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कौन है "फजलुर्रहमान" जिसने इमरान खान की शासन-सत्ता को चुनौती दी है?

Bhola Tiwari Nov 01, 2019, 12:34 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

मौलाना फजलुर्रहमान 27 अक्टूबर से पाकिस्तान के वजीरेआजम इमरान खान सरकार के खिलाफ इस्लामबाद मार्च पर निकलें हैं।सरकार मौलाना के इस्लामाबाद मार्च से दहशत में है और उसे पता है कि पाकिस्तान की दो सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टियाँ पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी(पीपीपी) और मुस्लिम लीग(एन) ने मौलाना के मार्च को समर्थन दे दिया है।पाकिस्तानी अवाम का गुस्सा भी इमरान खान को बैकफुट पर ला दिया है।पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगभग तबाही की ओर अग्रसर है,देश में रोजगार बिल्कुल नहीं है।खाद्य पदार्थों की कीमत आसमान छू रही हैं।कोई भी देश पाकिस्तान में इनवेस्टमेंट नहीं कर रहा है चीन को छोड़कर।अभी कुछ दिनों पहले चीन सरकार की अखबार "ग्लोबल टाईम्स" ने अपने संपादकीय में लिखा था कि पाकिस्तान को स्वालंबी बनना होगा।उसे अपने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कडे प्रयास करने होंगे।दरअसल अमेरिका के सहायता रोक देने से पाकिस्तान की कमर हीं टूट गई है और अगर चीन और सऊदी अरब हाथ खींचता है तो ये देश बिल्कुल तबाह हो जाएगा, इसमें तनिक भी शंका नहीं होनी चाहिए।

मौलाना फजलुर्रहमान ने जनता की भावनाओं को पढ लिया है और उसे पता है कि यही वो वक्त है जब सरकार पर चोट की जा सकती है।सेना सरकार के पैरलर अपना एजेंडा चला रही है और अब ये देखा जा रहा है कि सेना, सरकार के फेल्योर से किनारा कर रही है।इन डेढ़ सालों में इमरान सरकार पाकिस्तानी अवाम के लिए कुछ भी नहीं कर सकी है,अलबत्ता सरकारी नीतियों से महंगाई और बेरोजगारी में और इजाफा हीं हुआ है।

मौलाना का आरोप है कि इमरान खान सेना की मदद से सत्ता में आए हैं जबकि उनके पास बहुमत नहीं था।वे चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हैं और उनका कहना है कि इमरान खान विभिन्न मसलों पर बुरी तरह फेल हुऐ हैं,इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।पाकिस्तानी तानाशाह परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में भी मौलाना फजलुर रहमान ने इसी तरह का मार्च निकाला था और उसे पाकिस्तानी अवाम का जबरदस्त समर्थन भी हासिल हुआ था।उस समय सैन्य शासन था मगर अभी इमरान खान बेहद कमजोर और निरीह बने हुए हैं।ये वही फजलुर्रहमान हैं जिन्होंने 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 के हमले के बाद जब पाकिस्तान को मजबूरन तालिबान के खिलाफ अमेरिकी आँपरेशन में सखथ होना पडा था तो मौलाना ने मुशर्रफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।तानाशाह परवेज मुशर्रफ ने मौलाना फजलुर्रहमान को गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया था।मौलाना ने हीं 2007 में परवेज मुशर्रफ को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिकी राजदूत को सीक्रेट डिनर पर बुलाकर पीएम बनने के लिए समर्थन मांगा था,जो अमेरिकी केबल्स लीक से हुऐ खुलासे में सामने आ गई थी।

फजलुर्रहमान के आंदोलन को आजादी मार्च नाम दिया गया है और इसे विपक्ष का भी समर्थन हासिल है।इस आंदोलन की तपिश ने इमरान खान सरकार को बुरी तरह झुलसा दिया है और वे आरोप लगा रहें हैं कि इस आंदोलन के पीछे भारत है जो पाकिस्तानी सरकार को अस्थिर करना चाह रहा है।

ये तो मानना हीं पडेगा कि मौलाना को हर तरफ समर्थन मिल रहा है।31 अक्टूबर को वो इस्लामाबाद में रैली करनेवाले थे मगर ट्रेन हादसे की वजह से इसे एक दिन मुअत्तल कर दिया गया है।आज पाकिस्तान के क्वेटा,खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी, पेशावर शहरों से भारी हुजूम इस्लामाबाद पहुँचेगा और इमरान खान सरकार के भाग्य का फैसला करेगा।

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