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जम्मू कश्मीर में दरबार मूव : राजशी प्रथा और 200 करोड़ का मामला

Bhola Tiwari Oct 05, 2019, 10:18 AM IST टॉप न्यूज़
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● जम्मू में चार नवंबर को आ जाएगा दरबार, श्रीनगर में 25-26 अक्तूबर काम का आखिरी दिन

जम्मू : जम्मू कश्मीर में सर्दियों की आहट से पहले एक बार फिर दरबार यानि सचिवायल को श्रीनगर से जम्मू शिफ्ट करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में 25 अक्तूबर को बंद दरबार शीतकालीन राजधानी जम्मू में 4 नवंबर को खुलेगा। सामान्य प्रशासनिक विभाग के आदेश में सप्ताह में पांच दिन चलने वाले कार्यालय 25 अक्तूबर और छह दिन चलने वाले कार्यालय 26 अक्तूबर को बंद होंगे। सभी विभाग आखिरी दिन रिकार्ड इकट्ठा करेंगे। 21 अक्तूबर को एडवांस पार्टियां रवाना होंगी। जम्मू कश्मीर स्टेट रोड़ ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को स्टाफ के बसें और फाइलों को जम्मू शिफ्ट कराने के लिए ट्रकों के इंतजाम का आदेश दे दिया गया है। इसके लिए बार फिर 100 करोड़ का अतिरिक्त बोझ सरकारी खजाने को उठाना होगा। 

दरअसल सिविल सचिवालय और हाईकोर्ट के करीब 35 विभागों के 5 हज़ार कर्मचारियों, उनके परिवारों और उनके दस्तावेजों-फाइलों को भी स्थानांतरित किया जाता है। सारा खर्च सरकार वहन करती है। तमाम फाइलों-दस्तावेजों को मूव करने में सैंकड़ों मजदूर, 250 ट्रक और बसें इस्तेमाल की जाती हैं। इसके अलावा कर्मचारियों को 15 हजार तक महंगाई भत्ता अतिरिक्त दिया जाता है। सरकारी अफसरों और उनके परिवार आवास की व्यवस्था और साल में आवास की साज-सजावट का खर्च भी सरकारी खजाने को उठाना पड़ता है।

 इसके अलावा सिविल सचिवालयों और हाईकोर्ट के साथ काम करने वाले प्राइवेट वेंडर्स, कंसलटेंट कंपनियों और संबद्ध प्राइवेट छोटे-मोटे ऑफिस-दुकानों को भी इससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

रिपोर्ट के मुताबिक साल में दो बार दरबार मूव करने से कामकाम में देरी होती है। इसका असर विकास कार्यों और आम लोगों क जनजीवन पर पड़ता है।

देश के किसी अन्य राज्य में इस तरह की परपंरा नहीं है। ऐसे में जम्मू कश्मीर में भी सरकारी खज़ाने पर बोझ कम करने के लिए इस प्रथा को खत्म करने की मांग हमेशा उठती रही है। 

जानकार मानते हैं कि सर्दियों में श्रीनगर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पूरे वर्ष के लिए सचिवालय बनाये रखने के लिए संभव नहीं है। गौरतलब है कि जम्मू में हमेशा के लिए स्थायी सचिवालय बनाये रखना एक कारगर और अचूक हल साबित हो सकता है। जम्मू में पूरे वर्ष मौसम सरकारी कामकाज में किसी तरह की कोई बाधा उत्पन्न नहीं करता। जब राज्य से संबंधित आर्टिकल 370 को हटाकर राज्य को पुनर्गठित कर दिया गया है, तब दरबार मूब की राजसी प्रथा की समीक्षा बेहद जरूरी हो जाती है। राज्य के हित में सरकार को इस पुरानी प्रथा पर मंथन करना चाहिए।

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