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शरद पवार के भतीजे ने इतिहास को दोहराया

Bhola Tiwari Nov 25, 2019, 9:44 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

बात साल 1978 की है,फरवरी में महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव संपन्न हुआ।विधानसभा चुनाव का परिणाम ऐसा था कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था।विधानसभा चुनाव में कांग्रेस(एस) को 69 सीट,कांग्रेस(आई) को 65 सीट और जनता पार्टी को 99 सीट मिलीं थीं।अपने दम पर कोई सरकार गठन नहीं कर सकता था तब कांग्रेस के दोनों धडों में ये सहमति बनी कि मिलकर सरकार बनाईं जाए।कांग्रेस की तरफ से बसंत दादा पाटिल सबसे वरिष्ठ और सबके चहेते नेता थे।उन दिनों शरद पवार को बसंत दादा पाटिल का सबसे भरोसेमंद शागिर्द कहा जाता था और दादा उनपर बहुत विश्वास करते थे।37 वर्षीय शरद पवार ने अपने गुरु बसंत दादा पाटिल के पीठ में छूरा घोंपते हुऐ कांग्रेस के 38 विधायकों के साथ जनता पार्टी के सहयोग से मुख्यमंत्री का पद हथीया लिया।कांग्रेस की टूट और शरद पवार के मुख्यमंत्री बनने पर दादा ने एक समाचार पत्र को साक्षात्कार में कहा था कि शरद मेरे साथ बैठकर खाना खाया और जाते समय कहा कि कोई गलती हो तो माफ करना दादा।चूँकि वो मेरे बेहद करीबी था और मैं उसे अपने पुत्र के समान मानता था, शक की गुंजाइश हीं नहीं थी।एक पुत्र या शागिर्द जिसने मेरी अंगुली पकड़कर चलना सीखा हो वो पीठ में खंजर घोंप दे तो कौन किसपर विश्वास करेगा।


आज शरद पवार के भतीजे ने इतिहास को दोहराया है।ये अदावत सुप्रिया सुले के राजनीति में एंट्री करने से हीं शुरू हो गई थी।अजित पवार अपनी बहन को प्रतिद्वंद्वी समझते थे और उन्हें हमेशा ये अंदेशा रहता था कि चाचा अपनी विरासत सुप्रिया को सौंप सकते हैं।अजित पार्टी में वर्चस्व कायम करना चाहते थे जो सुप्रिया के कारण संभव नहीं हो रहा था।सुप्रिया बहुत से मामलों में अजित दादा का खुलकर विरोध करती थीं।


लोकसभा चुनाव में अजित पवार ने अपने लड़के पार्थ के लिए लोकसभा टिकट की मांग की जिसे शरद पवार ने खारिज कर दिया।अजित नाराज हो गए, बाद में शरद पवार ने उनके पुत्र को लोकसभा का टिकट दे दिया मगर पार्थ पवार चुनाव हार गए।विधानसभा चुनाव में शरद पवार ने सुप्रिया के कहने पर अपने दूसरे भाई के पोते रोहित को टिकट दे दिया और वे जीत गए।अजित को शंका था कि पार्टी में उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है और उनके विकल्प के रूप में रोहित पवार को लाया गया है।ये सारी बातों के अलावा उन्हें इस बात का भी डर था कि अगर वह बीजेपी का साथ नहीं देंगे तो उन्हें विभिन्न आरोपों में जेल जाना होगा।

सूत्र तो ये भी बताते हैं कि अजित पवार के दिल्ली प्रवास के दौरान हीं सबकुछ सेटल्ड हो गया था।समर्थन की एवज में अजित पवार के खिलाफ केस को कमजोर करने का आश्वासन भी मिला था।भूपेंद्र यादव ने सारी व्यूहरचना तैयार की थी और अजित पवार ने इसमें अपनी सहमति जताई थी।

जीत या हार किसी की भी हो लेकिन इस बार महाराष्ट्र में लोकतंत्र हारेगा ये तो तय है क्योंकि भाजपा नेता नारायण राणे ने साफ कह दिया है कि बाजार में घोड़ें हैं और उन्हें खरीद लिया जाएगा।

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