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जिस "मुफ्ती" परिवार को देश ने इतना दिया वो देश के खिलाफ "बगावत" की बात करता है

Bhola Tiwari Aug 19, 2019, 1:40 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

08 दिसंबर 1989 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे केन्द्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी डाँक्टर रूबिया सईद अस्पताल से बाहर निकलकर घर जाने के लिए बस पकड़ती हैं।भारत के गृहमंत्री की बेटी होने के बावजूद उनके पास कोई सुरक्षा नहीं था।उन दिनों कश्मीर घाटी में चरमपंथी संगठन "जम्मू कश्मीर लैबरेशन फ्रंट" यानी जेकेएलएफ बेहद सक्रिय था और उसने आतंक का साम्राज्य स्थापित कर रखा था।जेकेएलएफ चाहता था कि कश्मीर के मुद्दे का अंतराष्टीयकरण हो जिससे पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुँचे।

इसी बीच मुफ्ती मोहम्मद सईद संयुक्त मोर्चा की सरकार में पहले मुस्लिम गृहमंत्री बने,जेकेएलएफ ने तभी कुछ बडा करने का मन बना लिया था।रूबिया सईद अपहरण आँपरेशन के लिए बेहद तेजतर्रार आतंकी अशफाक को लगाया गया।अशफाक ने आँपरेशन के पहले रूबिया सईद के घर और अस्पताल की रेकी भी की थी।

घर जाने के लिए बस में सवार डा.रूबिया सईद को थोडी दूर जाने के बाद बंदूक की नोक पर बस से उतारकर कार में बैठाकर एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।अपहरण के दो घंटे बाद जेकेएलएफ के जावेद मीर एक लोकल अखबार को फोन कर ये बताते हैं कि भारत के गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी डा.रूबिया सईद का अपहरण हो गया है।अखबार तुरंत इस खबर की सूचना जम्मू-कश्मीर के उच्चाधिकारियों को देता है तब दिल्ली से लेकर जम्मू कश्मीर में हंगामा हो जाता है।

मध्यस्थ के द्वारा वार्ता चलती है और जेकेएलएफ के शर्तानुसार उससे संबद्ध पाँच दुर्दांत आतंकियों को छोडा जाता है और 13 दिसंबर 1989 को डा.रूबिया सईद की रिहाई होती है।

महबूबा मुफ्ती जी रूबिया सईद आपकी छोटी बहन थीं और सभी की प्रिय थीं।ये वही भारत सरकार थी जिसने आपकी बहन की रिहाई के लिए जेकेएलएफ के सामने झूकना मंजूर किया था, सरकार चाहती तो वह जेकेएलएफ की नाजायज मांग नहीं मानती मगर इंसानियत के लिए आपकी बहन की रिहाई के लिए उसे आतंकियों की नाजायज मांग को मांगना पडा था।फिर भी आप भारत सरकार से बगावत की बात कहतीं हैं।अनुच्छेद 370 के खत्म करने पर आप भारत से संबंध खत्म करने की वकालत करती हैं।

आपने कहा,"ना समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिंदुस्तान वालों, तुम्हारी दास्तान तक भी ना होगी दास्तानों में।"

"आग से मत खेलो,अनुच्छेद 35(A) से छेडछाड मत करो वरना 1947 से अबतक जो आपने नहीं देखा,वह देखोगे।यदि ऐसा होता है तो मुझे नहीं पता कि जम्मू कश्मीर के लोग तिरंगा उठाने के बजाए कौन सा झंडा उठाएंगे।"

"हम आपके साथ जिन शर्तों पर आए थे अगर वो शर्त खत्म होंगी तो हमें दोबारा सोचना होगा कि हम क्या आपके साथ बिना शर्तों के रहना चाहेंगे।"

महबूबा मुफ्ती जी आपके पिता ने जब राजनीति की शुरुआत की थी तब वे बेहद गरीब थे,मुफलिसी के दिनों में एक एक पैसा कितना महत्वपूर्ण था ये मुफ्ती साहब हीं जानते होंगे।मुफ्ती साहब राजनीति की सीढ़ियाँ चढ़ते गए और परिवार दौलतमंद होता गया।ये दौलत और शोहरत इसी देश में मिली थी न कि पाकिस्तान या अन्य यूरोपीय मूल्कों से।ये काली कमाई उन गरीब कश्मीरियों की थी जिन्हें सब्जबाग दिखाकर आप लोग दोनों हाथों से लूटते रहे।कश्मीर घाटी, श्रीनगर, जम्मू और विदेशों में आपने जमीन खरीदे ये पैसा कहाँ से आया क्या इसका आपने हिसाब दिया।कश्मीरियों की बदहवाली और बरबादी में कुछ परिवारों की अहम भूमिका है उसमें अब्दुल्ला परिवार के बाद आप लोगों का हीं नंबर आता है।

मुफ्ती मोहम्मद सईद की चार संतानें हैं जिसमें सबसे बड़ी महबूबा मुफ्ती हैं जो अपने पिता की विरासत को संभाले है।बेटा तस्दीक सईद मुंबई में "सिनेमेटोग्राफर" हैं और वे मुंबई में हीं रहना पसंद करते हैं।यद्यपि पिता के निधन के बाद वे राजनीति में जरूर आए थे मगर आंशिक रूप से।तस्दीक सईद की बडी पहचान भारत में हीं बनी न कि पाकिस्तान में।तस्दीक की गिनती बाँलीवुड के सबसे टेलेंटेड सिनेमेटोग्राफर के रूप में होती है।

मुफ्ती साहब की दूसरी बेटी डाँक्टर रूबिया सईद जिनका अपहरण हुआ था वो अपने परिवार के साथ चैन्नई में रहती हैं।उनके पति आटोमोबाइल शोरूम के मालिक हैं और उनके दो पुत्र हैं।मुफ्ती साहब की तीसरी बेटी महमूदा अमेरिका में रहतीं हैं और उन्होंने वहीं की नागरिकता ले ली है।उन्हें राजनीति से कोई मतलब नहीं है।

आपको बता दें महबूबा मुफ्ती की शादी मुफ्ती साहब के कजिन जावेद इकबाल से हुई थी।दोनों ने एक दूसरे को पसंद किया था मगर मुफ्ती साहब इस रिश्ते से खुश नहीं थे।बेटी के जिद्द के सामने उन्हें झुकना पड़ा और 1984 में दोनों का निकाह हुआ।निकाह के बाद से हीं दोनों में झगडा होने लगा था।इस बीच दोनों से दो बच्चियां हुईं मगर 1987 में दोनों का तलाक हो गया।

महबूबा मुफ्ती की बडी बेटी इर्तिका इकबाल लंदन में भारतीय उच्चायोग में काम करती हैं और एक आम कश्मीरी लड़की के इतर बिंदास और वैभवपूर्ण जिंदगी जीतीं हैं।

महबूबा मुफ्ती की दूसरी बेटी इतिजा भी मुंबई फिल्म उद्योग से जुड़ी हैं और उनके मामा उसे बहुत सपोर्ट करते हैं।

महबूबा मुफ्ती जी जिस देश ने आपको इतना दिया है उसके खिलाफ बोलना आपकी तुच्छ मनोदशा को हीं तो दर्शाता है।कश्मीर भारत का है और हमेशा भारत का हीं रहेगा अब ये बात आपको मान लेनी चाहिए।जिस अनुच्छेद 370 को हटाने पर आपने कहा था कि भारत का झंडा उठाने वाला नहीं मिलेगा,आज आपकी बोलती बंद है।दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है मगर भारत का तिरंगा शान से कश्मीर में फहर रहा है।

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