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महात्मा गांधी के पदचिन्हों पर उनके पड़पोते "तुषार गाँधी"

Bhola Tiwari Nov 14, 2019, 7:28 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

दांडी यात्रा की 90 वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गाँधी ने ट्वीट कर कहा है कि मैं दांडी मार्च की 90 वीं वर्षगांठ पर 12 मार्च से 06 अप्रैल 2020 तक साबरमती से दांडी पथ पर चलूंगा।एकता, समानता, समावेश और न्याय में विश्वास करनेवालों का शामिल होने के लिए स्वागत है।कार्यक्रम से जुडे अन्य जानकारियों को जल्द हीं सभी से साझा किया जाएगा।

तुषार गाँधी के इस फैसले का स्वागत होना चाहिए।अपनी विरासत के मर्म को नई पीढी को बताना भी एक पुनीत कार्य है जो महात्मा गांधी के पड़पोते कर रहें हैं।मैं नहीं समझता कि इसमें कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत फायदे के एंगल को देखना जरूरी है।

दांडी मार्च की शुरूआत 12 मार्च 1930 में महात्मा गांधी ने अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया था।यह सविनय कानून भंग कार्यक्रम था।ये ऐतिहासिक सत्याग्रह कार्यक्रम गाँधीजी समेत 78 लोगों के द्वारा अहमदाबाद साबरमती आश्रम से समुद्रतटीय गाँव दांडी तक पैदल यात्रा कर नमक हाथ में लेकर नमक विरोधी कानून को भग किया गया था।गौरतलब है कि अंग्रेजी हुकूमत ने नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर बडी मात्रा में कर लगा दिया था, जिससे नमक के भाव गरीबों की पहुंच के बाहर हो गई थीं।नमक रोटी खाकर गुजारा करनेवाले गरीब को नमक भी मयस्सर नहीं हो पा रही थी।समाज के सभी वर्गों में उबाल को देखकर महात्मा गांधी ने "नमक के कानून" को तोडऩे का फैसला लिया था।


"नमक कानून" तोडऩे पर ब्रिटिश शासन ने लोगों पर तरह तरह के अत्याचार किये।कई बार लाठियां भांजी गईं, जिसमें कई लोग घायल हुऐ थे मगर लोगों ने इस दमनकारी कानून को तोडऩे का अटूट फैसला ले लिया था।हुकूमत ने जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल औ सी.राजगोपालाचारी समेत कांग्रेस के बहुत से वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था।संपूर्ण गुजरात में ये जनआंदोलन तकरीबन एक साल तक चला अंततः जनमानस के गुस्से को भांपकर साल 1931 में गाँधी-इर्विन के बीच हुऐ समझौते से खत्म हुआ।इसी आंदोलन से "सविनय अवज्ञा आंदोलन" की शुरुआत हुई थी।

मैं ये मानता हूँ कि यही वो आंदोलन था जिसने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों का जनसंघर्ष करने को प्रेरित किया था, जो आगे चलकर भारत की स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख कारण बना।

आपको बता दें कि महात्मा गांधी ने अपने 78 स्वंयसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से 358 किलोमीटर दूर स्थित दांडी की पैदल यात्रा 24 दिनों में 06 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर पूरी की थी।

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