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भानुमती ने कुनबा जोड़ा...

Bhola Tiwari Oct 14, 2019, 6:06 AM IST कॉलमलिस्ट
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एसडी ओझा

भानुमती कम्बोज के राजा चन्द्रवर्मा की पुत्री थी । वह अत्यंत रुपवती थी । पिता ने इसके लिए योग्य वर की तलाश बहुत की । योग्य वर न मिलने पर चन्द्रवर्मा ने स्वय॔वर का आयोजन किया । इस आयोजन में शिशुपाल, दुर्योधन, जरासंध और कर्ण जैसे महारथी शामिल हुए थे। जब भानुमती दासियों से घिरी स्वयंवर सभा में पहुँची तो उसे देखकर सभा के लोग चकित रह गये । सबकी आंखों में उसके रुप लावण्य का जादू जाग गया था । सभी चाहते थे कि भानुमती उसी के गले में वर माला डाले । मतलब यह कि एक अनार सौ बीमार वाली बात हो गयी थी । भानुमती वर माला लिए सभा में घूमने लगी । उसको रिझाने के लिए सभी गण्यमान्य लोग तरह तरह की मुद्रा बनाने लगे । इसमें दुर्योधन भी शामिल था।

भानुमती एक क्षण के लिए दुर्योधन के पास रुकी और फिर आगे बढ़ गयी । उसे आगे बढ़ते देख दुर्योधन अधीर हो उठा । उसने इसे अपना अपमान माना और भानुमती से जबरन वर माला अपने गले में डलवा ली । यह अनीति सभा में उपस्थित राजाओं से सहन नहीं हुई । उन सभी ने अपनी अपनी तलवार म्यान से खींच ली । दुर्योधन यह कहता हुआ सभा स्थल से भानुमती को लेकर चला गया कि मुझ तक पहुँचने से पहले कर्ण के पराक्रम से लड़ो । कर्ण ने बड़ी आसानी से सभी पराक्रमियों को हरा दिया । केवल जरासंध को हरा नहीं पाया । जरासंध से 21 दिन तक युद्ध हुआ, तब कहीं जाकर कर्ण जीत पाया । कर्ण के पराक्रम को देखकर जरासंध बहुत खुश हुआ । जरासंध ने मालिनी का क्षेत्र कर्ण को उपहार में दे दिया ।

हस्तिनापुर पहुँचकर दुर्योधन ने भानुमती को समझाया कि उसका अपहरण पहली बार नहीं हुआ है । इसके पहले भी भीष्म पितामह अपने भाइयों के लिए अम्बा , अम्बिका और अम्बालिके का अपहरण कर चुके हैं । भानुमती मान गयी और धूमधाम से उनकी शादी हुई थी । भानुमती दुर्योधन को बहुत मान देने लगी । वह कर्ण का भी बहुत सम्मान करती थी । कर्ण के कारण हीं भानुमती व दुर्योधन सकुशल हस्तिनापुर पहुँच पाए थे । कर्ण बेरोक टोक भानुमती के अंतःपुर में जाने लगा । इस बात का न कभी दुर्योधन ने बुरा माना और न भानुमती ने । 

एक दिन कर्ण और भानुमती अंतःपुर में चतुरंग खेल रहे थे । तभी दुर्योधन के आने की खबर पहुँची । भानुमती दुर्योधन के स्वागत के लिए उठने लगी । कर्ण को लगा कि भानुमती चतुरंग की हार से बचने के लिए बहाना बना रही है । कर्ण ने हाथ बढ़ाकर भानुमती को रोकना चाहा । इस क्रम में कर्ण के हाथ में भानुमती का आंचल आ गया । आंचल फट गया । भानुमती के गले में पड़ा मोतियों का हार टूटकर बिखर गया । दुर्योधन समीप आ चुका था । अब कुछ नहीं हो सकता था । दोनों अपराधी की तरह सिर झुकाकर खड़े हो गये । दुर्योधन ने दोनों को इस हालत में देखा । वह मुस्कुरा उठा । कहा - तुम दोनों बिखरे मोतियों को उठाओगे या मैं भी कुछ मदद करुं । इतना विश्वास था दुर्योधन को कर्ण पर और अपनी पत्नी पर ।

भानुमती मल्ल युद्ध में भी पारंगत थी । वह खेल खेल में दुर्योधन से उलझ जाती और कई बार उसे हरा भी देती थी । दुर्योधन व भानुमती के प्यार के निशानी के तौर पर एक बेटा और एक बेटी हुई । बेटे का नाम लक्ष्मण और बेटी का नाम लक्ष्मणा था। कहते हैं कि इतिहास अपने को दोहराता है । यहाँ भी इतिहास दोहराया गया । कृष्ण और जामवंती के बेटे साम्ब ने लक्ष्मणा का अपहरण कर लिया । दोनों एक दुसरे को बहुत चाहते थे । जब दुर्योधन को इस बावत पता चला तो उसने सेना भेजकर साम्ब को पकड़वा मंगाया । उसको कैद में डाल दिया । 

बलराम हस्तिनापुर आए । उन्होंने दुर्योधन को काफी समझाया । उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि विवाह के लिए अगवा करना दोनों परिवारों में आम बात है । केवल लड़की की अपहरण में सहमति होनी चाहिए । ज्ञातव्य हो कि कृष्ण ने रुक्मणी, अर्जुन ने सुभद्रा का अपहरण उनकी सहमति से की थी ; जबकि भीष्म पितामह और दुर्योधन ने जबरन अपहरण किया था । दुर्योधन नहीं माना । बात बनती न देख बलराम को भी गुस्सा आ गया । वे दुर्योधन के महल से बाहर आकर जमीन में अपना हल गाड़कर हिलाने लगे । पूरा हस्तिनापुर हिल उठा । लगा कि प्रलय आ गया है । भानुमती के समझाने बुझाने से आखिर दुर्योधन माना । मामला शांत हुआ । साम्ब और लक्ष्मणा का विवाह धूमधाम से हुआ था ।

दुर्योधन और भानुमती का बेटा लक्ष्मण अभिमन्यु के हाथों मारा गया था । भीम ने भी दुर्योधन को मार गिराया था । अर्जुन भी कर्ण को मार चुके थे । ऐसे में भानुमती अकेले पड़ गयी । महाभारत युद्ध के बाद भानुमती ने अर्जुन से शादी कर ली थी । जिंदगी अकेले नहीं कटती । इसे सहारे की जरुरत होती है । भानुमती को वह सहारा अर्जुन में मिला । पति और बेटे की मौत के बाद उसका सब आसरा छिन गया था , किन्तु आम लोगों में यह धारणा बनी - भानुमती अपने निहित स्वार्थ के लिए अर्जुन से शादी की । तभी से आम जन में यह कहावत प्रसिद्ध हो गयी थी - 

कहीं का ईंट , कहीं का रोड़ा ।

भानुमती ने कुनबा जोड़ा ।

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