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भारत "सिंधु नदी जल समझौता" तोड़े बगैर पानी रोकेगा

Bhola Tiwari Aug 23, 2019, 9:05 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

भारत सरकार ने तय किया है कि सिंधु नदी जल संधि का उल्लंघन किए बिना हिमालय से निकलने वाली नदियों के पानी को पाकिस्तान की तरफ जाने से रोकने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने पाकिस्तान को प्रवाहित होने वाले पानी को रोकने का काम शुरू हो चुका है।शेखावत ने जोर देकर कहा मैं उस पानी की बात कर रहा हूँ, जो पाकिस्तान को जाता है और मैं सिंधु जल संधि को तोड़ने की बात नहीं कर रहा हूँ।

आपको बता दें पिछले साल प्रधानमंत्री कार्यालय ने केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण(सीईए) को दिसंबर तक का समय दिया था जिसमें उन छह से ज्यादा जलविद्युत परियोजनाओं के बारे में तकनीकी और आर्थिक अध्ययन पूरा करके अपनी रिपोर्ट देने को कहा था जो चेनाब नदी पर बनाया जाना है।महत्वाकांक्षी परियोजना में 1856 मेगावाट की सवालकोट परियोजना प्रमुख हैं,इसके अलावा 990 मेगावाट की किरथाई और 540 मेगावाट की कवाड परियोजना भी महत्वपूर्ण है।


जलसंसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कहते हैं,"मामला यह है कि किस तरह हम पाकिस्तान को जाने वाले अतिरिक्त पानी को रोककर उनका इस्तेमाल कर सकते हैं।जलग्रहण क्षेत्र के बाहर कुछ जलाशय और नदियाँ हैं हम उनकी दिशा को मोड़ेंगे और जरूरत होने पर पानी का इस्तेमाल कर पाएंगे।आज हमारे जलाशय भरे हुए हैं लेकिन हम पाकिस्तान जाने वाले पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं और इसे रावी की ओर मोड़ देंगे।बांध केवल बिजली उत्पादन के लिए हीं नहीं बनाए जाते बल्कि पानी की कम उपलब्धता वाले समय में भी इनका इस्तेमाल होता है।


केंद्र की मोदी सरकार ने ये तय कर लिया है कि अब भारत पाकिस्तान को पानी के लिए वैसे हीं तडपाएगा जैसे देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1948 में दो नहरों का पानी पाकिस्तान जाने से रोक दिया था।दरअसल पानी के लिए आजादी से पूर्व हीं पंजाब और सिंध प्रांत में झगडा शुरू हो गया था।आजादी के बाद दोनों देशों के इंजीनियर मिले और उन्होंने पाकिस्तान की तरफ आनेवाली दो प्रमुख नहरों पर एक "स्टैंडस्टल समझौता" पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार पाकिस्तान को लगातार पानी मिलता रहा।ये समझौता 31 मार्च 1948 तक लागू रहा।

भारत के बहुत बार अनुरोध करने पर भी पाकिस्तान समझौते की मेज पर नहीं आ रहा था तब नेहरू जी ने दो प्रमुख नहरों का पानी रोक दिया जिससे पाकिस्तान के पंजाब की 17 लाख एकड़ जमीन पर हालत खराब हो गए।खेती सुखने लगी और पाकिस्तान में हंगामा शुरू हो गया।पाकिस्तान के किसानों ने सरकार पर दवाब डाला तब पाकिस्तान ने भारत के साथ जल समझौता किया।

एक और समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान व्यापक जल समझौते के लिए राजी हुए और 1960 में कराची में भारत के प्रधानमंत्री नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान के बीच सिंधु घाटी की नदियों के पानी का बंटवारा हुआ।

बंटवारे में पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब और भारत को रावी,व्यास और सतलज नदी मिलीं।सिंधु नदी का उद्गम हिमालय में है और वह भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली प्रमुख नदी है।सिंधु की कुल लंबाई 3180 किलोमीटर तथा कछार का क्षेत्रफल लगभग 9,66,000 वर्ग किलोमीटर है।

इस समझौते को संयुक्त राष्ट्र ने अबतक का जल विवाद पर सबसे बेहतरीन समझौता करार दिया था और ये वाकई है भी मगर अब ये दो राष्ट्र की तनातनी का शिकार हो रहा है।दोनों देशों के तनाव इस पर हावी होने लगा है।चूंकि भारत से होकर हीं नदियाँ दूसरी तरफ रूख कर रहीं हैं इस वजह से भारत फायदे में है।पाकिस्तानी आतंकवाद का जवाब भारत वहाँ पानी रोककर देना चाहता है।इसमें भारत कितना कामयाब होगा वो भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ये देखने वाली बात होगी।भारत में बहुत से लोग सिंधु नदी जल समझौता तोड़ने की मांग कर रहें हैं जो किसी भी हालत में मुमकिन नहीं है।जम्मू कश्मीर विधानसभा ने 2003 में एक प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से ये मांग की थी कि वो इस संधि पर पुनर्विचार करे।दरअसल कश्मीर को मिलने वाला 50% पानी पाकिस्तान चला जाता है।

इस समझौते के तहत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया।सतलज,व्यास और रावी नदियों को पूर्वी नदी बताया गया जबकि झेलम,चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया।

समझौते के मुताबिक पूर्वी नदियों का पानी कुछ अपवादों को छोड दें,तो भारत बिना रोकटोक के इस्तेमाल कर सकता है।पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए होगा लेकिन समझौते के भीतर कुछ नदियों का पानी का कुछ सीमित इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी।

समझौते के अंतर्गत एक स्थाई सिंधु आयोग की स्थापना की गई।इसमें दोनों देशों के कमिश्रनरों के हमेशा मिलते रहने का प्रस्ताव था।

ये भी प्रावधान था कि अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उसकी डिजाइन पर आपत्ति है तो दूसरा देश उसका जवाब देगा।अगर विवाद आयोग नहीं सुलझा पाती तो दोनों देश की सरकारें मसले को सुलझाएंगी।

भारत और पाकिस्तान के बीच ये बेहतरीन संधि है मगर अब ये राजनीति की भेंट चढ़ रहा है।भारत सीमा पर बड़े बड़े डैम बनाकर पाकिस्तान की तरफ बहने वाली पानी को रोक रहा है जो इस संधि की भावना के खिलाफ है मगर कहते हैं कि युद्ध की परिस्थिति में सबकुछ जायज होता है।अभी एक अघोषित युद्ध दोनों तरफ से चल रहा है जो बहुत कुछ बरबाद करने के बाद हीं थमेगा।

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