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अराजकता और अनुशासन के मध्य डोलती नयी यातायात ‘कानून’

Bhola Tiwari Sep 09, 2019, 6:39 AM IST टॉप न्यूज़
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नीरज कृष्ण

जब से मोटर वाहन संबंधी संशोधिात अधिनियम लागू हुआ है, एक अजीब तरह की अफरा-तफरी का माहौल पुरे देश में व्याप्त है। पिछले करीब एक हफ्ते से रोज भारी जुर्माने की खबरें समाचार पत्रों एवं टीवी चेनल्स पर शुर्खियाँ बटोर रही है। तीस हजार की मोटरसाईकिल और चौरानबे हजार रुपए तक का जुर्माना। इससे आहत होकर एकाध लोगों के पुलिस कर्मियों से उलझने और अपने दुपहिया वाहन को आग लगा देने की खबरें भी आई। दरअसल, नए नियमों के तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और दंड की मात्रा पहले से काफी बढ़ा दी गई है। इसे लेकर कई लोगों में रोष है। विपक्षी दल इसे रकम उगाही का नया हथकंडा करार दे रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को सफाई देनी पडी है कि भारी जाने का मकसद लोगों को कानून तोड़ने से रोकना है, न कि धन उगाही। 

सड़क हादसा देश की बड़ी समस्या हैं, उन पर काबू पाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। आज भी हमारे देश में सबसे ज्यादा मृत्यु लापरवाही से वाहन चलाने से हुई दुर्घटना से होती है। ऐसे में भारी जुर्माने के भय से लोग यातायात नियमों को तोड़ने से बचेंगे, उनमें सुरक्षित वाहन चलाने की आदत विकसित होगी। मगर यह प्रयोग नया नहीं है कि जब भी इस तरह किसी समस्या से पार पाने के लिए भारी जुर्माने का प्रावधान किया जाता है, इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलता है। यह सही है कि भारतीय सड़कों पर वाहनों की संख्या चिंताजनक स्थिति तक पहुंच चुकी है। इस पर काबू पाने के लिए उपायों पर विचार किए जाते रहे हैं। यह भी तथ्य है कि यवाओं में अनियंत्रित ढंग से वाहन चलाने और जानबूझ कर यातायात नियमों की अनदेखी करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती गई है। इस वजह से हादसे भी आए दिन की बात हो गए हैं। आंकड़े के मुतबिक जितने लोग गंभीर बीमारियों की वजह से जान नहीं गंवाते उससे अधिक सड़क हादसों के शिकार हो जाते हैं। भारत इस मामले में सबसे चिंताजनक स्थिति में है। इसलिए सरकार की अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है। पर यह दावा करना मुश्किल है कि भारी जुर्माने से लोगों की मानमानियों पर रोक लगेगी और वाहन चलाने संबंधी आदतों में बदलाव आ सकता है। पहले भी यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने और दंड का प्रावधान किया जा चुका है, पर उसका कोई उल्लेखनीय नतीजा सामने नहीं आया। न तो लोगों में सुरक्षित चलने की प्रवृत्ति विकसित हो पाई और न यातायात उल्लंघन की दर घटी, बल्कि सड़क हादसों में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

 हम सभी जानते हैं कि बिना हेलमेट पहने, सीट-बेल्ट बांधे, मोबाइल पर बात करते गाड़ी चलाना न सिर्फ खुद स्वयं के लिए बल्कि सामने वाले यात्रिओं के लिए गंभीर मुसीबत की वजह बन सकता है। मगर हम लोगों में सतर्क न रहने की आदत बनती गई है, तो इसकी कुछ वजह यातायात पुलिस की लापरवाही भी है। अक्सर वह ऐसे दोषियों को किसी प्रभाव में आकर या कुछ रिश्वत लेकर छोड़ देती है। इस तरह लोगों में यह धारणा बैठ गई है कि अगर वे कोई गलती करेंगे तो आसानी से बच निकलेंगे। इसलिए केवल दंड और जुर्माने के भय से लोगों में कानून तोड़ने की प्रवृत्ति को खत्म करने का दावा नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित महकमे को भी जवाबदेह बनाना जरूरी है। 

 नया यातायात नियम देशभर में लागू हो गया है। इस नये नियम के तहत यातायात नियमों को तोड़ने पर लोगों को 10 गुना तक का ज्यादा अर्थ दंड देना पड़ रहा है। ऐसे में इन दिनों लोगों के सपनों में भी ट्रैफिक पुलिस चालान काटती ही नजर आ रही है। नए ट्रैफिक नियमों के लागू होने के बाद से ट्रैफिक पुलिस की तरफ से लोगों का 23000 रुपये से लेकर 91 हजार रुपये तक का चालान काटा गया है। ऐसे में इस नए यातायात कानून से ज्यादा, लोग इस कानून को प्रभावी बनाने वाले तंत्र से डरे हुए हैं। जिस तरह से सडकों पर पुलिसकर्मियों ने इस नए कानून की आड़ में उत्पात मचा रखा है, आने वाले कुछ ही दिनों में अराजकता की स्थिति पैदा हो जाने की संभावना प्रबल होती दिख रही है, मुझे। हालांकि यह कानून देश के कुछ राज्यों ने अभी तक लागु नहीं किया है, कुछ राज्य इसपर अभी अध्ययन एवं अन्य राज्यों में इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है उस पर नजर लगाए हुए हैं।

इस नए कानून को प्रभावी बनाए से पूर्व सरकार को एवं संबंधित विभागों का यह कर्तव्य होना चाहिए था कि सर्वप्रथम वह अपने नागरिकों को जागरूक करे, जगह- जगह पर होर्डिंग लगा कर नए कानून के मुख्य-मुख्य बिन्दुओं को दर्शाए और साथ ही साथ यह भी जनता को बताती कि कौन कौन से अधिकारी/कर्मचारी हमारे वाहनों के कागजात की जांच के लिए सक्षम है या अधिकृत है। आज जांच के नाम पर साधारण सिपाही भी बीच सड़कों पर चलते हुए वाहनों को रोक कर वाहनों के कागजात की जाँच करने लग रहे हैं, जो सरासर गलत है।

नया मोटर व्हीकल एक्ट प्रभावी होने के बाद से वाहन का आर.सी., इंश्योरेंस सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन वाहन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट सर्टिफिकेट तत्काल नहीं दिखाने पर ताबड़तोड़ चालान काटने की खबरें देशभर से आ रही हैं। 

हालांकि सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स मुताबिक अगर आप ट्रैफिक पुलिस को मांगने पर फौरन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट आर.सी., इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट सर्टिफिकेट नहीं दिखाते हैं, तो यह जुर्म नहीं है। सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के नियम 139 में प्रावधान किया गया है कि वाहन चालक को दस्तावेजों को पेश करने के लिए 15 दिन का समय दिया जाएगा। ट्रैफिक पुलिस तत्काल उसका चालान नहीं काट सकती है। अगर वाहन चालक 15 दिन के अंदर इन दस्तावेजों को दिखाने का दावा करता है, तो ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ अधिकारी वाहन का चालान नहीं काटेंगे। इसके बाद चालक को 15 दिन के अंदर इन दस्तावेजों को संबंधित ट्रैफिक पुलिस या अधिकारी को दिखाना होगा। मोटर व्हीकल एक्ट 2019 की धारा 158 के तहत एक्सीडेंट होने या किसी विशेष मामलों में इन दस्तावेजों को दिखाने का समय 7 दिन का होता है। ट्रैफिक पुलिस आरसी, डीएल, इंश्योरेंस सर्टीफिकेट, पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट सर्टिफिकेट तत्काल नहीं दिखाने पर चालान काटती है, तो चालक के पास कोर्ट में इसको खारिज कराने का विकल्प रहता है। यानि वह अधिकारियों के कार इस कानून का विरुद्ध न्यायलय का दरवाजा खटखटा सकता है। अगर न्यायलय को लगता है कि चालक के पास सभी दस्तावेज हैं और उसको दस्तावेजों को पेश करने के लिए 15 दिन का समय नहीं दिया गया, तो वह जुर्माना को रद्द कर सकता है। नए यातायात नियमों के उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि इतनी ज्यादा रखी गई है कि अगर आप नियम तोड़ते हैं तो आपकी जेब पर बहुत ही बुरा असर पड़ेगा। 

इन सबों के वावजूद भी यदि जुर्माने में वसूली गयी रकम यदि सरकार के तिजोरी में जा रही हो तो बातें कुछ समझ में आती है। समस्या यह है कि सिर्फ कुछ लोगों पर ही जुर्माना लगाया जा रहा है, अधिकांशतः तो लोग हजारो-हजार रूपये सिपाही-दरोगा के पॉकेट में डाल कर भारी-भरकम जुर्माने से बच कर भ्रष्टाचार को एवं सडकों पर जांच के नाम पर उत्पात मचाने वाले तंत्र को और भी ज्यादा प्रश्रय दे रहे हैं। 

यातायात पुलिस ही नहीं ने साधारण पुलिस भी इस नये ट्रैफिक नियम की आड़ में बहती भ्रष्टाचार की गंगा में भय दिखाकर हाथ धो रही है। लोग कानून की पूरी जानकारी के अभाव में और भारी भरकम जुर्माने की रकम से बचने के लिए खाकी व ओरिजनल काली वर्दीधारियों की जेब गर्म कर अपना पिंड पुलिस से छुड़ा रहे हैं और दोहन का शिकार बन रहे हैं।

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