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सहर खोड़यारी की आत्महत्या के बाद झुका ईरान

Bhola Tiwari Oct 07, 2019, 9:46 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

सहर खोड़यारी ने मात्र 29 साल की उम्र में अपनी इहलीला समाप्त कर ली।वो एक आम लड़की की तरह फुटबॉल प्रेमी थी और वह स्टेडियम में जाकर मैच देखना चाहती थी, मगर ईरान की दकयानूसी कानून एक महिला को स्टेडियम में जाकर पुरूषों के मौजूदगी में फुटबॉल देखने की इजाजत नहीं देता।उसने मनाही के बावजूद स्टेडियम जाने का फैसला लिया।उसने पुरूष भेषभूषा धारण कर स्टेडियम में घुसने का प्रयास किया मगर वो पकडी गई।

इस गंभीर जुर्म के लिए सहर को कोर्ट ने समन भेजा।पुरूषवादी मानसिकता का ईरान का कानून ये बर्दाश्त करने को तैयार नहीं था कि एक महिला कैसे इस्लामिक कानून का उल्लंघन कर सकती है।सहर ने कोर्ट परिसर के भीतर हीं आत्मदाह कर लिया।90% जली सहर दो हफ्ते जीवन और मौत के साथ संघर्ष करती रही और फिर उसने दम तोड़ दिया।

सहर की मौत ने ईरान को हिलाकर रख दिया, लोग कठमुल्लों के खिलाफ आवाज उठाने लगे तब ईरानी सरकार ने ये वादा किया कि वो कंबोडिया के साथ होने वाले फुटबॉल मैच में कम से कम 3500 महिला प्रशंसकों को स्टेडियम में मैच देखने की अनुमति देगा।ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी इरना ने चार अक्टूबर को इस बात की पुष्टि की है कि ईरानी फुटबॉल फेडरेशन ने फीफा से वायदा किया है कि 10 अक्टूबर को तेहरान आजादी स्टेडियम में होने वाले फुटबॉल मैच में ईरानी महिलाओं को आने की अनुमति देगा।

ईरान सरकार के इस ऐलान से सभी 3500 सीट तुरंत बुक हो गए।फीफा ने ईरान फुटबॉल फेडरेशन को कहा है कि वह मैच के दौरान अपने पर्वेक्षक भेजेगा जो यह देख सके कि मैच में महिलाएं उपस्थित है या नहीं।

आपको बता दें ईरान में महिलाओं पर पाबंदी इस्लामिक क्रांति के बाद यानी 1979 में लगी।पहलवी वंश के शासनकाल में ईरान यूरोप को मात देता था।क्या महिला और क्या पुरूष सभी को पूर्ण आजादी थी।वे जहाँ चाहें जा सकते थे, कोई बडी पाबंदी लागू नहीं थी।जो भी लेटेस्ट फैशन यूरोप में आता वह तुरंत ईरान जा पहुंचता था।

इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में आयातोल्लाह खोमैनी ईरान के प्रमुख बने और खुमैनी ने हीं ईरान में कट्टर इस्लामिक शासन की शुरुआत की।ईरान शिया बहुलता वाला देश है और खुमैनी ने ईरान को कडी पाबंदी के बीच रखा,जिसका समय समय पर विरोध होता आया है।

एक लड़की ने अपनी जान देकर ईरानी महिलाओं के लिए स्टेडियम में मैच देखने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाय वो कम है।काश अगर सरकार समय पर चेत जाती तो एक बेकसूर लड़की को अपनी जान यूँ नहीं गवानी पड़ती।

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