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श्रीनगर : पिक्चर हॉल में सिनेमा देखना गुजरे जमाने की बात

Bhola Tiwari Aug 09, 2019, 10:09 AM IST टॉप न्यूज़
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सिद्धार्थ सौरभ 

श्रीनगर : आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने संबंधी विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरे जमाने में जम्मू कश्मीर की हसीन वादियों का फिल्म इंडस्ट्री से संबंध के किस्से याद किए। उन्होंने कहा कि एक जमाना था कश्मीर बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग के लिए एक पसंदीदा स्थल हुआ करता था। अब इन वादियों में वह हसीन सपना एक बार फिर सार्थक होगा। जमीन पर उतरेगा।

मोदी ने कहा, ‘‘ अब जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य हो जाएगी, तब न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर के लोग फिल्मों की शूटिंग के लिए वहां आएंगे।प्रधानमंत्री मोदी के सोच के पीछे का सच यह है कि एक जमाना हो गया घाटी में सिनेमाघरों को बंद हुए। जो घाटी से नहीं निकल पाए बच्चे वह तो यह भी नहीं जानते की पिक्चर हॉल क्या होता है और न हीं वह हॉल में कभी फिल्म देखें है। यह बच्चे केवल अपने मां-बाप और दादा-दादी से हमेशा यही सुनते आए कि श्रीनगर की इस हाल में हम लोग पिक्चर देखने जाते थे। हॉल ऐसा था, वैसा था। अब सब कुछ खत्म हो गया।


 इस संबंध में यंग जेनरेशन से बात की तो बड़े ही उत्साहित बातें सुनने को मिले। डीपीएस की छात्रा तस्कीन ने कहा कि हमने अपने पैरंट्स के मुंह से सुना है कि श्रीनगर के लाल चौक बाजार में कभी पैलेडियम सिनेमा हुआ करता था, लेकिन आज यह बंद पड़ा है। कभी यहां सिनेमा प्रेमी टिकट लेने के लिए कतार में खड़े रहते थे। यहां से कुछ किमी दूर जहां कभी नीलम सिनेमा की रौनक होती थी, वहां आज केवल उसका धुंधला बोर्ड पड़ा हुआ है। हम सभी पिक्चर देखने जाते थे। खूब मजा आता था। तस्कीन ने कहा कि लेकिन मुझे पेरेंट्स की बातों पर यकीन नहीं होता है कि ऐसा भी हुआ करता था मेरा शहर। पिक्चर हॉल खोलनी चाहिए। हम सभी भी इंजॉय करेंगे। एक प्रश्न के जवाब में अबू निशा ने कहा कि पिक्चर हॉल खोलनी चाहिए। इससे अनुभव बढ़ता है। मेंटल स्ट्रेस कम होता है। लाइफ के लिए अच्छा है। होम थिएटर से काम नहीं चलता क्या के प्रश्न के जवाब में सुभ्रा, आजिम ने कहा की बंद पड़े पिक्चर हॉल ओपन होना चाहिए। फास्ट लाइफ है। फन, मौज-मस्ती मेंटल स्ट्रेस कम करने के लिए आवश्यक है। हम सभी को उम्मीद है यह सपने जल्दी पूरे होंगे। कश्मीर की उम्रदराज पीढ़ी, जिसने घाटी के पैलेडियम, नीलम और ब्रॉडवे जैसे सिनेमाघरों में बॉलीवुड और हॉलीवुड की फिल्में देखी हुई हैं, उस दौर की स्मृति को बड़ी भावुकता से याद करती है.


 गौरतलब है कि कश्मीर में 1990 के दशक में आतंकवाद के पनपने के साथ ही सिनेमा हाल के पर्दे भी गिरने लगे। वहां करीब 19 सिनेमा हॉल बंद हो चुके हैं, जिसमें 9 सिनेमा हॉल तो केवल श्रीनगर में बंद हुए हैं। आजकल अधिकांश सिनेमा हॉल में सुरक्षा बलों के कैंप में तब्दील हो गए हैं और कुछ होटल, शापिंग कांप्लेक्स या हास्पीटल में तब्दील कर दिए गए हैं। आतंकवाद ने घाटी में सिनेमा को निगल लिया।

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