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मुर्शिदाबाद जाऊं कि महाबलीपुरम!

Bhola Tiwari Oct 12, 2019, 1:25 PM IST टॉप न्यूज़
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रंजीत कुमार

नजरिया! गलत हो या सही, बड़े आदर का इंसानी शय है। कभी-कभी तो मुझे नजरिया आत्मा से भी ज्यादा पवित्र लगता है। कारण यह कि सब कुछ बेच-विपण लेने के बाद भूख, प्यास, काम, लोभ, मोह, माया, ईर्ष्या, द्वेष, भोग, विलास के मारे आदमी के पास एक नजरिया ही तो बचा था, जिसे आदमी ने गुलाम होने से बचा रखा था। लेकिन अपने पाखंड पर पर्दा डालने के लिए इंसान ने अपने इस गहने की भी बलि दे दी है। हैरत की बात यह कि रिवाज किसी पंडित, मौलवी ने नहीं, विद्वानों और नेताओं ने फैलाया है। 

चर्चा दर्शन शास्त्र की ओर भाग कर रन आउट न हो जाए, इसलिए इसे शीर्षक के क्रीज में खीच लाता हूं। तो हुआ यह कि पिछले दिनों महज नींबू के लिए देश के जाने-माने सभी विद्वानों ने धड़ाधड़ फ्रांस की यात्रा शुरू कर दी। वहां एक भारी-भरकम नेता ने राफेल की नजर उतारने के लिए उसका परिछन किया था, जिसमें दो पहियों के तले दो नींबू की मॉब लिंचिंग कर दी गई थी। इस भीषण दुर्घटना पर देश की चिंता में दुबले हो चुके विद्वानों की आत्मा रो पड़ी। तब से वे लगातार नींबू विमर्श किए जा रहे हैं, किए जा रहे हैं, किए ही जा रहे हैं। मन गद-गद हो गया। कितना महान है अपना देश जहां लाखों सेना वाली फौज के वजीरे आलम विमान की नजरें उतारते हैं और विद्वान लोग इस परिछन की प्रासंगिकता, वैज्ञानिकता, अंधविश्वास, विश्वास पर अनुसंधान कर रहे हैं।        

तो जब नींबू विमर्श समाप्त होने की कगार पर था तो मुझे लगा कि ये फ्रांस से लौटकर अब मुर्शिदाबाद की ओर रुख करेंगे। लेकिन ये क्या? तमाम संवेदनशील विद्वान महाबलीपुरम की ओर निकल लिए हैं। मुर्शिदाबाद में क्या हुआ? कुछ तो नहीं। बस एक आठ महीने की गर्भवती महिला, उसके किशोर बच्चे और पति की हत्या ही तो हुई। कोई मॉब लिचिंग थोड़े हुआ। मरने वाला परिवार हिंदू था, नहीं-नहीं वह आरएसएस का कार्यकर्ता था। तो आरएसएस जाने! विद्वान आदमी के पास आरएसएस से जुड़े लोगों की हत्या पर दुखी होने का फालतू समय थोड़े है! नजरिया को थोड़ा सा गुलाम बनाएं, आप भी मेरी बातों से सहमत हो जाएंगे। आप भी कहने लगेंगे कि हिंदुओं की मॉब लिंचिंग नहीं हो सकती। आरएसएस वालों की हत्या नहीं होती, उनके साथ अन्याय नहीं होता... यह सब तब होता है जब मारे गए कोई अखलाक या तवरेज हो, भाजपा शासित राज्य में हो। कुछ नहीं बस नजरिया के साथ बलात्कार करें, यह सब आपको सौ प्रतिशत सही लगेगा। आप इस पर घंटो विमर्श करने की स्थिति में होंगे। और कुछ दिन प्रतीक्षा कर लें, बंगाल पुलिस आरएसएस के चचेरे-मौसेरे किसी संगठन के दो-चार लोगों को गिरफ्तार करेगी, महाममतामय मुख्यमंत्री इसे हिंदू ध्रुवीकरण की भाजपाई साजिश बता देगी। नजरिया फिर बेची जाएगी... कहा था न? देखो, संघ की चाल, राजनीति के लिए अपने ही कार्यकर्ता को मरवा डाला...             

तो भाई यह रही नो वन डेस्टिनेशन बने मुशिर्दाबाद की कहानी। फिलहाल तो उनका ड्रीम डेस्टिनेशन महाबलीपुरम हैं। कोई धोती विमर्श में लगा है तो कोई बता रहा है कि जिनपिंग की कमीज में कितने बटन बंद हैं और कितने खुले हैं। नजरिया फिर गया तेल लेने। किसी को महाबलीपुरम के रास्ते भारत पहुंचने के लिए बेकरार आईटी जाइंट हुआई के कदमों की आहट नहीं सुनाई दे रही है। खैर, यकीन मानिए जब हुआई का कदम भारत में पड़ेगा, तमाम देसी टेलीकाम वेंडर मुर्शिदाबाद गति को प्राप्त करने लगेंगे तो नजरिया एक बार फिर बेची जाएगी। हुआई के हाथों सरकार के नतमस्तक होने का विमर्श प्ले ऑन किया जाएगा... फिलहाल, ऐसे विमर्श को साइन आउट करना ही मुनासिब है!

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