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सबरीमाला मंदिर विवाद : अब सात जजों की ऊपरी बेंच करेगी पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई

Bhola Tiwari Nov 15, 2019, 9:23 AM IST टॉप न्यूज़
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 अजय श्रीवास्तव

सुप्रीमकोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका को पाँच जजों की बेंच ने बडी बेंच के पास भेज दी है।पाँच जजों की बेंच में शामिल तीन जज चाहते थे कि ये मामला बडी बेंच को भेजा जाय,जबकि दो ने अपनी असहमति दी थी।बहुमत के आधार पर मामला बडी बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया है।अदालत ने फैसले के पुराने फैसले पर कोई स्टे नहीं लगाया है,इसका मतलब ये हुआ कि पुराना फैसला बरकरार रहेगी।

आपको बता दें सुप्रीमकोर्ट की पाँच सदस्यीय बेंच ने इसी साल फरवरी में महिलाओं के प्रवेश को लेकर अपने फैसले पर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था।इससे पहले सुप्रीमकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मंदिर में हर आयुवर्ग की महिला प्रवेश पा सकती हैं और धार्मिक अनुष्ठान कर सकती हैं।विद्वान जजों की खंडपीठ ने कहा था कि हमारी संस्कृति में महिला का स्थान आदरणीय है।यहाँ महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है।चीफ जस्टिस ने ऐतिहासिक फैसला पढ़ते हुए कहा था कि "धर्म के नाम पर पुरूषवादी सोच ठीक नहीं है।उम्र के आधार पर मंदिर में प्रवेश से रोकना धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है।फैसला पढते हुऐ चीफ जस्टिस ने कहा भगवान अयप्पा के भक्त हिंदू हैं,ऐसे में एक अलग धार्मिक संप्रदाय न बनाएं।कोर्ट ने कहा संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत प्रवेश पर बैन सही नहीं है।संविधान पूजा में भेदभाव नहीं करता है।

सुप्रीमकोर्ट के फैसले पर असंतुष्ट "त्रावणकोर देवासम बोर्ड" के अध्यक्ष ए.पद्मकुमार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी,यद्यपि पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाले लोग बहुत से हैं मगर त्रावणकोर देवासम बोर्ड प्रमुख है।

गौरतलब है कि केरल स्थित सबरीमाला मंदिर 800 साल पुराना है।मान्यता है कि भगवान अयप्पा के पिता शिव और माता मोहिनी हैं।विष्णु का मोहिनी रूप देखकर भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था।उनके वीर्य को पारद कहा गया और उनके वीर्य से हीं बाद में सस्तव नामक पुत्र का जन्म हुआ, जिन्हें दक्षिण भारत में "अयप्पा" कहा गया।शिव और विष्णु से उत्पन्न होने के कारण उनको "हरिहरपुत्र" कहा जाता है।इसके अलावा भगवान अयप्पा को अय्यप्पन, शास्ता,मणिकांता नाम से भी जाना जाता है।भगवान अयप्पा के दक्षिण भारत में बहुत से मंदिर हैं जिसमें सबरीमाला एक प्रमुख मंदिर है।

कुछ पुराणों में अयप्पा स्वामी को शास्ता का अवतार माना जाता है। स्वामी अयप्पा के अनुयायी मानते हैं कि वे ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते थे, इस वजह से मंदिर में महिलाओं का प्रवेश रोका गया है।ये सदियों पुरानी परंपरा है।नियम ये है कि मंदिर में प्रवेश के पहले 41 दिन पहले से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना पड़ता है।महिलाओं को हर महीने मासिकधर्म आता है, इस वजह से वो उन दिनो मे अपवित्र हो जाती हैं।इस वजह से एक निश्चित आयुवर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती है।

अब पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई सात जजों की ऊपरी बेंच करेगी और ये देखेगी कि पाँच जजों की संवेधानिक बेंच का फैसला सही है या नहीं।

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