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सेकुलर चीन और सेकुलर अमेरिका की कम्युनल कार्रवाई... कारण क्या ?

Bhola Tiwari Nov 29, 2019, 6:35 AM IST टॉप न्यूज़
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रंजीत कुमार

पटना : अपनी एकता, अखंडता और भविष्य के व्यापक खतरा को जिन दो-तीन देशों ने सबसे बेहतर समझा है और इससे निपटने के लिए कदम उठाया है उसमें बेहिचक पहले नंबर पर चीन, दूसरे स्थान पर अमेरिका और तीसरे स्थान पर इंग्लैंड को छोड़ लगभग समूचा यूरोप है। यही कारण है कि अपने देश में रहने वाले और बाहर से आने वाले एक-एक मुस्लिमों का अमेरिका संपूर्ण स्कैन करता है। चाहे आगंतुक किसी देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। वह अरब या अन्य मुस्लिम-इस्लामिक देशों से एक नया पैसा भी अमेरिका के एनजीओ को स्वीकार करने की इजाजत नहीं देता।


अरबी कंपनी तक का निवेश 40 एनओसी के बाद स्वीकार करता है। उधर चीन शिनजियांग प्रांत में बड़े पैमाने पर तुर्किश और उइगर मुसलमानों की धार्मिक कट्टरता की जड़ में मट्ठा डाल रहा है। संदिग्ध गतिविधि करने वालों को जहां सीधे कारावास भेज रहा, वहीं आम मुसलमानों के लिए दर्जनों कांन्सेट्रेशन कैंप चला रहा है। उसे मालूम है कि इस क्रम में वह मानवाधिकारों धज्जियां उड़ा रहा है, लेकिन उसे यह भी मालूम है कि चीन के भविष्य को सुरक्षित करने का कोई और तरीका भी नहीं है। धीरे-धीरे बात दुनिया भर में फैल रही है, तो मानवाधिकार को लेकर हल्ला उठेगा। लेकिन यह तय है कि चीन किसी की सुनेगा नहीं। अमेरिका भी किसी की सुनेगा नहीं? जबिक चीन में भी शासन पर काबिज समूह सेकुलर है और अमेरिकी राजनीति में भी सांप्रदायिकता न के बराबर है। तो सवाल उठता है कि वह धर्म विशेष को लेकर इतना कठोर क्यों है? ऐसा इसिलए कि वह खतरे का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में सक्षम है। उसने खतरे को मापा, परखा है और अपनी सेहत के लिए टीकाकरण अभियान चला रहा है। आप, हम और दुनिया चाहे उसकी भर्त्सना-आलोचना में गला फाड़ लें, वह अपना कार्यक्रम तब तक नहीं समेटेगा जब तक टीकाकरण अभियान पूर्ण न हो जाए। इस्लामिक कट्टरता के हर स्रोत को जड़ से उखाड़ न दिया जाए। एक अपना भारत है, भारत शायद दुनिया का अकेला बड़ा देश है जो शतुरमुर्ग बन जाने को ही सुरक्षा मानता है। चुनाव-चुनाव, महाराष्ट्र-कर्नाटक के अभ्यास को ही भविष्य मान बैठा है। वह भूल चुका है कि जब तक समाज स्थिर और शांत है, तभी तक उद्धव-अजीत-फड़णवीश जैसे सत्ताई गेम है। चीन भले ही हमारा सामरिक दुश्मन है, लेकिन हमें चीन से कुछ सीख लेने की जरूरत है।

 नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर चीन के शिन जियांग कान्स्ट्रेशन कैंप की एक झलक ली जा सकती है। और अंदर के भयावह दृश्य का अनुमान लगाया जा सकता है।https://www.hrw.org/news/2019/11/27/new-leaked-documents-reveal-chinas-chilling-crackdown-muslims

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