजनीति और पाखंडी बुद्धिजीवी। ऐसा इसलिए कि जैसे-जैसे इस्लामिक जनसंख्या और जिहाद बढ़ता जाएगा हिंदू गांधी जी के सभी महान कर्म भूल कर उसे इस समस्या की जड़ मानने लगेंगे। दूसरी ओर मुसलमान उन्हें इसलिए कभी महान नहीं कहेंगे क्योंकि उनके शब्दकोश में गांधी जी कुछ भी हों मगर एक काफिर है और काफिर कभी महान नहीं हो सकता। अगर यह सच नहीं होता तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी गांधी जी का उतना ही सम्मान होता जितना भारत में है। इसलिए हे गांधीवादियों, अगर आप गांधी जी को उनकी मातृभूमि में ही अप्रासंगिक होने से बचाना चाहते हैं, तो सच की राह पर चलें। एक सुर से जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग करें। धार्मिक कट्टरता के हर स्रोत से परहेज करें। 

बचा-खुचा भारत एक और प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस का शिकार क्यों हो? अब तो गांधी, पटेल और नेहरु भी नहीं है... तो सीन क्या बनता है? प्रति कार्रवाई दिवस! यही न? दुनिया इसी ताक में है... इसलिए हे भारत पुत्रों, जितना जल्द हो सके जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाओ। यह पॉलिटिकल सेकुलरिज्म, विलासपूर्ण उदारवाद, वित्त पोषित किताबी आदर्शवाद को त्यागो और धार्मिक कट्टरता के हर बीज को ब्रह्मांड के बाहर फेंक दो। एक सुंदर, समृद्ध और सौहार्दपूर्ण भारत के निर्माण के लिए यह फौरी आवश्यकता है। पहल करो...।

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