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राजनीति की बिसात पर मोहरे सजाने में जुटे हैं शरद पवार, बीजेपी के संग जाने की सुगबुगाहट

Bhola Tiwari Oct 31, 2019, 3:26 PM IST टॉप न्यूज़
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● बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान के बीच किंग मेकर बनी सरकार


 सिद्धार्थ सौरभ

 मुंबई : राजनीति के विषाद पर मोहरे सजाने और चलने में माहिर एनसीपी के दिग्गज नेता शरद पवार इन दिनों चर्चा में है। पवार का पावर किस राजनीतिक दल के संग हो लेगा, यह भी दिलचस्प है। मगर महाराष्ट्र की राजनीति जिस दोराहे पर खड़ी है, उसके पहरेदार शरद पवार ही बताए जा रहे हैं।

बहरहाल महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच जारी खींचतान में जो व्यक्ति सबसे फायदे में है वो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष शरद पवार हैं। पवार और मुलायम सिंह यादव के बारे में कहा जाता है कि राजनीतिक में जब वो मोहरे चलते हैं तो उसका अंदाजा हार-जीत के माह बाद आता है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह ने जिस तरह अपने बेटे अखिलेश यादव को राजनीति में स्थापित किया उसका अंदाजा राजनीति में उनके सबसे करीबी और सगे भाई शिवपाल यादव तक नहीं लगा सके। कुछ यही हाल महाराष्ट्र में शरद पवार का है, पवार की चाल का अंदाजा 2014 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के बाद देखने को मिला था जब उन्होंने अपने एक ही चाल से शिवसेना का चित्त कर दिया था और शिवसेना को मजबूरी में पांच साल तक बीजेपी सरकार का साथ देना पड़ा। इससे पवार की महाराष्ट्र और देश में बीजेपी विरोधी छवि बनी रही। इस बार के विधानसभा चुनाव में शरद पवार की पार्टी एनसीपी ही सरकार विरोधी सबसे बड़े दल के रुप में उभरी है।


इस बार के विधानसभा चुनाव के बाद हालात 2014 जैसे ही दिख रहे हैं। हालांकि इस बार बीजेपी और शिवसेना का आपस में गठबंधन है लेकिन जिस तरह चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना बीजेपी पर आक्रामक है, उसे देखते हुए शरद पवार को अपने मोहरे सजाने का मौका मिल गया है।

सूत्रों की माने तो शरद पवार शिवसेना और बीजेपी दोनों दलों के नेताओं के संपर्क में है और फिलाहल बीजेपी के साथ जाने में उन्हें फायदा दिख रहा है। पवार के करीबी सूत्रों का दावा है कि अगर बीजेपी शिवसेना में अगले दो-तीन दिन में सहमति नहीं बनती है तो पवार अपने पत्ते खोल देगें। एनसीपी के एक धड़े का मामना है कि बीजेपी के साथ जाने से पार्टी विश्वास मत में अनुपस्थित रहकर भी बीजेपी सरकार की मदद कर सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार में पार्टी की सरकार विरोधी छवि पर असर भी नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने कई मुद्दों को लेकर बारगेन भी कर सकती है।

उधर, महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए बीजेपी के पास 9 नवंबर तक का वक्त है। ऐसे में बीजेपी किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है, सरकार के शपथ ग्रहण करने के बाद भी राज्यपाल बहुमत साबित करने के लिए 30 दिनों तक का समय दे सकते हैं। ऐसे में बीजेपी सरकार के पास बहुमत का जुगाड़ करने के लिए करीब 40 दिनों का समय है। ऐसे में मुख्यमंत्री देवेन्द्र एनसीपी से किसी तरह की मदद लेने से पहले शिवसेना से पूरी तरह मोलभाव कर लेना चाहते हैं।

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