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पाकिस्तान की करतूत : अब अब्दुस सलाम नोबल पुरूष्कार प्राप्त करने वाले पहले मुस्लिम नहीं हैं !

Bhola Tiwari Sep 02, 2019, 6:32 PM IST टॉप न्यूज़
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अभी सौ तरह के नश्तर टूटेंगे ।

 एसडी ओझा

पाकिस्तान के अब्दुस सलाम दुनियां के पहले मुस्लिम हैं , जिन्हें भौतिक शास्त्र के लिए नोबल पुरूष्कार मिला है । अब्दुस सलाम अहमदिया मुसलमान थे । 1974 में पाकिस्तानी संसद ने संविधान में एक संशोधन कर अहमदिया लोगों को मुस्लिम विरादरी से अलग कर दिया था । उस समय पाकिस्तान के प्रधान मंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो थे । इस कार्य के लिए उन्हें बहुसंख्यकों की खूब वाह वाही मिली थी । अलग करते हीं अहमदिया लोगों पर जुल्म का कहर शुरू हो गया । अहमदिया खौफ व डर के साये में जीने लगे । किसी मौलवी ने यह एलान कर दिया कि अहमदियों का कत्ल करने से जन्नत नसीब होगा । फिर क्या था ! धड़ाधड़ अहमदिया समुदाय के लोग कत्ल किए जाने लगे । अहमदिया लोगों के नाम व पते के पर्चे सार्वजनिक तौर पर बांटे जाने लगे ताकि जन्नत की चाह करने वाले लोग उनका कत्ल कर सकें ।


1984 में फौजी शासक जिआऊल हक ने अहमदी कहने पर भी रोक लगा दी । मुनादी कर दी गयी कि अहमदी कहना भी अपराध की श्रेणी में आएगा । कट्टरपंथियों ने नोबल पुरूष्कार विजेता अब्दुस सलाम को भी नहीं बख्सा । उनकी कब्र पर लिखी इबारत में हेर फेर कर दी गयी । उनके नाम के साथ लिखा मुस्लिम शब्द हटा दिया गया । अब अब्दुस सलाम नोबल पुरूष्कार प्राप्त करने वाले पहले मुस्लिम नहीं हैं , क्योंकि अहमदिया लोग मुस्लिम विरादरी के बाहर के जीव हो गये हैं । ज्यादातर अहमदिया लोग भागकर इंग्लैण्ड में जा बसे हैं । अब भी अहमदिया समुदाय के लोगों का पाॅकिस्तान से पलायन जारी है ।

अब्दुस सलाम एक महान वैज्ञानिक थे । उन्हीं की खोज ने गाॅड पार्टिकल का रास्ता प्रशस्त किया था । इस तरह की खोज बीते 100 सालों की वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक माना जाता है । ऐसे लब्ध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक को उनके जीवन काल में किसी पाकिस्तानी विश्व विद्यालय ने अपने यहां एक भी लेक्चर देने के लिए नहीं बुलाया । यह घृणा की चरम परकाष्ठा है । अब्दुस सलाम की दिली तमन्ना थी कि वे फिजिक्स का एक सेंटर पाकिस्तान में स्थापित करें , लेकिन अहमदिया लोगों के प्रति पाक बहुसंख्यकों का घृणित नजरिया उन्हें इस नेक काम को करने से रोकता रहा । अपनी इस तमन्ना को दिल में लिए हीं वे इस दुनिया से चल बसे । अब सुनते हैं कि कायदे आजम यूनिवर्सिटी के नेशनल सेंटर फार फिजिक्स का नाम अब्दुस सलाम के नाम से होने जा रहा है । यह अच्छी बात है । पाकिस्तान के इस महान वैज्ञानिक के लिए यह सच्ची श्रद्धंजलि होगी । 

अहमदिया सम्प्रदाय के लोग खुद को मुसलमान कहते हैं । वे कुरान को मानते हैं । यह हनफी मुसलमानों की एक श्रेणी है । अहमदिया सम्प्रदाय के प्रवर्तक गुलाम अहमद ने इसकी नींव पंजाब के कदियान में डाली थी । गुलाम अहमद को अहमदिया लोग नबी का दर्जा देते हैं । ये बात और है कि गुलाम अहमद खुद कोई शरीयत नहीं ला पाए । अहमदिया लोग मोहम्मद साहब द्वारा लागू किए गये शरीयत को हीं मानते हैं । 

अहमदिया लोगों की एक अच्छी तादाद भारत , ब्रिटेन और पाकिस्तान में निवास करती है । भारत व ब्रिटेन में ये मुसलमान इज्जत के साथ रह रहे हैं और उन्हें मुसलमान होने का पूर्ण दर्जा प्राप्त है । कभी भी उन्हें प्रताड़ित नहीं किया गया । उन्हें पूर्णरूपेण सुरक्षा दी गयी है , जब कि हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इनका जीना दुश्वार हो गया है । पता नहीं पाकिस्तान में अभी और कितने अहमदिया लोगों का जिगर चाक होगा , अभी और कितने नश्तर टूटेंगे ? फैज अहमद फैज का एक शेर है -

 तुम दिल को सम्भालो ,

जिसमें अभी ,

सौ तरह के नश्तर टूटेंगे ।

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