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नवीन पटनायक, साइलेंट किलर

Bhola Tiwari Sep 14, 2019, 9:25 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की जीवनी लिखने वाले आउटलुक के संपादक रूबेन बनर्जी बताते हैं कि आप उनसे मिलेंगे तो पाएंगे कि उनसे बडा साफ्ट स्पोकन, शिष्ट, संभ्रांत और कम बोलनेवाला शख्स है हीं नहीं। कभी-कभी तो लगता है कि वे राजनेता है हीं नहीं लेकिन सच ये है कि उनसे बडे राजनीतिज्ञ बहुत कम लोग हैं। वो न सिर्फ राजनीतिज्ञ हैं बल्कि निर्मम राजनीतिज्ञ हैं।.इस हद तक कि पहुंचे हुऐ राजनीतिज्ञ भी उनका मुकाबला नहीं कर सकते।

नवीन पटनायक अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कैसे ठिकाने लगाते थे ये वरिष्ठ नेता और पार्टी में दूसरे नंबर पर रहे विजाँय महापात्रा के केस में देखने को मिला था। दरअसल जब नवीन बाबू मुख्यमंत्री बने तो उन्हें सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था। उन दिनों विजाँय महापात्रा बहुत बडे नेता के रूप में स्थापित हो चुके थे।बीजू मंत्रिमंडल में भी वो वरिष्ठ मंत्री थे और बताते हैं कि वो अक्सर मंत्रिमंडल के सहयोगियों के सामने नवीन पटनायक की खिल्ली उडाया करते थे और उन्हें नौसिखिया कहते थे। नवीन बाबू के एक समर्थक मंत्री ने उन्हें आकर बताया कि विजाँय महापात्रा आपके बारे में ऐसा ऐसा कहते हैं और कहते हैं कि मुख्यमंत्री भले से हीं नवीन पटनायक हैं मगर सारा कामकाज मैं हीं देख रहा हूँ। नवीन पटनायक ने समर्थक मंत्री की बात सुनकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और केवल धीरे से मुस्कुरा कर रह गए।

दरअसल नवीन बाबू मौके की तलाश में थे और ये मौका विधानसभा चुनाव के समय मिल गया।पर्चा भरने के आखिरी दिन नवीन पटनायक ने पाटकुरा विधानसभा क्षेत्र से उनका पर्चा रद्द कर अतानु सब्यसाची को टिकट दे दिया।समय सीमा समाप्त होने के कुछ मिनट पहले हीं सब्यसाची ने अपना पर्चा दाखिल किया।विजाँय महापात्र के पास इतना भी टाइम नहीं था कि वे किसी दूसरे विधानसभा से अपना पर्चा दाखिल कर पाते।

विजाँय महापात्रा समेत सभी लीडरान नवीन बाबू के इस मास्टर स्ट्रोक से अचंभित थे,उडीसा के हर छोटे बडे अखबार में इसकी खूब चर्चा हुई,मगर नवीन बाबू को जो करना था उन्होंने चुपचाप कर दिया था।

विजाँय महापात्रा की पाटकुरा विधानसभा में तूती बोलती थी और उन्होंने निर्दलीय विधायक तिर्लोचन बेहरा को अपना समर्थन दे दिया।लाख प्रयास के बावजूद नवीन पटनायक अपने उम्मीदवार को जीता नहीं सके और निर्दलीय विधायक तिर्लोचन बेहरा बडी आसानी से चुनाव जीत गए।सब्यसाची महापात्रा ने तिर्लोचन बेहरा को इस शर्त पर समर्थन किया था कि वे कुछ दिनों में विधानसभा से इस्तीफा दे देंगे और वे चुनाव लडेंगे मगर नवीन पटनायक ने गुपचुप तरीके से बेहरा को साध लिया और उन्होंने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया।तिर्लोचन बेहरा पूरे पाँच साल विधायक रहे और इस बीच नवीन पटनायक ने विजाँय महापात्रा को राजनीति रूप से शून्य कर दिया था।

नवीन पटनायक की जीवनी लिखने वाले रूबेन बनर्जी ने लिखा है कि मेरी नजर में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी को इस तरह दरकिनार करने का ये तरीका बहुत अनैतिक था।

दूसरा मामला आईएएस प्यारी मोहन महापात्रा का है।बताते हैं कि नवीन पटनायक उनपर बहुत विश्वास करते थे और उन्होंने भी नवीन पटनायक के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया था।लोग कहते थे कि नवीन तो मुखौटा हैं और सत्ता की असली चाभी तो प्यारी बाबू के पास रहती है।एक बार जब नवीन बाबू अपनी सगी बहन गीता मेहता जो दिल्ली में रहतीं थीं मिलने गए तो रात के खाने के समय गीता ने डिनर के लिए प्यारी बाबू को भी अपने घर बुला लिया।ये बात नवीन बाबू को पसंद नहीं आई मगर वो अपने स्वभावनुसार चुप रहे।उन दिनों नवीन पटनायक की तबीयत कुछ नासाज चल रही थी,खाने के टेबल पर गीता ने प्यारीबाबू को कहा क्यों नहीं आप नौकरी से इस्तीफा देकर सरकार में उप मुख्यमंत्री बन जाते।नवीन पर काम का बोझ कम हो जाएगा।

नवीन पटनायक को लगा कि जब उनकी बहन ऐसा सोच सकतीं है तो चार करोड़ उडीया क्या सोच रहें होंगे।उसी समय से प्यारीबाबू से उन्होंने किनारा करना शुरू कर दिया और एक बार जब प्यारीबाबू ने विधायकों की बैठक बुला ली तो नवीन पटनायक ने उनके ऊपर विधायकों को भडकाने का आरोप मढ़ दिया।उसी दिन एक हीं झटके में प्यारीबाबू पिक्चर फ्रेम से बाहर हो गए।

तीसरा मामला नवीन पटनायक के बचपन के दो दोस्तों का है।जब वे राजनीति में आए तो दोनों साये की तरह उनके साथ रहते थे।दोनों दोस्तों का नाम जय पांडा और एयू सिंहदेव है।दोनों नवीन पटनायक के नाम का फायदा उठाकर पार्टी में अपनी महत्वपूर्ण जगह बना ली थी मगर कुछ हीं दिनों बाद नवीन पटनायक ने उन्हें दूध में गिरे मच्छर की तरह बाहर फेंक दिया।

कहने का लब्बोलुआब ये है कि नवीन पटनायक ने जितने भी आँपरेशन किये वो बेआवाज़ थे।साइलेंट किलर की तरह वो अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को किनारे लगाते रहे और कोई शोरगुल भी नहीं किया।

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