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"ब्लू गर्ल" सहर खोड़यारी की शहादत आज रंग लाएगी

Bhola Tiwari Oct 10, 2019, 9:59 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

आपको याद होगा कुछ दिनों पहले ईरान की एक लड़की ने कोर्ट परिसर में आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी।दरअसल वो फुटबॉल प्रेमी थी और वह अपनी पसंदीदा टीम का मैच स्टेडियम में जाकर देखना चाहती थी मगर पुरूष भेष में स्टेडियम में घुसने से पहले ईरानी पुलिस ने उसे पकड़ लिया।इस जुर्म के लिए ईरानी पुलिस ने उन्हें समन भेजा था।उदास और क्षुब्ध सहर ने कोर्ट परिसर में हीं आत्महत्या कर ली।

इस घटना ने ईरान समेत संपूर्ण विश्व को हिलाकर रख दिया, महिलाओं के लिए काम करने वाली बहुत से संगठनों ने इसके विरुद्ध मोर्चा खोल रखा था।आपको बता दें ईरान में "इस्लामिक क्रांति" से पहले ये पाबंदी नहीं थी कि महिलाएं स्टेडियम में जाकर मैंच नहीं देख सकती।पहलवी वंश के शासनकाल में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिला था और वे स्वत्रंत जीवन जीतीं थीं, मगर इस्लामिक क्रांति के बाद रूहानी ने ईरान को इस्लामिक देश बना दिया और महिलाओं पर तरह तरह के प्रतिबंध लगा दिये थे।इसमें एक प्रतिबंध ये भी था कि महिलाएं स्टेडियम में पुरुषों के साथ बैठकर मैच नहीं देख सकतीं।गौरतलब है कि ईरान में फुटबॉल को बहुत पसंद किया जाता है और सभी इस खेल से बहुत प्यार करते हैं।

सहर भी एक फुटबॉल प्रेमी लड़की थी और वह अपनी टीम का समर्थन करने के लिए स्टेडियम में जाना चाहती थी।वो चाहती थी कि यूरोप और अन्य एशियायी देशों की तरह औरतों को भी स्टेडियम में जाने दिया जाए मगर ईरान की पितृसत्तात्मक शासन को ये मंजूर नहीं था।

सहर ने अपने जीवन को बलिदान कर ईरानी महिलाओं को स्टेडियम में जाकर मैच देखने का रास्ता खोल दिया है।

फीफा ने ईरान सरकार पर दवाब बनाया है कि अगर वो महिलाओं को स्टेडियम में जाकर मैच देखने की अनुमति नहीं देगा तो उसे फीफा की सदस्यता से हाथ धोना पडेगा।आज ईरान की 3500 महिलाएं बेरोकटोक मैंच देखेंगी मगर उनके साथ "सहर" न होगी, जिसके कारण ये मुमकिन हुआ है।महिलाओं की टिकट काउंटर खुलने के एक घंटे में हीं बिक गई।ईरानी महिलाओं का उत्साह चरम पे है मगर उनके दिल में सहर के लिए दुख और संवेदना भी है।आज 2022 फीफा विश्व कप क्वालीफायर में ईरान की राष्ट्रीय टीम कंबोडिया के खिलाफ तेहरान के "आजादी स्टेडियम" में उतरेगी।

ईरान की महिलाओं के स्टेडियम में प्रवेश को लेकर सहर का बलिदान अतुलनीय है मगर फीफा का ईरान को चेतावनी भी कम बेहद महत्वपूर्ण नहीं है।ये फीफा का हीं दवाब है जो ईरान की सरकार को झुकने के लिए मजबूर होना पडा है।सहर खोड़यारी की सहादत को संपूर्ण विश्व सलाम करता है।तुम बहुत याद आओगी सहर।

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