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जब राज्य के मुख्य सचिव ही कानून तोड़े तो कानून की रक्षा कौन करें !

Bhola Tiwari Sep 05, 2019, 9:06 PM IST टॉप न्यूज़
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■ आरोप : नियमों की अनदेखी कर किया गया ट्रांसफर पोस्टिंग

■ केंद्रीय अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया मामला, ट्रांसफर पोस्टिंग मैं संलिप्त अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही करने का अनुरोध

 

नितिन

पाकुड: सूबे के टॉप मोस्ट अधिकारियों द्वारा वन सेवा के नियमों का उल्लंघन करते हुए वन विभाग के बड़े अधिकारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिवों को मामले से अवगत कराते हुए राज्य के उन अधिकारियों पर विभागीय कार्यवाही की अपील की जो नियमों का उल्लंघन कर ट्रांसफर पोस्टिंग करने में संलिप्त हैं। इस मामले में अधिवक्ता ने केंद्र से नियमों का उल्लंघन करने वाले राज्य के मुख्य सचिव डीके तिवारी, अपर मुख्य सचिव इंदु शेखर चतुर्वेदी, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय कुमार के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है।


क्या है मामला

झारखंड सरकार ने ट्रांसफर पोस्टिंग से संबंधित 13 अगस्त नियमावली में निहित प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 2019 को भारतीय वन सेवा के 9 अधिकारियों का स्थानांतरण किया है।  नियमत: भारतीय वन सेवा के पदाधिकारियों का पदस्थापन कैडर पोस्ट पर ही किया जा सकता है। इस दरमियान सबसे चौंकाने वाली बात यह देखने को मिली की अधिकारियों ने वन प्रमंडल पदाधिकारी, बोकारो का पोस्ट, जो भारतीय वन सेवा का कैडर पोस्ट है, को द्वैत प्रभार में रखा गया है। ऐसे लोगों की लंबी फेहरिस्त है।


किन कारणों से जारी की गई भारत वन सेवा कैडर संशोधन नियमावली, 2014  

इस संबंध में केंद्रीय कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमनियम ने अपने सेवानिवृत्त के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपील किया था कि राजनीतिक दबाव में अखिल भारतीय सेवा कैडर के अधिकारियों के अल्प समय में बारंबार स्थानांतरण पर रोक लगाई जाए। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में आदेश दिया कि जब तक संसद इस विषय पर कोई कानून नहीं बनाती है, या केंद्र सरकार कोई नियमावली नहीं बनाती है, तब तक के लिए अखिल भारतीय सेवा के पदाधिकारियों के पदस्थापन की न्यूनतम कालावधि 2 वर्षों की होगी। इस अवधि के अंदर यदि किसी पदाधिकारी का स्थानांतरण करना है तो राज्य सरकार इस विषय पर परामर्श देने के लिए सिविल सर्विसेस बोर्ड का गठन करेगी। सुप्रीम कोर्ट का यह भी आदेश था कि जब भी राज्य सरकार किसी अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी का 2 वर्ष से कम अवधि में स्थानांतरण पदस्थापन करेगी, तो उस समय सिविल सर्विस बोर्ड जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होते हैं, उनके समक्ष अल्पावधि में स्थानांतरण का कारण बताएगी। सिविल सर्विसेज बोर्ड को यह जवाबदेही दी गई थी कि वह इस तरह के स्थानांतरण के मामले में राज्य सरकार के द्वारा बताए गए कारण को उस अधिकारी को उपलब्ध कराएगी, जिसका स्थानांतरण किया जाना है। संबंधित अधिकारी जिसका स्थानांतरण किया जाना है, उसका मंतव्य प्राप्त होने तथा उस पर विचार करने के बाद ही उक्त स्थानांतरण के बारे में राज्य सरकार को अनुशंसा किए जाने के प्रावधान किए गए हैं। इस बारे में सिविल सर्विसेज बोर्ड को यह भी निर्देश दिए गए हैं, कि 2 वर्ष से कम अवधि में जिन जिन अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के स्थानांतरण के बारे में अनुशंसा करेगी उसके संबंध में प्रत्येक तिमाही केंद्र सरकार के द्वारा तय किए गए प्रपत्र में केंद्र सरकार को सूचना उपलब्ध कराएगी। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए सभी निर्देशों को समाहित करते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय वन सेवा कैडर संशोधन नियमावली, 2014 बनाई। 

 भारत वन सेवा कैडर नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन कर ट्रांसफर पोस्टिंग के कई मामलों को अधिवक्ता एवं एक्टिविस्ट राजीव कुमार ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिवों के संज्ञान में लाया है।

 गौरतलब है कि इसी तरह के मामले राज्य में भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग के बारे में आते रहते हैं। ये सभी विभाग मुख्यमंत्री रघुवर दास के अधीन कार्यरत है। अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री अपने चहेते अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही करते हैं, या नहीं? यह विचारणीय प्रश्न है।

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