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आज जारी होगा एनआरसी का फाइनल लिस्ट, सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद

Bhola Tiwari Aug 31, 2019, 8:18 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

असम में जबर्दस्त तनाव है,वे जिनके नाम फाइनल लिस्ट में नहीं हैं बेहद तनाव में हैं।आपको बता दें फाइनल लिस्ट में 41 लाख लोगों को बाहर किया गया है।आशंका है कि जिनके नाम "नेशनल सिटीजन रजिस्टर" में नहीं हैं वो हिंसा कर सकते हैं।खुफिया एजेंसियों को सांप्रदायिक दंगे भड़कने की गुप्त सूचना मिली है।

असम पुलिस ने ट्विटर पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार ने उन सभी लोगों की सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं जिनका नाम एनआरसी लिस्ट में नहीं है।असम पुलिस ने लोगों से अफवाहों, सुनी-सुनाई बातों और फेक न्यूज पर विश्वास न करने की अपील की है।

गृहमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि "सिर्फ एनआरसी में नाम न आने से कोई भी विदेशी नागरिक नहीं हो जाएगा।जिनका नाम एनआरसी में नहीं आता वह सभी लोग राज्य भर में बनवाए जा रहे फाँरेन ट्रायब्यूनल या एफटी में अपील कर सकते हैं।"

एनआरसी असम में रह रहे भारतीय नागरिकों की एक लिस्ट है।इसे राज्य में अवैध तरीक़े से घुस आए तथाकथित बंगलादेशियों के खिलाफ असम में हुए छह साल लंबे जनआंदोलन के नतीजे के तौर पर समझा जा सकता है।एनआरसी के तहत तीन करोड़ उनतीस लाख लोगों ने खचद को असम का नागरिक बताते हुए आवेदन दाखिल किया था।फाइनल लिस्ट में 41 लाख लोग बाहर हैं।

"नेशनल सिटीजन रजिस्टर" में जिनके नाम शामिल नहीं हैं या बाद में भी शामिल नहीं किया जाएगा उसका क्या होगा?क्या सरकार उन्हें विदेशी नागरिक घोषित कर बांग्लादेश भेज देगी या उन्हें जेल में रहना होगा।अगर बांग्लादेश इतने बड़े विस्थापन को अपने देश में आने की इजाजत नहीं देती है तो क्या होगा।इन सारी बातों का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है या कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

आपको बता दें पाकिस्तान "पूर्वी पाकिस्तान"(बांग्लादेश) के लोगों पर तरह तरह के जुल्म किया करता था इस वजह से पूर्वी पाकिस्तान से लोग भारत आने लगे।कहते हैं कि उन दिनों कई लाख लोग बांग्लादेश से असम आए थे जिसमें अधिकतर मुसलमान थे।सरकार की सख्ती के बावजूद लोगों का आना नहीं रूका,बार्डर पर कुछ पैसे देकर रिफ्यूजी सीमा के अंदर आ जाते थे।असम से वे पश्चिम बंगाल आने लगे,पश्चिम बंगाल की कम्युनिस्ट सरकार उन्हें संरक्षण देती थी।वोट बैंक बनाने के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों का राशनकार्ड और वोटर आईडी बनाकर वहाँ बसा लिया जाता था।कम्युनिस्ट शासन के पतन के बाद यही काम तृणमूल कांग्रेस कर रही है।

असम में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ वहाँ के बुद्धिजीवी वर्ग ने लगातार छह साल आंदोलन किया तब सुप्रीमकोर्ट ने मनमोहन सिंह सरकार को एनआरसी बनाने का आदेश दिया था।कांग्रेस के समय में ये काम बेहद धीमी गति में हुआ तब सुप्रीमकोर्ट ने केन्द्र सरकार को कडी फटकार लगाई थी।एनआरसी का काम सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में हो रहा है और आज इसकी फाईनल लिस्ट जारी की जा रही है।

आपको ये भी बता दें इसमें हजारों खामियां हैं, जिनके पास सभी वैध कागज हैं उनके भी नाम इस लिस्ट से गायब हैं।पिता का नाम है तो बेटा का नाम नदारत है,बेटा का नाम अगर एनआरसी रजिस्टर में दर्ज है तो उसकी माँ का नाम गायब है।इस एनआरसी में तमाम खामियां हैं फिर भी सरकार बेमन से इसे फाइनल लिस्ट के तौर पर जारी कर रही है।सरकार के पास इतने आँब्जेक्शन हैं कि इसे दूर करते करते सदियाँ बीत जाएंगी।लोगों का नाम शामिल करने में खूब भ्रष्टाचार की भी खबरें हैं, पैसा देकर इस रजिस्टर में आसानी से नाम चढाया जा सकता है ये कई स्ट्रींग आँपरेशनों ने सिद्ध कर दिया है।

मेरा मकसद सरकार की मंशा पर सवाल खडा करना नहीं है मगर सरकारी कर्मचारियों की अकर्मण्यता, भ्रष्टाचार और बहुत से कारणों ने इस एनआरसी को कमजोर बना दिया है।

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