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क्या अब भी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस को गुनाहगार नहीं मानेंगे डोनाल्ड ट्रंप?

Bhola Tiwari Sep 12, 2019, 6:42 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

वाँशिंगटन पोस्ट के वरिष्ठ पत्रकार जमाल खाशोगी की पिछले साल दो अक्टूबर को हत्या कर दी गई थी।दरअसल वो अपनी शादी से जुडे दस्तावेज लेने के लिए तुर्की में अपने देश के वाणिज्यिक दूतावास में गए थे लेकिन उन्हें वहां से निकलते किसी ने नहीं देखा।दूतावास के बाहर उनकी प्रेयसी हदीजे जेनगीज ने तुर्की पुलिस को इसकी सूचना दी।पूछताछ में सऊदी अरब के दूतावास कर्मियों ने कहा कि वे थोडी देर बाद हीं अपना काम निपटाकर वापस चले गए हैं।आपको बता दें सऊदी अरब की शाही सरकार की मुक्तकंठ आलोचना करनेवाले जमाल खाशोगी को दूतावास के अंदर हीं मार दिया गया और उनके शव के टुकड़े कर दूतावास में हीं दफन कर दिया गया था।

दो दिन पहले तुर्की के लोकप्रिय अखबार "सबा" ने खाशोगी के आखिरी समय की रिकॉर्डिंग प्रकाशित की है।इसमें उनके और उनके हत्यारों के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा दिया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक खाशोगी ने हत्या को अंजाम देने वालों से कहा था कि वे उनका चेहरा न ढंकें,क्योंकि उन्हें अस्थमा है और उनका दम घुट सकता है।

तुर्की के नेशनल इंटेलिजेंस आर्गेनाइजेशन ने हत्या के ठीक बाद ही इससे जुडी एक रिकार्डिंग हासिल कर ली थी।इस रिकार्डिंग को अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनआईए के साथ साझा किया गया था।अखबार ने रिकार्डिंग के हवाले दावा किया है कि सऊदी अरब से एक हिट टीम जमाल खाशोगी को रियाद ले जाने का बहाना किया।हिट टीम के एक सदस्य माहेर मुतरेब ने खाशोगी से कहा था कि वे उन्हें इंटरपोल से जुडे एक केस में जाँच के लिए सऊदी अरब ले जाना चाहते हैं।खाशोगी ने जमकर विरोध किया और सऊदी अरब जाने से इंकार कर दिया।रिपोर्ट के मुताबिक, मुतरेब ने खाशोगी से कहा कि तुम हमारी मदद करो,ताकि हम तुम्हारी मदद कर सकें।मदद नहीं करोगे तो जानते हो अंत क्या होगा।

लाख कोशिशों के बाद जब खाशोगी सऊदी अरब जाने के लिए तैयार नहीं हुऐ तो हिट टीम ने उन्हें दूतावास में हीं मारकर दफन कर दिया था।बताते हैं कि अगर अमेरिका दखलंदाजी नहीं करता तो तुर्की उस हत्याकांड का पर्दाफाश तुरंत कर सकता था।अब इस रिकार्डिंग के सामने आने के बाद सबकुछ साफ हो गया है और अब अमेरिका को चाहिए कि वो हत्याकांड की जवाबदेही तय करे और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ मुकदमा चलाया जाय।

जमाल खाशोगी का जन्म 1958 के दौरान मदीना में हुआ था।उन्होंने अमरीका के इंडियाना स्टेट विश्वविद्यालय से अपनी बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढाई पूरी की।पढाई के बाद वे सऊदी अरब लौट आए और 1980 में एक पत्रकार के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत की।वो एक क्षेत्रीय अखबार में रिपोर्टर के तौर पर काम करते थे जहाँ वो अफगानिस्तान पर सोवियत आक्रमण की खबरों को कवर करते थे।इस दौरान उन्होंने चरमपंथी संगठन अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन के उदय को नजदीक से देखा।

2003 में वो अल वतन अखबार के संपादक बन गए लेकिन सिर्फ दो महीने में हीं उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया क्योंकि वो सऊदी के शाही परिवार की आलोचना वाली खबरें छाप रहे थे।2011 अरब स्प्रिंग आने के बाद इस्लामिक समूहों ने कई देशों की सत्ता अपने हाथ में ले ली थी,खाशोगी ने खुलकर उनका समर्थन किया।इस वजह से शाही परिवार उनसे बेहद नाराज था और वे मौका खोज रहे थे।

एक समय खाशोगी शाही परिवार के सलाहकार हुआ करते थे मगर जब उन्होंने शाही परिवार की कार्यप्रणाली को अंदर से देखा तो वो उसके विरोधी हो गए।वे हमेशा कहा करते थे कि सऊदी अरब में सुधार की जरूरत है।वे समय समय पर शाही परिवार के खिलाफ लेख लिखते रहते थे।

वाशिंगटन पोस्ट के लिए वो कितने महत्वपूर्ण थे कि अखबार ने शुक्रवार को उनके काँलम की जगह खाली रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।अमेरिकी नागरिक होने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप उनके हत्यारों के खिलाफ कुछ कर नहीं सके।दरअसल सऊदी अरब अमेरिका के बहुत से सामानों, शस्त्रों का आयातक है।प्रिंस के विरुद्ध कुछ भी बोलकर वह उन्हें नाराज नहीं करना चाहते हैं।उन्होंने उस समय कहा था कि अगर हत्या में क्राउन प्रिंस की संलिप्तता उजागर हुई तो अमेरिका कडी कार्रवाई करेगा।आज जब उनके अंतिम समय के रिकार्डिंग को वायरल कर दिया गया है तो क्या ट्रंप सऊदी प्रिंस सलमान पर कार्रवाई करेंगे?मुझे तो थोडी भी उम्मीद नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रिंस के विरुद्ध कोई बयान भी देंगे।

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