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उइगर विद्वान "इलहम थोटी" को मिलेगा यूरोप का शीर्ष सम्मान

Bhola Tiwari Aug 29, 2019, 11:50 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

यूरोप की सर्वोच्च अधिकार निकाय,काउंसिल आँफ यूरोप ने चीनी उइगर विद्वान इलहम थोटी को अपने सर्वोच्च मानवाधिकार अवार्ड के लिए नामित किया है।इलहम थोटी इन दिनों चीन की जेल में बंद हैं।

इलहम थोटी को चीन सरकार ने "ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट" का प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी के लिए 2014 में गिरफ्तार किया था तब से वे जेल में बंद हैं।


आपको बता दें इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं।इस प्रांत की सीमा मंगोलिया और रूस सहित आठ देशों के साथ मिलती है।तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की आबादी एक करोड़ से ऊपर है।कुछ साल पहले तक शिंजियांग प्रांत में वे बहुसंख्यक थे मगर इनके बढ़ते प्रभाव को देखकर चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने इनपर बहुत से प्रतिबंध लगाएँ हैं जैसे जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए कानून बनाया गया है,घनी आबादी में बसने पर प्रतिबंध लगाया गया है।मस्जिदों की संख्या कम कर दी गई है,धार्मिक पहनावे पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं।

उइगर मुसलमानों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो मुसलमान "हान" जाति में धर्म परिवर्तन कर शामिल हो रहा है उसे नौकरी दी जा रही है,व्यवसाय के लिए सस्ते दरों पर लोन दिये जा रहें हैं।इसका परिणाम भी शिंजियांग प्रांत में देखने को मिल रहा है,पहले उइगर मुसलमान वहाँ बहुसंख्यक थे आज "हान" समुदाय बहुसंख्यक है।संतुलन स्थापित करने के लिए हान समुदाय के लोगों को अन्य राज्यों से लाकर वहाँ बसाया जा रहा है।

गौरतलब है कि 1949 में पूर्वी तुर्कीस्तान,जो अब शिंजियांग है एक अलग राष्ट्र के रूप में कुछ समय के लिए मान्यता मिली थी लेकिन उसी समय चीन ने बलात् उसपर कब्जा कर लिया।उसी समय से ये चीन का हिस्सा बना हुआ है।दरअसल उइगर अपना एक अलग देश चाहते हैं और उसी के लिए आंदोलनरत हैं।

प्रोफेसर इलहम थोटी उइगर समुदाय से हैं और वे शिंजियांग प्रांत में मानवाधिकार और अलग देश की मांग को लेकर सक्रिय थे।उम्मीद है चीन सरकार अब नींद से जागेगी और थोटी को आजाद करके एक मिसाल पेश करेगी।मैं जानता हूँ ऐसा नहीं होगा मगर उम्मीद पर हीं तो दूनिया कायम है।

यूरोप की सर्वोच्च अधिकार निकाय,काउंसिल आँफ यूरोप ने चीनी उइगर विद्वान इलहम थोटी को अपने सर्वोच्च मानवाधिकार अवार्ड के लिए नामित किया है।इलहम थोटी इन दिनों चीन की जेल में बंद हैं।

इलहम थोटी को चीन सरकार ने "ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट" का प्रचार-प्रसार में सक्रिय भागीदारी के लिए 2014 में गिरफ्तार किया था तब से वे जेल में बंद हैं।

आपको बता दें इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं।इस प्रांत की सीमा मंगोलिया और रूस सहित आठ देशों के साथ मिलती है।तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की आबादी एक करोड़ से ऊपर है।कुछ साल पहले तक शिंजियांग प्रांत में वे बहुसंख्यक थे मगर इनके बढ़ते प्रभाव को देखकर चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने इनपर बहुत से प्रतिबंध लगाएँ हैं जैसे जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए कानून बनाया गया है,घनी आबादी में बसने पर प्रतिबंध लगाया गया है।मस्जिदों की संख्या कम कर दी गई है,धार्मिक पहनावे पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं।

उइगर मुसलमानों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो मुसलमान "हान" जाति में धर्म परिवर्तन कर शामिल हो रहा है उसे नौकरी दी जा रही है,व्यवसाय के लिए सस्ते दरों पर लोन दिये जा रहें हैं।इसका परिणाम भी शिंजियांग प्रांत में देखने को मिल रहा है,पहले उइगर मुसलमान वहाँ बहुसंख्यक थे आज "हान" समुदाय बहुसंख्यक है।संतुलन स्थापित करने के लिए हान समुदाय के लोगों को अन्य राज्यों से लाकर वहाँ बसाया जा रहा है।

गौरतलब है कि 1949 में पूर्वी तुर्कीस्तान,जो अब शिंजियांग है एक अलग राष्ट्र के रूप में कुछ समय के लिए मान्यता मिली थी लेकिन उसी समय चीन ने बलात् उसपर कब्जा कर लिया।उसी समय से ये चीन का हिस्सा बना हुआ है।दरअसल उइगर अपना एक अलग देश चाहते हैं और उसी के लिए आंदोलनरत हैं।

प्रोफेसर इलहम थोटी उइगर समुदाय से हैं और वे शिंजियांग प्रांत में मानवाधिकार और अलग देश की मांग को लेकर सक्रिय थे।उम्मीद है चीन सरकार अब नींद से जागेगी और थोटी को आजाद करके एक मिसाल पेश करेगी।मैं जानता हूँ ऐसा नहीं होगा मगर उम्मीद पर हीं तो दूनिया कायम है।

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