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रामचंद्र परमहंस, अशोक सिंघल और लालकृष्ण आडवाणी बने आंदोलन के मुखिया

Bhola Tiwari Nov 10, 2019, 12:09 PM IST टॉप न्यूज़
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● आंदोलन की पटकथा परमहंस ने लिखी, आंदोलन की नींव रखी सिंघल ने, राजनीतिक चेहरा बन खेवनहार बने आडवाणी

 

सिद्धार्थ सौरभ

नई दिल्ली : अयोध्या विवाद के डिसिशन आने से पहले नब्बे के दशक में अयोध्या आंदोलन की पटकथा रामचंद्र परमहंस ने लिखी। आंदोलन की नींव अशोक सिंघल ने रखी थी और इस आंदोलन की राजनीतिक चेहरा बनकर लालकृष्ण आडवाणी खेवनहार बने। ज्ञात हो कि आडवाणी की अध्यक्षता में भाजपा ने 1989 लोकसभा चुनाव में इसे घोषणा पत्र में शामिल किया तो अशोक सिंघल 1984 में इस विहिप के संयुक्त महासचिव के तौर पर इस आंदोलन से जुड़े और पहली धर्म संसद बुलाई। उन्होंने 1989 लोकसभा चुनाव में इसे भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई।

पेशे से इंजीनियर विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष सिंघल ने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने के इस आंदोलन की नींव रखी । इससे पहले रामजन्मभूमि न्यास के प्रमुख संत रामचंद्र परमहंस और कुछ छोटे हिंदू समूह इसकी लगातार पैरवी कर रहे थे।

अस्सी के दशक के आखिर में भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी इस आंदोलन का राजनीतिक चेहरा बने जिन्होंने इस आंदोलन को परवान चढाया । उच्चतम न्यायालय ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।


रामजन्मभूमि आंदोलन में विभिन्न हस्तियों की भूमिका में सिंघल उस आंदोलन की रीढ़ थे और इसकी पूरी पटकथा उन्होंने लिखी थी। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने इसे राजनीतिक मसला बनाया जबकि रामचंद्र परमहंस आंदोलन के प्रणेता रहे।

सिंघल 1984 में इस विहिप के संयुक्त महासचिव के तौर पर इस आंदोलन से जुड़े और पहली धर्मसंसद बुलाई। उन्होंने राम मंदिर मसले पर संतों का समर्थन जुटाया। वह बाद में विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष बने और इसे जन आंदोलन बनाया। उन्होंने संतों, संघ नेताओं और भाजपा के बीच सेतु का काम किया।


उन्होंने 1989 लोकसभा चुनाव में इसे भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई। सिंघल का 2015 में निधन हो गया। आडवाणी की अध्यक्षता में भाजपा ने 1989 लोकसभा चुनाव में इसे घोषणा पत्र में शामिल किया।

हिंदू राष्ट्रवाद के जरिये चुनावी समर्थन जुटाने की कवायद में उन्होंने नब्बे के दशक की शुरूआत में राम रथयात्रा निकाली। उसके बाद से यह मसला भाजपा का ‘ट्रंपकार्ड’ बन गया। वहीं परमहंस इस हद तक इस आंदोलन से जुड़े थे कि एक बार उन्होंने यह तक कह दिया था,‘‘अगर भगवान राम भी आकर मुझसे कहें कि उनका जन्म यहां नहीं हुआ था तो मैं नही मानूंगा।’’ उनका 2003 में निधन हो गया। उन्होंने 1934 से आंदोलन की शुरूआत की थी। आजादी के बाद उन्होंने 1949 में विवादित स्थल पर राम की मूर्ति स्थापित की थी।


अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को संतुलित करार देते हुए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अब किसी भी पक्ष की हार या जीत का सवाल नहीं है, क्योंकि अदालत ने संतुलित फैसला सुनाते हुए सदियों पुराने मसले को अच्छी तरह हल कर दिया है।

गौरतलब है कि विहिप ने राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में 1990 में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिये पत्थरों को तराशना शुरू किया था। राम जन्मभूमि न्यास विश्व हिन्दू परिषद के सदस्यों का स्थापित ट्रस्ट है। इस ट्रस्ट की स्थापना अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से 18 दिसंबर 1985 को की गयी थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने शनिवार को सुनाये अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिये जिसके प्रति हिन्दुओं की आस्था है कि भगवान राम का जन्म वहीं हुआ था।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उनका संगठन यह उम्मीद भी करता है कि भगवान राम के प्रति भक्ति-भाव रखने वाले हिन्दुओं को ही प्रस्तावित ट्रस्ट में शामिल किया जायेगा।

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