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बारडोली का सरदार जब देश का सरदार बल्लभ भाई पटेल बन गया

Bhola Tiwari Oct 31, 2019, 8:25 AM IST टॉप न्यूज़
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● देश आज लौहपुरुष "सरदार वल्लभ भाई पटेल" की 144 वीं जयंती धुमधाम से मना रहा है


अजय श्रीवास्तव

स्वत्रंत भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार साहब की 144 वीं जयंती आज देश बडे धूमधाम से मना रहा है।आपका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड में हुआ।पिता का नाम झावेर भाई और माता का नाम लाडबा पटेल था।माता-पिता की चौथी संतान वल्लभ भाई बचपन से हीं कुशाग्र बुद्धि के थे।आपने लंदन से बैरिस्टर की पढाई की और भारत आकर अहमदाबाद में प्रैक्टिस शुरू कर दिया।

वकालत करने के दौरान सरदार पटेल का झुकाव गाँधीजी की तरफ हुआ और वे स्वत्रंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे।

एक और घटना ने सरदार पटेल को गाँधीजी के बेहद करीब ला दिया था वो "खेडा" का आंदोलन था।उन दिनों खेडा में भयंकर सुखा पडा था।वहां के किसान अंग्रेजी हुकूमत से लगान माफ करने और विभिन्न छूटों की मांग कर रहे थे मगर अंग्रेजों ने उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया।बल्लभभाई पटेल इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे और उनके आग्रह पर गाँधीजी भी इस आंदोलन में कूद पड़े।अंतः ब्रिटिश शासन को किसानों की मांग के आगे झुकना पड़ा और उनकी सभी मांगों को मान लिया गया।

सरदार पटेल के नेतृत्व में "बारडोली" का सशक्त सत्याग्रह हुआ जिसमें लोगों ने बल्लभभाई पटेल को बारडोली का सरदार कहा, तभी से वे सरदार के नाम से जाने लगे।

अपने संगठन क्षमता की वजह से सरदार वल्लभ भाई पटेल कांग्रेस के शीर्ष पर पहुंच गए।द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अंग्रेज़ी हुकूमत बेहद कमजोर हो गई थी और उन्होंने ये संकेत भी दे दिये थे कि कुछ हीं दिनों में भारत को स्वत्रंत कर दिया जाएगा।

29 मार्च 1946 को ब्रिटेन लेबर पार्टी के नेता और वहां के प्रधानमंत्री "क्लीमेंट एटली" ने भारतीय नेताओं से बातचीत के लिए कैबिनेट मिशन प्लान भेजा।इस तीन सांसदों सर स्टेफर्ड क्रिप्स, एबी एलेंजडर,पैथिक लारेंस का दल भारत में संविधान की रूपरेखा के संविधान सभा और अंतरिम सरकार बनाने का प्रस्ताव लेकर आया।एक तरफ मुस्लिम लीग पाकिस्तान बनाने का राग अलाप रहा था दूसरी तरफ आजाद भारत की अंतरिम सरकार की रूपरेखा क्या होगी?कौन नेतृत्व करेगा इस पर माथापच्ची शुरू हो गई।

महात्मा गांधी के पहल पर कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करने का दिन तय किया गया।गाँधीजी ने इशारा कर दिया था कि जो कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा वही स्वत्रंत भारत का पहला प्रधानमंत्री होगा।उन दिनों मौलाना अबुल कलाम आजाद कांग्रेस के अध्यक्ष थे।मौलाना आजाद खुद कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लडना चाहते थे मगर गाँधीजी ने उन्हें मना कर दिया।उन्होंने ये बातें अपनी किताब में लिखी हैं।

कांग्रेस के संविधान के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए पूरी एआईसीसी के सदस्यों का मतदान कराया जाता था लेकिन महात्मा गांधी इसे जल्दी पूरा करा लेना चाहते थे, इसलिए तय हुआ कि केवल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के मतदान से हीं अगला कांग्रेस अध्यक्ष चुना जाएगा।15 प्रदेशाध्यक्षों में से 12 ने सरदार पटेल का समर्थन किया।दो ने जेबी कृपलानी का और एक ने अपना मत जाहिर नहीं किया।बहुमत के बावजूद महात्मा गांधी ने सरदार पटेल को पंडित नेहरू का समर्थन करने को कहा और बडे दिलवाले सरदार पटेल मान भी गए,इस तरह सरदार पटेल स्वत्रंत भारत के प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए थे।

सरदार पटेल बेहद सादगी से जीवन व्यतीत करते थे, एक समय वे भारतीय लेजिस्लेटिव एसेंबली के अध्यक्ष थे।रोज के कामों को रोज हीं निपटा देना उनकी आदत में शामिल था।हुआ यूँ कि एक दिन वे एसेंबली के कामों से निवृत्त होकर घर जाने को हुऐ तभी एक अंग्रेज दंपति वहां पहुंच गया और उसने साधारण भेषभूषा पहने सरदार पटेल को चपरासी समझकर उन्हें ऐसेंबली घुमाने को कहा।सरदार पटेल सहर्ष तैयार हो गए और उन्होंने ब्रिटिश दंपति को पूरे एसेंबली की सैर करवाई।जब वे जाने लगे तो उन्होंने एक रूपया बख्शीश देनी चिहि मगर सरदार पटेल ने विनम्रता से इंकार कर दिया।

अगले दिन ऐसेंबली की बैठक में सभापति के आसन पर जब सरदार पटेल को बैठे उस दंपत्ति ने देखा तो वे बेहद शर्मिंदा हुऐ।उन्होंने इसका जिक्र एक किताब में किया था।

अपने कि के प्रति सरदार साहब कितने समर्पित थे ये 1909 में देखने को मिली।वे कोर्ट में केस लड रहे थे,उसी समय उन्हें अपनी पत्नी की मृत्यु का टेलीग्राम मिला।तार को पढकर उन्होंने जेब में रख लिया और दो घंटे तक कोर्ट में जिरह करते रहे और वे केस जीत गए।बहस खत्म होने के बाद न्यायाधीश और अन्य वकीलों को ये दुखद समाचार पता लगा।

देश आजाद होने के बाद बहुत से रियासतों ने भारत में विलय से इंकार कर दिया था।उसमें जम्मू कश्मीर की रियासत और हैदराबाद की रियासत प्रमुख थीं।सरदार पटेल ने अपने कुशल नेतृत्व में दोनों रियासतों का भारत में विलय करवा दिया था।हैदराबाद के निजाम से तो युद्ध तक करना पडा था मगर उन्होंने हैदराबाद रियासत की सेना को धूल चटा कर विजय हासिल की।

आज सरदार साहब के जन्मदिन पर संपूर्ण राष्ट्र उनको नमन कर रहा है याद कर रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज केवडिया जा रहें हैं जहाँ उनकी 182 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित की गई है।वे वहाँ एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे और राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद करेंगे।

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