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सियासी हलचल : अब बिहार में क्या होने वाला है

Bhola Tiwari Aug 10, 2019, 9:05 AM IST टॉप न्यूज़
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■ संसद में मोदी सरकार का विरोध करने वाले जदयू का 370 पर क्यों बदल गया सुर 

■ केन्द्र सरकार के एक फरमान से बिहार सरकार के प्रशासनिक हलके में खलबली

मनोज कुमार 
पटना : केंद्र सरकार के जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के निर्णय के बाद सियासी पारा चरम पर है। कमोबेश हर पार्टी में दंगल हो रहा है। चाहे वह राष्ट्रीय पार्टियां हो चाहे राज्य की क्षेत्रीय पार्टी। हर पार्टी में मतभेद। मनभेद। आर्टिकल 370 के तीर ने सबको भेद के रख दिया है। कितने लोग शुतुरमुर्ग बन गए तो कितने मेंढक। लिहाजा केंद्र सरकार के इस निर्णय ने सभी पार्टियों में, सभी राज्यों में भूचाल खड़ा कर दिया है। राष्ट्रवाद के शंखनाद ने सभी पार्टियों में घालमेल कर दिया है। क्षेत्रीय सुरमाओं की मुकुट हिल चुके हैं। 

इस फेहरिस्त में बिहार के सीएम नीतीश कुमार का भी नाम है। लिहाजा उनकी पार्टी ने आर्टिकल 370 पर पूरा का पूरा अपना चोला ही बदल लिया है। अब वह मिले सुर मेरा तुम्हारा कि राह पर चल रहे हैं। पार्टी में एक किस्म की घबराहट है। बिहार में क्या होने वाला है। क्या होगा। केवल और केवल घबराहट। माथे पर बल।
 दरअसल में हुआ यू कि पिछले दिनों नीतीश कुमार की कारगुजारी और उनकी पार्टी की चाल को ध्यान में रखते हुए मोदी अमित शाह की जोड़ी ने बिहार में फील्डिंग करनी शुरू कर दी है। केन्द्र सरकार के एक फरमान से बिहार सरकार के प्रशासनिक हलके में खलबली मच गयी है। केन्द्र ने पटना सचिवालय, पुलिस मुख्यालय और जिलों में तैनात अफसरों की वैसी सूची मांगी है जिनमें उनके नाम, पते, फोन नम्बर और ईमेल आइडी दर्ज हों। केन्द्र ने इस फीडबैक कलेक्शन को सामान्य प्रक्रिया बताया है लेकिन पटना के राजनीति गलियारे में इसको लेकर चिंता का माहौल है। क्या मोदी-शाह की जोड़ी बिहार में भी कोई पोलिटिकल ऑपरेशन लॉन्च करने वाली है? 
 अपने को सूबे का नंबर वन नेता मानने वाले और प्रायः भाजपा को आंख दिखाने वाले नीतीश कुमार को भाजपा अब तवज्जो नहीं दे रही है। लिहाजा नीतीश कुमार इन दिनों चिंतित है। पटना में केन्द्र के इस फरमान पर को शक की निगाहों से देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के नये केन्द्र शासित प्रदेश बनने से कई आइएएस अफसरों की जरूरत पड़ेगी। उनकी ही प्रतिनियुक्ति के लिए केन्द्र ये सूची मांग रहा है। लेकिन जिस राजनीति हालात के बीच ये सूची मांगी गयी है उससे कई तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं।

लिहाजा जिस तरह से पूरे देश में नये कश्मीर और कानून का स्वागत हो रहा है उससे जदयू बैकफुट पर आ गया है। अब जदयू के नेताओं के लग रहा है कि वे धारा 370 का समर्थन कर के जनभावना के खिलाफ जा रहे हैं। कुछ दिन पहले तक धारा 370 का समर्थन करने के लिए जदयू के नेता लोहिया और जेपी के नामों की माला जप रहे थे। लेकिन जब पैरों तले जमीन खिसकने लगी तो कानून के सम्मान की बात करने लगे हैं। इतना ही नहीं जदयू ने अपने दल को उन नेताओं को भी फटकार लगायी है जिन्होंने 370 को लेकर केन्द्र के खिलाफ कड़वी टिपण्णी की थी। अब जदयू के बड़बोले नेताओं को मुंह बंद रखने की हिदायत दी गयी है।

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