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क्या मध्यपूर्व में "अरब स्प्रिंग" की आग अभी बरकरार है?

Bhola Tiwari Nov 01, 2019, 9:54 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

मध्यपूर्व में श्रृखंलाबद्ध विरोध-प्रर्दशन,धरना,हड़ताल और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचानें का दौर 2010 में आरंभ हुआ और धीरे धीरे ये संपूर्ण अरब में फैल गया।इस विरोध को अरब स्प्रिंग, अरब विद्रोह या अरब जागृति कहते हैं।ये विद्रोह इतना प्रबल था कि इसे एक जगह से दूसरे जगह पहुँचने में तनिक भी समय न लगा।इस क्रांति ने बडे बडे सूरमाओं के चूलें हिला कर रख दिये थे।इस क्रांति का नेतृत्व वहाँ की जनता कर रही थी,जो शासक के भष्टाचार और निकम्मेपन से ऊब गई थी।

अरब स्प्रिंग की शुरुआत 18 दिसंबर,2010 में टयूनीशिया में एक फल विक्रेता के आत्महत्या करने से शुरू हुई।ये आग तुरंत मध्यपूर्व के अन्य देशों अल्जीरिया, मिस्र, जार्डन और यमन में फैल गई।इस विरोध प्रर्दशनों के परिणामस्वरूप कई देशों के शासकों को सत्ता की गद्दी से हटना पड़ा या जनता ने उन्हें बेदखल कर दिया।बहरीन, सीरिया, अल्जीरिया, ईराक, सूडान, कुवैत, मोरक्को में भारी जनविरोधी हुइ तो ओमान, सऊदी अरब आदि देश भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुऐ थे।

वो आग जो 2010 में लगी थी आज भी बहुत से मध्यपूर्व देशों में सुलग रही है।लेबनान के प्रधानमंत्री साद अल-हरीरी ने भारी जनदवाब को देखते हुए इस्तीफा दे दिया है।लेबनान सरकार के खिलाफ वहां की महिलाएं सडक पर उतर गई थी और जबरदस्त प्रर्दशन किया था।लेबनान के निवासियों की भी वही मांग है जो अन्य देशों की है।वहां की सरकार महंगाई रोकने में नाकाम रही है, बेरोजगारों को रोजगार देने का वायदा सरकार ने किया था जो छलावा हीं साबित हुआ है।लेबनान की महिलाएं और आजादी की मांग कर रहीं हैं जिसे पूरा करने का लेबनान सरकार ने वायदा किया था।

लेबनान की तरह मिस्र में भी प्रर्दशन हो रहें हैं, जनता मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-हरीरी के इस्तीफे की मांग कर रहें हैं।बताते हैं कि मिस्र के राष्ट्रपति भारी दवाब में हैं और कभी भी उनका इस्तीफा हो सकता है।मिस्र के युवा भी सरकार से नौकरियों की मांग कर रहें हैं।बदहवाल अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और महंगाई पर काबू करने के लिए लोग सडको पर आंदोलनरत हैं।

इराक में हालत बेहद खराब है, वहाँ की सरकार ने प्रर्दशनकारियों पर गोली की बौछार कर लगभग 60 लोगों को मौत की घाट उतार दिया है।इराक के युवा सरकार से नौकरी मांग रहें हैं।आपको बता दें अरब स्प्रिंग में लगभग 60% युवा शिरकत कर रहें हैं जो सरकार से विभिन्न मसलों पर खफा हैं।इराक में तो भष्टाचार सर चढ बोल रहा है और सरकार इसके सामने बेबस है।नेतृत्वविहीन होने से इराक के आंदोलन को नुकसान पहुंच सकता है।

लेबनान सरकार ने जब तंबाकू, पेट्रोल और व्हाट्सएप काँल पर टैक्स लगाया तो वहां प्रर्दशन शुरू हो गए।

कुछ लोगों ने अरब स्प्रिंग को अब समाप्त मान लिया था मगर क्रांति अब भी अंदर हीं अंदर सुलग रही है और कभी भी विस्फोट कर सकती है।

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