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भाजपा + आजसू : कभी अलविदा ना कहना...

Bhola Tiwari Nov 20, 2019, 8:32 PM IST टॉप न्यूज़
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● ..सुदेश के खिलाफ भाजपा और रघुवर के खिलाफ आजसू का उम्मीदवार न देना बाद के रिश्तों में गुंजाईश की राह !


ऋषिकेश मुखर्जी

रांची : झारखंड में चुनाव का बिगुल बजते ही हर पार्टियों में रस्साकशी तेज हो चुकी थी। नूरा कुश्ती तो भाजपा और आजसू में भी खूब जमकर चली। 5 साल तक एक दूसरे के गले में हाथ डालकर चलने वाले ये दोनों दल अपनी अपनी लंगोट टाइट कर अखाड़े में उतर आए। दोनों दल आजसू और भाजपा में लगातार बनते बिगड़ते, बनते बिगड़ते समीकरण, पॉलिटिकल पंडितों को हैरान करते रहे तो पत्रकारों को परेशान भी किया। अंततः तोर-मोर, तोर-मोर करते हुए दोनों दल के रास्ते अलग हो गए। मगर दोनों ने अपनी-अपनी तरफ से एक गलियारे को छोड़ रखा है ताकि भविष्य में गले मिलने की गुंजाइश बरकरार रहे।

दरअसल भाजपा ने जहां आजसू सुप्रीमाे सुदेश महताे के खिलाफ प्रत्याशी नहीं दिया है, न ही आजसू ने सीएम रघुवर दास के खिलाफ काेई प्रत्याशी खड़ा किया है। इसके सियासी मायने झारखंड की आबोहवा में लगाए जाने लगे हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि सुदेश के खिलाफ भाजपा और रघुवर के खिलाफ आजसू का उम्मीदवार न देना बाद के रिश्तों में गुंजाईश जान पड़ती है।

हालांकि झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में दाेनाें दलाें के बीच व्यावहारिक ताैर पर गठबंधन नहीं रहा। सिर्फ कहने के लिए दाेनाें पार्टियाें ने अपनी अाेर से सीधे-सीधे यह नहीं कहा कि उनके बीच अब गठबंधन जैसी काेई चीज नहीं है। 

 सियासी बिसात पर दोनों दलों की ओर से दिए जा रहे व्यक्तियों को तौला जाए तो यह बात साफ नजर आती है कि दोनों दल के वक्ता एक दूसरे पर तल्ख और धारदार बयान देने से बच रहे हैं। दाेनाें पार्टियाें के लाेग एक दूसरे के खिलाफ कुछ भी बाेलने अाैर अाराेप- प्रत्याराेप से परहेज कर रहे हैं।

 सत्ता के गलियारों में चर्चाएं आम है कि दोनों दल सियासी चाल चलकर सियासी मायने साधने में माहिर है और मौका पड़ने पर एक साथ ताली बजाने से परहेज नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि BJP और AJSU 2000 में भले ही साथ मिलकर सरकार बनाई हो, लेकिन चुनाव 2014 में मिलकर लड़ी थी। इसके अलावा दोनों ने जितने भी चुनाव हुए हैं, सब में अलग-अलग किस्मत आजमाई थी। 2005 के विधानसभा चुनाव में BJP ने 63 सीटों पर लड़ी थी और 30 सीटें जीती थी। जबकि, AJSU 40 सीटों पर लड़कर दो सीटें जीती थी।

2009 विधानसभा चुनाव में BJP 67 सीट पर लड़कर 18 सीटें जीती थी और AJSU 54 सीट पर लड़कर 5 सीटें जीती थी। 2014 में BJP-AJSU ने मिलकर चुनाव लड़ा था। BJP 72 सीटों पर लड़ी 37 जीती और AJSU 8 सीटों पर लड़कर 5 जीती थी। इस तरह से साल 2000 में बना BJP और AJSU की दोस्ती का किला दरक गया है।

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