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मद्धेशियों के आंदोलन में भारत सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण नेपाल चीन के करीब आया था?

Bhola Tiwari Oct 12, 2019, 1:58 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

नेपाल में आई विनाशकारी भूकंप ने सबकुछ तबाह कर दिया था,नेपाल की जनता जीवनरक्षक दवाओं, पेट्रोल, डीजल और बहुत सी जरूरी चीजों के लिए जूझ रही थी।भारत सरकार ने उन दिनों नेपाल की खूब सहायता की मगर भूकंप के थोड़े दिन बाद नेपाल में मद्धेशी आंदोलन शुरू हो गया।दरअसल नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार देश में नया संविधान लागू कर रही थी, जिसमें वहाँ सैकडों सालों से रह रहे मद्धेशियों के साथ भेदभाव किया गया था।नेपाल के मूल निवासी हाल में पारित संविधान का समर्थन कर रहा था।नये संविधान के अनुसार परिसीमन आबादी के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिकता के आधार पर किया गया था,जो मद्धेशियों को मंजूर नहीं था।नेपाल में मद्धेशियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 51% है।

नेपाल और भारत का सैकड़ों साल पुराना नाता है।कहावत है कि मद्धेशी और मिथिलांचल के लोगों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता लगातार बना रहा है मगर नेपाल के नये संविधान के अनुसार मद्धेश में ब्याही जाने वाली भारतीय औरतों को विदेशी माना जाएगा।इस नए संविधान से मद्धेशियों और वहाँ के मूल निवासियों के बीच गहरी खाई पैदा हो गई और मद्धेशी आंदोलनरत हो गए।तराई में रहनेवाले मद्धेशियों ने भारत-नेपाल बार्डर पर नाकेबंदी कर दी।भारत से नेपाल जानेवाली सभी जरूरी सामानों को बार्डर पर रोक दिया गया।उन दिनों नेपाल भूकंप की विभिषिका से जूझ रहा था, उसे दोहरी मार नाकेबंदी से पडी।आंदोलन से हालात बद से बदतर हो रहे थे,सरकार के पास जीवनरक्षक दवाओं का अभाव हो गया।डीजल,पेट्रोल की किल्लत ने नेपाल की जनमानस को पंगु सा कर दिया था।


नरेंद्र मोदी सरकार दिखाने के लिए तो नेपाल सरकार के साथ थी मगर वे आतंरिक रूप से मद्धेशियों का समर्थन कर रहे थे।भारत सरकार ने आंदोलन को समाप्त करवाने के लिए कभी सार्थक प्रयास नहीं किया।नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी.ओली ने सरेआम भारत सरकार पर ये आरोप लगाया कि भारत सरकार के सहयोग से हीं ये आंदोलन चल रहा है और भारत सरकार खूलकर मद्धेशियों का साथ दे रही है।

नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा,"नाकाबंदी का दंश जिन लोगों को सबसे अधिक भोगना पड़ रहा है, उसमें गर्भवती महिलाएं, स्कूल जाने वाले बच्चे और वे लोग भी शामिल हैं,जिन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता की जरूरत है।" चीन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि पडोसी मुल्क ने तेल से लेकर हर जरूरी चीज में उसकी सहायता की है और वह भविष्य में चीन के साथ व्यापारिक संबंध बढाएंगे।

लगातार 80 दिनों की नाकेबंदी से बिफरे नेपाल ने चीन की साम्यवादी सरकार से मदद माँगी,फिर तो चीन ने सहायता की झडी लगा दी।चीन सरकार ने नेपाल को वो सभी कुछ दिया जो उसकी जरूरत थी।तभी से काठमांडू ने भारत पर पूर्ण आत्मनिर्भरता कम कर दिया है, आज नेपाल भारत के मुकाबले बीजिंग को अधिक महत्व देता है।

चीन के राष्ट्रपति इन दिनों भारत में हैं और 12 अक्टूबर की रात चेन्नई से नेपाल पहुँचेंगे।चीन के राष्ट्रपति नेपाल को हिमालय क्षेत्र में कनेक्टिविटी नेटवर्क के लिए कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं,जो नेपाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।बीजिंग राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नेपाल यात्रा के प्रति कितना संवेदनशील है ये चीनी उप विदेशमंत्री लुओ जाओहुई की मीडिया ब्रीफिंग से समझा जा सकता है।जाओहुई ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक यात्रा है।इस यात्रा के ऐतिहासिक परिणाम होंगे।

आपको बता दें बीजिंग विवादास्पद बेल्ट एंव रोड परियोजना के तहत 2.75 अरब डाँलर की ट्रांस-हिमालय परियोजना को चीन सरकार द्वारा विदेश में शुरू की गई सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढ़ांचा योजनाओं में से एक माना जाता है।चीन के उप विदेशमंत्री ने ये भी कहा कि शी की यात्रा से चीन-नेपाल द्विपक्षीय संबंधों में और अधिक गर्माहट आएगी।दोनों देश सीमावर्ती बंदरगाहों, रेलवे, सड़क, विमानन और दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार की दिशा में काम कर रहें हैं।

गौरतलब है कि भारत चीन की वन-चाईना पाँलिसी का कट्टर विरोधी है मगर नेपाल भारत के इतर इसका बडा समर्थक है।नेपाल किस कदर बीजिंग का समर्थन कर रहा है इसकी एक बानगी 06 जुलाई को तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा के जन्मदिन पर दिखा।दलाईलामा का जन्मदिन विश्व के सभी देशों ने मनाया मगर नेपाल सरकार ने एक सार्वजनिक आदेश जारी कर कहा कि नेपाल में दलाईलामा का जन्मदिन कोई न मनाए,नहीं तो विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।दरअसल नेपाल किसी भी सूरत में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नाराज नहीं करना चाहता है।अंदरखाने से खबर है कि नेपाल और चीन ऐसी संधि करने जा रहें हैं जिसके बाद वहां तिब्बतियों का रहना मुश्किल हो जाएगा।

सभी देशों को अपने हित में समझौता करने का अधिकार है और यही काठमांडू कर रहा है।मद्धेशियों के आंदोलन के पहले नेपाल पूरी तरह भारत पर निर्भर था मगर भारत सरकार के एक गलत कदम ने नेपाल को भारत से बहुत दूर कर दिया है।ये भी सही है कि जितना चीन नेपाल को सहायता दे रहा है भारत उतनी सोच भी नहीं सकता।

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