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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आईसीयू में,हालत बेहद गंभीर

Bhola Tiwari Oct 27, 2019, 10:23 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की हालत बेहद गंभीर है और वे सेना के आधुनिक अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत से कडा संघर्ष कर रहें हैं।उनके प्लेटलेट्स लगातार गिर रहें हैं।एक तरफ प्लेटलेट्स लगाए जाते हैं दूसरी तरफ एक दिन के भीतर हीं प्लेटलेट्स फिर घट जाते हैं।वैसे तो उनको डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, यूरिक एसिड, हार्ट डिजीज बहुत सी बीमारियां हैं मगर ये नई बिमारी किसी को समझ नहीं आ रही है।जिंदगी के इस "संध्याबेला" में लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें मेडिकल ग्राउंड पर जमानत दे दी है लेकिन प्रश्न तो ये है कि वे जमानत पर छूटकर जाएंगें कहाँ?पाकिस्तान के सबसे बेहतरीन डाक्टर्स की टीम उनका ईलाज कर रही है।विदेश वो जा नहीं सकते, क्योंकि "मनीलांड्रिंग" के एक मामले में उन्हें 10 साल की सजा हुई है।उनके साथ उनकी बेटी मरियम नवाज को भी 07 साल की सजा मुकर्रर की गई है।


लाहौर हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच ने नवाज शरीफ के वकील को कहा है कि आप चाहें तो विदेश से किसी बड़े डाक्टर को पाकिस्तान बुलाकर उनका ईलाज करा सकते हैं, कोर्ट इसके लिए तैयार है।वजीरेआजम पाकिस्तान इमरान खान ने भी स्वास्थ्य मंत्री को हिदायत देते हुए कहा है कि शरीफ को बेहतर से बेहतर ईलाज उपलब्ध कराया जाए।दरअसल पाकिस्तानी जनता की क्रोध के जद में आ चुके इमरान खान नहीं चाहते हैं कि इस समय नवाज शरीफ को कुछ हो।नवाज शरीफ की मौत से अवाम का गुस्सा और भडकेगा जिसे संभालना सरकार के लिए टेढी खीर होगी।

आपको बता दें नवाज शरीफ का जन्म 25 दिसंबर 1949 को पाकिस्तान के एक रईस घराने में हुआ था।नवाज शरीफ के पिता एक सफल व्यापारी थे और उन्होंने अपने बच्चों को मजहबी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा भी दिया।सत्तर के दशक में नवाज शरीफ की रूचि राजनीति में होने लगी।जुल्फिकार अहमद भुट्टो को अपदस्थ कर जब जनरल जियाउल हक ने शासन संभाली तो उन्होंने नवाज शरीफ को वित्तमंत्री बनाया।1985 में वे पहली बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने।1990 में वे पहली बार पाकिस्तान के वजीरेआजम बने।तीन साल बाद राष्ट्रपति गुलाम इस्हाक खान से उनकी गंभीर अनबन हो गई और राष्ट्रपति ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया।नवाज शरीफ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और कोर्ट के आदेश पर उनकी सरकार बहाल कर दी गई।कुछ दिनों बाद नवाज शरीफ ने स्वंय इस्तीफा दे दिया।

1993 के आम चुनाव में जनता ने नवाज शरीफ को नकार दिया और बेनजीर भुट्टो ने सरकार बनाई।बेनजीर भुट्टो सरकार पर भी भष्टाचार के गंभीर आरोप लगने लगे थे,रोज भष्टाचार के नए मामले सामने आने लगे थे।आजिज आकर पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फारूक लेगारी ने बेनजीर सरकार को बर्खास्त कर दिया।

1997 में फिर आम चुनाव हुऐ और इस बार नवाज शरीफ ने बाजी मार ली।उन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।इसी दौरान भारत के प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी ने पाकिस्तान का दौरा किया था और उसके तुरंत बाद कारगिल युद्ध हुआ।दरअसल पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी अंधेरे में रखा था।उनसे बिना इजाजत लिए युद्ध छेड दिया गया जिसमें पाकिस्तान की बहुत जलालत हुई थी।

इस बार भी नवाज शरीफ अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकें, सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुशर्रफ ने उनका तख्ता पलट दिया और सत्ता की कमान अपने हाथ में ले ली।नवाज शरीफ को विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया और एक डील के तहत नवाज शरीफ और उनके परिवार को देश छोडना पडा।नवाज शरीफ और उनके परिवार को सऊदी अरब भेज दिया गया।

2006 में नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्टो में पाकिस्तान में लोकतंत्र बहाली करने के लिए एक समझौता हुआ।दोनों ने तय किया था कि वे मिलकर सैन्य शासन के खिलाफ लडाई लडेंगे।2007 में नवाज शरीफ लंदन से लाहौर आए मगर उन्हें एयरपोर्ट से हीं सऊदी अरब भेज दिया गया।

दो महीने के बाद वे फिर पाकिस्तान आए और इस बार वहाँ की जनता ने दिल खोलकर उनका स्वागत किया।2007 में जब बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई तो वो अस्पताल पहुँचने वाले पहले व्यक्ति थे।2008 के चुनाव में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और नवाज शरीफ की पार्टी ने मिलकर सरकार बनाई मगर कुछ हीं दिनों बाद नवाज शरीफ की पार्टी गठबंधन से अलग हो गई।

2013 में चुनाव में नवाज शरीफ की पार्टी मुस्लिम लीग फिर सत्ता में लौटी और नवाज शरीफ तीसरी बार प्रधानमंत्री बनें।2016 में पनामा पेपर्स लीक मामले में उनका नाम उजागर हुआ।इमरान खान ने इस मामले को खूब उछाला और सुप्रीमकोर्ट ने इस मामले में जाँच के आदेश दे दिए।नवाज शरीफ के संबंध सैनिक जनरलों से कभी अच्छे न थे और इस बार भी जनरलों ने साजिश कर नवाज शरीफ को फंसा दिया।संपत्ति की जाँच में उन्हें मुजरिम पाया गया।दोषी पाये जाने पर उन्हें संसद की सदस्यता से अयोग्य करार दे दिया गया और नतीजतन उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पडा।भष्टाचार के मामलों में उन्हें सजा सुनाई गई और वही सजा अब वो काट रहें हैं।

पाकिस्तानी सेना ने वास्तविक शक्ति अपने हाथ में रखकर इमरान खान को कठपुतली प्रधानमंत्री बना दिया है,जो एक कदम भी सेना की इजाजत के बिना नहीं चलते हैं।पाकिस्तान में लोकतंत्र उपहास का विषय है।आजादी के बाद से हीं पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व रहा है और आगे भी रहेगा। हम नवाज शरीफ के लिए दुआएं हीं तो कर सकते हैं और वही कर रहें हैं।

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