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जिन पर चली थी लाठियां वह गुंडा नहीं, राज्य की थीं बेटियां

Bhola Tiwari Sep 26, 2019, 3:26 PM IST टॉप न्यूज़
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● सरकार के आदेश पर पुलिस वालों ने राज्य की बहन बेटियों को सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर पीटा

● आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका पर लाठीचार्ज झारखंड के लिए शर्मनाक 

● अपनी मांग को लेकर 15 सितंबर से भूख हड़ताल पर थी आंगनबाड़ी सेविका


ऋषिकेश मुखर्जी

रांची : अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी सेविकाओं पर पुलिस ने बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया। उन मां, बहनों और बेटियों को सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर मारा जो राज्य में लोगों के लिए सेवा करती हैं। जरा सरकार और पुलिस के अधिकारियों की संवेदनशीलता देखिए। आंगनबाड़ी कई सेविकाओं के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे। ऐसे में उन्हें लाठियां खानी पड़ी।

दरअसल राजधानी रांची में राजभवन के समक्ष आंगनबाड़ी सेविकाए ने प्रदर्शन कर रही थी। पुलिस ने लाठीचार्ज तब किया जब धरने पर बैठी आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका दोपहर बाद तीन बजे राजभवन के पास लगे बैरिकेट से आगे बढ़ रही थीं। तभी भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठी का इस्‍तेमाल किया। पुलिस की इस कार्रवाई से कई महिलाओ को हाथ और पैर में चोट लगी है।


15 सितंबर से भूख हड़ताल पर हैं आंगनबाड़ी सेविकाएं

आंगनबाड़ी सेविकाएं 15 सितंबर से भूख हड़ताल पर हैं। सोमवार को भूख हड़ताल पर बैठी एक सेविका की हालत बिगड़ी, तो उसे सदर अस्पताल पहुंचाया गया। भूख हड़ताल कर रही सेविकाओं की तबीयत रह-रह कर बिगड़ रही है, इन्हें देखने तथा अस्पताल पहुंचाने के लिए धरनास्थल पर 108 एंबुलेंस और स्वास्थ्य कर्मी 24 घंटे तैनात हैं।

88,000 सेविकाएं हैं आंदोलनरत

झारखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राज्यभर की लगभग 88 हजार महिलाएं आंदोलनरत हैं। इसमें आंगनबाड़ी कर्मियों का स्थायीकरण, जनवरी 2018 में हुए समझौते को लागू करने, मानदेय के स्थान पर वेतन देने, न्यूनतम वेतन लागू करने, समान काम के लिये समान वेतन दिये जाने सहित स्वास्थ्य बीमा देने की मांग है।

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