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हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की तीन सैन्य ब्रिग्रेड को आत्मसमर्पण कराया

Bhola Tiwari Sep 29, 2019, 9:43 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता ने कहा है कि सऊदी अरब के नाजरान शहर के करीब सऊदी अरब की तीन ब्रिग्रेड ने चारों तरफ से घिरने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया है।बताया जा रहा है कि आत्मसमर्पण करने वाले सैनिकों की संख्या हजारों में है और सैकड़ों सैनिकों को जिसने संघर्ष किया, मार गिराया गया है।दरअसल तीन दिन पहले हूती विद्रोहियों ने नाजरान शहर के पास गठबंधन सेना को घेर लिया था।लडाई तीन दिनों तक चली जिसमें सऊदी अरब के सैनिकों का काफी जान-माल का नुकसान हुआ।हूती विद्रोहियों ने बड़ी मात्रा में आधुनिक(स्वचालित)हथियारों को जब्त कर लिया और सऊदी अरब के सैनिकों को बंधक बना लिया है।

आपको याद होगा कुछ दिनों पहले हूती विद्रोहियों ने ये स्वीकार किया था कि उनके संगठन ने हीं सऊदी अरब की सरकारी तेल शोधन कंपनी "अमारको" पर ड्रोन हमला किया था, यद्यपि अमेरिका और सऊदी सरकार का मानना है कि हूती विद्रोहियों की आड में ईरान ने ये हमला करवाया है।ईरानी सरकार ने अमेरिका और सऊदी अरब सरकार के इस दावे का कडा खंडन किया है।

हूती विद्रोही यमन में रहते हैं और वे यमन में अपना शासन चाहते हैं।गौरतलब है कि यमन एक इस्लामिक समाज है और यहाँ के लगभग सभी नागरिक मुस्लिम हैं।यमन के नागरिक 55-58% शफी विचारधारा से संबंधित हैं और लगभग 35-40% जैदी विचार से संबंधित हैं।

जैदी(शिया मुसलमान) का मानना है कि अली,हसन और हुसैन पहले तीन इमाम थे,उसके बाद शिया इमाम अली जैनउलअबिदिन को चौथा इमाम मानते हैं।यमन में हूती विद्रोही जिसे सदाह युद्ध या सादाह संघर्ष भी कहा जाता है, यह एक सांप्रदायिक सैन्य विद्रोह था,जो सुन्नी सेनाओं के खिलाफ शुरू हुआ था।

सऊदी अरब सुन्नी मुसलमानों का देश है और वह चाहता है कि हर हाल में वहाँ हूती विद्रोही हार जाएं और वहाँ सुन्नी मुसलमानों का वर्चस्व स्थापित हो मगर हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है और ईरान शिया राष्ट्र है।ईरान विद्रोहियों को हथियार और गोलाबारूद मुहैया करवाता रहता है।दरअसल ये संघर्ष दो देशों की नाक का सवाल बन गया है।इस संघर्ष को बढाने में सऊदी अरब की निजी महत्वाकांक्षा ज्यादा जिम्मेदार है।क्राउन प्रिंस सलमान ने अमेरिका और मित्र देशों को पैसे की बल पर इस लडाई में शामिल कर लिया है।सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर कितना निर्मम है इसकी एक बानगी 26 मार्च,2017 में देखने को मिली, जब सऊदी अरब ने अचानक उत्तरी यमन के एक बडे भू-भाग पर हवाई हमला शुरू कर दिया।कहते हैं कि इस हवाई हमले में दर्जनों लोग जिनका इस युद्ध से कोई सरोकार नहीं था, मारे गए।अस्पतालों, रिहायशी इलाकों, स्कूलों, पावर स्टेशन पर लक्ष्य करके हमला किया गया और उन्हें नष्ट कर दिया गया।संयुक्त राष्ट्र के अपील के बाद सऊदी अरब ने बमबारी रोका था।

आपको याद होगा 2011 में अरब स्प्रिंग के समय राष्ट्रपति सालेह को इस्तीफा देना पडा था,जो शिया मुसलमान थे।आज हूती विद्रोहियों ने पूर्व राष्ट्रपति से हाथ मिला लिया है जो सऊदी अरब के कडे विरोधी रहें हैं।अब देखा जाय तो ये युद्ध अपने चरम पे पहुँचने लगा है।सऊदी अरब और अमेरिका मिलकर रिफाइनरी पर हमले का जवाब जरूर देंगे ये तो तय है।हमला ईरान पर होगा या यमन के उत्तर में रह रहे हूती विद्रोहियों पर यह देखने वाली बात होगी।

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