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जब "मोसाद" ने चुन चुनकर मारा था "म्यूनिख नरसंहार" के कातिलों को

Bhola Tiwari Sep 15, 2019, 4:24 PM IST टॉप न्यूज़
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 अजय श्रीवास्तव

अपने 11 खिलाडियों की मौत पर इजरायली बेहद दुखी और खफा थे।हत्या के 48 घंटे के भीतर हीं प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने एक आपतकालीन बैठक की जिसमें उन्होंने मोसाद को ये आदेश दिया कि हर हाल में अपने खिलाडियों की नृशंस हत्या का बदला लिया जाय।आतंकियों को चुन चुनकर मारने के लिए गुप्त आँपरेशन चलाने का निर्णय किया गया जिसका नाम रखा गया "आँपरेशन ब्रैथ आँफ गाँड"।

सर्वप्रथम मोसाद ने विभिन्न देशों में छूपे म्यूनिख नरसंहार के आरोपियों की पहचान की और उसके बारे में सारी जानकारियां हासिल की।जब सारी फाइलें तैयार हो गई तो मोसाद ने अपने बेहतरीन अफसरों को इस आँपरेशन के लिए तैयार किया।

मोसाद ने कडी मंथन और मशक्कत के बाद 11 लोगों को छांटा जिसकी पूर्ण संलिप्तता म्यूनिख नरसंहार में थी।ये सभी नकली पासपोर्ट बनवाकर विभिन्न देशों में जो फलस्तीन आंदोलन के शुभचिंतक थे वहाँ भी कडी सुरक्षा में छूपे हुऐ थे।मोसाद के एजेंट उन्हें मारने से पहले उनके फैमिली को बडा सा बुके भेजते थे और उसमें लिखा होता था कि हम न भूलते हैं और न हीं माफ करते हैं।हर टारगेट को मरे हुए 11 इजरायली खिलाडियों में से हर एक की तरफ से 11 गोलियां मारी जाती थी।

मिशन "रैथ आँफ गाँड" के शुरू होने के कुछ महीने के अंदर मोसाद के जांबाज एजेंटों ने वेल ज्वेटर और महमूद हमशारी का कत्ल कर सनसनी फैला दिया।दूसरा टारगेट हुसैन अल बशीर जो साइप्रस में "ब्लैक सितंबर" आँपरेशन का प्रमुख था।आपको बता दें फिलिस्तीन समर्थक आतंकियों ने म्यूनिख नरसंहार को "आँपरेशन सितंबर" नाम दिया था।मोसाद के एजेंटों ने होटल में हुसैन अल बशीर के रूम के बगल में हीं रूम बुक करवाया था।मौका देखकर एक छोटे से बम विस्फोट कर उसे मौत के मुँह में ढकेल दिया गया।जब हत्यारों की खोज शुरू की गई तब तक मोसाद के एजेंट उस देश की सरहद से बाहर निकल चुके थे।

फलस्तीनियों को बेरूत के एक प्रोफेसर बासित अल खुबैसी हथियार उपलब्ध कराता था,दरअसल वो फलस्तीन आंदोलन का समर्थक था और यहूदियों से बहुत घृणा करता था।मोसाद के एजेंटों ने खुबैसी को उसके घर में हीं घेरकर 11 गोली उसके शरीर में उतार दी थी।मोसाद के एजेंट खुबैसी की हत्या कर तुरंत बेरूत से निकल गए।

अभी तक मोसाद हर टारगेट्स को आसानी से पा ले रहा था मगर अब उसके लिस्ट में तीन ऐसे लोग थे जो लेबनान में भारी सुरक्षा के बीच छूपे हुऐ थे।उन्हें ये पता चल चुका था कि मोसाद आँपरेशन ब्लैक सितंबर से संबंधित लोगों को चुन चुनकर मार रही है।उनके लिए विशेष आँपरेशन शुरू किया गया, जिसका नाम रखा गया "आँपरेशन स्प्रिंग आँफ यूथ"।09 अप्रैल,1973 को मोसाद के एजेंटों ने आँपरेशन करनेवाले कमांडो को समुद्री वोट से टारगेट के पास पहुँचाया।आँपरेशन शुरू हुआ तो मोसाद के कमांडो के हाथों क्रास फायरिंग में एक इटेलियन नागरिक मारा गया मगर उन्होंने घेरकर तीनों चिन्हित आतंकियों को मार गिराया।फायरिंग में मोसाद का एक एजेंट भी घायल हुआ मगर वे उन्हें लेकर समुद्री मार्ग से लेबनान की सीमा से बहुत दूर चले गए।

साइप्रस में एक आँपरेशन को बखूबी अंजाम दिया गया जिसमें जाइद मूचासी को होटल में हीं मार दिया गया।

28 जून,1973 को ब्लैक सितंबर से जुडे मोहम्मद बउदिया को उनकी हीं कार की सीट में बम लगाकर उडा दिया गया।15 दिसंबर,1979 को दो फलीस्तीनी अली सलेम अहमद और इब्राहिम अब्दुल अजीज की साइप्रस में हत्या कर दी गई।17 जून,1982 को पीएलओ के दो वरिष्ठ सदस्यों को इटली में अलग अलग हमलों में मार दिया गया।23 जुलाई,1982 को पेरिस में पीएलओ के दफ्तर में उप निदेशक फदल वानी को कार बम विस्फोट कर उडा दिया गया।

21 अगस्त,1983 को पीएलओ का सदस्य मनून मोराइश एथेंस में मारा गया।10 जून,1986 को ग्रीस की राजधानी एथेंस में पीएलओ के डीएफएलपी गुट के महासचिव खालिद अहमद नजल को मोसाद ने मार डाला।21 अक्टूबर,1986 को पीएलओ के सदस्य मंजर अबु गजाला को कार बम से उडा दिया गया।

सबसे महत्वपूर्ण हत्या अली हसन सालमेह की हुई,दरअसल वो म्यूनिख कत्ल ए आम का मास्टरमाइंड था।मोसाद दो बार उसकी हत्या की कोशिशें कर चुका था मगर कामयाबी हासिल नहीं हो पाई थी।22 जनवरी,1979 को एक कार धमाके में सालेह को मौत की घाक उतार दिया गया।

मोसाद ने लगातार बीस सालों तक आँपरेशन चलाया और चुन चुनकर म्यूनिख नरसंहार का बदला लिया।

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