ब्रेकिंग न्यूज़
पाकिस्तान को चीन ने दिया 'धोखा', भेज दिया अंडरवेयर से बने मास्क         खुशखबरी : नए डोमिसाइल नियम में संशोधन, स्थायी निवासियों के लिए सरकारी नौकरियां आरक्षित         स्वास्थ्य मंत्रालय : कोरोना के 30% मामले तब्लीगी जमात के मरकज की वजह से फैले         प्रार्थना का क्या महत्व है ?         लॉक डाउन : कुछ शर्तों के साथ खुल सकता है लॉकडाउन, जानें क्या है सरकार की तैयारी         WHO की रिपोर्ट में खुलासा : ऐसे फैलता है कोरोना वायरस         पाकिस्तान : नाबालिग को अगवा कर पहले किया रेप, फिर धर्म-परिवर्तन करा रेपिस्ट से कराई शादी         इस दीए की रोशनी         अनलॉक्ड : खुली हवाओं में सांस ले रहे हैं जीव-जन्तु         सीएम योगी का फरमान : नर्सों से अश्लील हरकत करने वाले जमातियों पर NSA, अब पुलिस के पहरे में इलाज         जमात की करतूत : नर्सों के सामने नंगा होने वाले जमात के 6 लोगों पर FIR         आप इन्फेक्टेड हो गए हैं तो काफिरों को इन्फेक्ट कीजिए : आईएसआईएस          मैं, सरकारी सिस्टम के साथ हूँ         तबलीगी जमात से जुड़े 400 लोग कोरोना पॉजिटिव, 9000 क्वारनटीन : स्वास्थ्य मंत्रालय         BIG NEWS : झारखंड में कोरोना का दूसरा मरीज मिला         सेना की बड़ी तैयारी : युद्धपोत, प्लेन अलर्ट, सेना के 8,500 डॉक्टर भी तैयार         पाकिस्तान में ऐलान : तबलीगी जमात के लोगों से नहीं मिले मुल्क के लोग         सबके राम !         तबलीगी जमात का आतंकवादी संगठनों से अप्रत्यक्ष संबंध : तस्लीमा नसरीन         BIG NEWS : झारखंड के मंत्री पुत्र को आइसोलेशन वार्ड, होम क्वारेंटाइन में मंत्री         BIG NEWS : अब 15 वर्षों से राज्य में रहने वाला हर नागरिक जम्मू कश्मीर का स्थायी निवासी         11 जनवरी से 31मार्च- 80 दिन 1920 घंटे..          क्या है तबलीगी जमात और मरकज?         खतरे में प्रिंट मीडिया         तबलीगी जमात में शामिल धार्मिक प्रचारकों को ब्लैक लिस्ट करेगी सरकार         तबलीकी जमात का सालाना कार्यक्रम :  केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का फेल्योर हीं है !         बड़ी खबर : झारखंड में कोरोना का पहला पॉजिटिव केस, हिंदपीढ़ी में मलेसिया की युवती निकली संक्रमित, तब्‍लीगी जमात से जुड़ी है मलेशिया की महिला         क्या है तबलीकी जमात और मरकज?जिनके ऊपर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं...         हे राम-भरोसे ! हमसे उम्मीद मत रखना !         होशियार लोगों का वायरल बीहेवियर         लॉक डाउन को मंत्री जी ने किया अनलॉक, डीसी का आदेश पाकर गांव की ओर चल पड़ी बसें         पाकिस्तान में कोरोना : राशन सिर्फ मुसलमानों के लिए है, हिंदूओं को नहीं मिलेगा         चीन को खलनायक बनाकर अमेरिकीपरस्त प्रेस ने निकाली मीडिया की मैयत..         विएतनाम पर बीबीसी की रिपोर्ट : किस पर भरोसा करें!         पाकिस्तान में कोरोना : मास्क और ग्लव्स की जगह पॉलिथीन पहनकर इलाज कर रहे हैं डॉक्टर        

जहांगीरी घंटा लोकतंत्र में नादान बजाते हैं किरण..

Bhola Tiwari Aug 17, 2019, 7:39 AM IST पॉलिटिकल
img


 राजीव मित्तल

यह प्रहसन थोड़ा पुराना है लेकिन भारतीय लोकतंत्र में हर समय मौजूं है अब चाहे ताली पीटो या सिर धुनो..

खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे तो सुना था और आगे भी सुनेंगे, लेकिन जब वो खिसियाती हैं तो उन्हें 16 साल की किरण में सपनों को मटियामेट कर देने वाली सोनिया क्यों नजर आती है..

दशकों से पूरे ब्राह्मांड में लोकतंत्र की अलख जगा रहे भारतवर्ष में लोकहित की बात करने लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री बनीं अपनी नेता से मिलने किरण लखनऊ पहुंच गयी.. लेकिन वो भूल गयी कि यह सन् 2008 का लखनऊ है सन् 1620 का आगरा नहीं..वो जमाना जहांगीर का था..

सलीम को बादशाह जहांगीर बनने के लिये किसी वोटबैंक की जरूरत नहीं पड़ी, किसी गरीब या अमीर से कोई वादा नहीं करना पड़ा. माबदौलत तेरे पास वोट मांगने कभी नहीं आएंगे, हां, तू कुछ भी मांगने हमारे पास कभी भी आ सकता है..तेरे लिये अपने किले के बाहर एक घंटा लगवा दिया है, हमारी तरफ से जब भी कोई परेशानी हो या हमारा कोई अफसर या कर्मचारी तुझे परेशान करे, तू टनटना देना, सब ठीक हो जाएगा..

बताया जाता है कि उस बादशाही घंटे की जद में मलिका नूरजहां तक आ गयी थीं..

अनुमान है कि किरण को इस लोकतंत्र में जहांगीरी घंटे की ही याद रही और वह पहुंच गयी लखनऊ.. लखनऊ भी वह साइकिल से गयी ताकि राजदरबार में हौसलाअफजाई भी हो कि वाह क्या लड़की है..

लेकिन मेरठ से साइकिल चला कर लखनऊ गयी किरण यह क्यों भूल गयी कि भारतीय लोकतंत्र पांच सौ किलोमीटर साइकिल चला कर लखनऊ गयी किरण का नहीं, वोटों का मोहताज है और तब तो किरण के होने या उसके पांच सौ किलोमीटर साइकिल चलाने का वैसे भी कोई अर्थ नहीं, जब चुनाव के तीन साल बाकी हों..सत्ता की कुर्सी को दूर-दूर तक छूने वाला तो दूर, उसकी तरफ देखने का साहस रखने वाला तक कोई न हो..

उत्साह से भरी किरण को राजदरबार में घुसने देना तो दूर, लखनऊ की सड़कों या गलियों तक में कदम धरने की बंदिश लगा दी गयी.. और जब वह अपनी नेता से मिलने के लिये अड़ गयी तो उसे जीप में डाल कर उसके शहर मेरठ पहुंचा दिया गया..

अपनी नेता या मुख्यमंत्री से उसकी मात्र इतनी सी डिमांड थी कि जिस सरकारी मदद से उसने अपनी पढ़ाई पूरी की, अन्य लड़कियों को भी वह मदद मिलती रहे, उसे बंद न किया जाए, जो एक धचके में बंद कर दी गयी.. किरण भूल गयी कि अब जहांगीरी घंटा इतिहास की गर्द में धूल फांक रहा है और लोकतंत्र में बादशाहों की ये सब बकवासें नहीं चला करतीं..

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links