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आखिरकार चीन को झुकना हीं पडा,विवादित प्रत्यर्पण संशोधन बिल वापस होगा

Bhola Tiwari Sep 05, 2019, 10:42 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

हांगकांग की चीफ एजक्यूटीव कैरी लैम ने एक रेकाँर्डेड संदेश में हांगकांग की जनता को कहा है कि "विवादित प्रत्यर्पण बिल" को पूरी तरह से वापस ले लिया जाएगा।उन्होंने आगे कहा कि सरकार जनता कि चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बिल को औपचारिक तौर पर वापस लेने के लिए तैयार है।

हांगकांग की चीफ एजक्यूटीव ने कहा कि प्रर्दशनकारियों ने हांगकांग की जनता को हैरान-परेशान कर दिया और प्रर्दशन में जिस तरह से हिंसा हो रही है,उससे हांगकांग एक बेहद खतरनाक स्थिति की तरफ बढ़ चला है।उन्होंने कहा,"इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि लोगों को सरकार के फैसले से किस तरह की असहमतियां हैं,लेकिन किसी भी समस्या को हल करने के लिए हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता।फिलहाल हमारे लिए इस हिंसा को रोकना सबसे अहम है,इसके साथ हीं कानून व्यवस्था को कायम करना भी जरूरी है।उन्होंने ये भी कहा कि वह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हांगकांग के लोगों से मिलने आएंगी और उनकी चिंताओं को सुनेंगी।

आपको बता दें इसी अप्रैल में इस विवादित बिल को लाया गया था,जिसमें आपराधिक मामलों में अभियुक्तों को चीन को प्रत्यर्पित करने को कहा गया था। हांगकांग की जनता ने इसका पूरजोर विरोध किया।लोग सारे काम छोड़कर सड़कों पर उतर आए।कहते हैं कि जून में हांगकांग का सबसे बड़ा प्रर्दशन हुआ था जिसमें करीब बारह लाख लोगों ने सरकार के खिलाफ प्रर्दशन किया था।लोगों का गुस्सा देखकर हांगकांग सरकार ने इस विवादित बिल पर रोक लगा दी थी मगर वहाँ के लोग इसे पूरी तरह हटाने की मांग कर रहे थे।चीन समर्थक लैम ने इसे पूरी तरह हटाने से इंकार कर दिया था।

हांगकांग को ब्रिटेन ने 1997 में चीन को स्वायत्तता के शर्त के साथ सौंपा था।चीन ने स्वीकार किया था कि वह हर हालत में हांगकांग की स्वायत्तता को बरकरार रखेगा।एक देश-दो व्यवस्था की अवधारणा के साथ हांगकांग को अगले 50 साल के लिए स्वत्रंत्रता, सामाजिक, कानूनी और राजनीतिक व्यवस्था विस्तारवादी चीन अब हांगकांग पर पूरा नियंत्रण चाहता है,हांगकांग की चीफ एजक्यूटीव कैरी लैम जो चीन समर्थक है उसे पदस्थापित करने में पूरी चीनी लाँबी हांगकांग में सक्रिय हो गई थी।चीन "प्रत्यर्पण बिल " लाकर हांगकांग की जनता पर दवाब बनाना चाहता था जिसे वहाँ की जनता ने बडा प्रर्दशन कर नाकाम कर दिया है।हांगकांग के निवासियों का कहना है कि प्रत्यर्पण बिल में संशोधन उसकी स्वायत्तता को प्रभावित करेंगे।

हांगकांग के कानूनविदों का कहना है कि यह संशोधन हांगकांग के लोगों को चीन की दलदली न्यायिक व्यवस्था में धकेल देगा जहाँ राजनीतिक विरोधियों पर आर्थिक अपराधों और गैर परिभाषित राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों जैसे मामलों में आरोप लगाए जाते रहें हैं।

कानूनविदों का मानना है कि एक बार आरोप लगा तो व्यक्ति को ऐसी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होता है जहाँ अधिकांश आपराधिक मामले सजा पर समाप्त होते हैं।इस नए प्रत्यर्पण कानून का विरोध करने वालों में कानूनविद, कारोबारी, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं समेत कई आम लोग भी हैं जिनके लिए हांगकांग में कानून का शासन सबसे अहम है।

गौरतलब है कि हांगकांग के मौजूदा प्रत्यर्पण कानून में कई देशों के साथ इसके समझौते नहीं हैं।इसके चलते अगर कोई व्यक्ति अपराध कर हांगकांग वापस आ जाता है तो उसे मामले की सुनवाई के लिए ऐसे देश में प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता जिसके साथ इसकी संधि नहीं है।चीध को भी अब तक प्रत्यर्पण संधि से बाहर रखा गया था लेकिन नया प्रस्तावित संशोधन इस कानून में विस्तार करेगा और ताइवान, मकाऊ और मेनलैंड चीन के साथ भी संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति देगी।

चीन ने प्रर्दशनकारियों को कुचलने के लिए हांगकांग में सेना को उतार लिया था मगर अंतरराष्ट्रीय दवाब और हांगकांग की जनता के कडे विरोध के कारण उसे झुकना पड़ा है।अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि चीन इस समय शांत है मगर ये तूफान के पहले की शांति हो सकती है।

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