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इधर "खामोशी" है तो सरहद पार "बैचैनी"

Bhola Tiwari Aug 06, 2019, 8:39 AM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 के समाप्त कर इस विवादित धारा को "निष्प्रभावी" कर दिया है।इसकी तैयारी कुछ दिनों पहले से चल रही थी मगर पाकिस्तान का भी खूफिया तंत्र भारतीय मीड़िया की तरह सबकुछ भांपने में असफल रहा।मुद्दे पर से ध्यान भटकाने के लिए भारतीय फोर्स पीओके में भारी बमबारी कर रही थी।पाकिस्तान के हुक्मरान इस गफलत में थे कि भारत "पाक अधिकृत कश्मीर"(POK) के आतंकवादी ठिकानों पर कार्यवाही कर सकता है, दूसरी वजह ये थी कि अमरनाथ यात्रा ट्रैक से स्पाइनर रायफल, आईईडी, पाकिस्तान निर्मित लैंडमाइन की बरामदगी से पाकिस्तान इस बात पर फोकस कर रहा था कि भारत आतंकवादियों की वजह से अमरनाथ यात्रा बीच में हीं बंद कर रहा है।कुटनीति के तहत जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आपात स्थिति का हवाला देकर अमरनाथ यात्रियों और सैलानियों को अपनी यात्रा छोटी करने तथा वापस जाने को कहा।केन्द्र सरकार ने कश्मीर में तकरीबन चालीस हजार अतिरिक्त जवानों को तैनात करती है तो ये अंदेशा जताया गया कि सीमापार बडी कार्रवाही हो सकती है।

इन सारे कयासों के बीच जम्मू-कश्मीर प्रसाशन चुपचाप अपना काम करता रहा, किसी को कानों कान खबर तक न हुई।कश्मीर के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात कर पूछा कि "कश्मीर में क्या बड़ा होने वाला है"?राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उल्टे हीं इन नेताओं पर अफवाह फैलाने का आरोप मढ़ दिया।

सीमा के इस पार संदेह का माहौल था तो उस पार भी "बैचेनी" थी।रविवार को पाकिस्तान की "नेशनल सिक्योरिटी कमेटी(MSC) की बैठक बुलाई जाती है, उसमें गीदड भभकी दी जाती है कि पाकिस्तान, भारतीय सेना के किसी भी दुःसाहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।इस बैठक में पाकिस्तान के रक्षामंत्री परवेज खट्टक,विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी, सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के अलावा सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि भारत पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में "क्लस्टर बम" का इस्तेमाल कर रहा है जो जेनेवा संधि और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।इसी तरह का एक ट्वीट पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की तरफ से आया।पाकिस्तानी हुक्मरानों को तनिक भी इल्म नहीं हुआ कि भारत कश्मीर से धारा 370 को खत्म कर रही है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति डा.आरिफ अलवी ने मंगलवार को इस विषय पर चर्चा के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाया है,जिसमें इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।इधर पाकिस्तानी सेनाप्रमुख कमर जावेद बाजवा ने भी मंगलवार को सभी कोर-कमांडरों की बैठक बुलाई है।इस शीर्ष बैठक में हर वो पहलू पर विचार किया जाएगा जो आपातकाल के लिए जरूरी होगा।

डिप्लोमैटिक तरीके से भी पाकिस्तान भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है।पाकिस्तान के विदेश सचिव ने भारतीय राजदूत को तलब करके पाकिस्तान की ओर से सख्त एतराज भी दर्ज कराया है।खबर है कि कश्मीर पर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को खत लिखा है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा,"पाकिस्तान भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के बारे में की गई भारत की घोषणाओं की आलोचना करता है और उन्हें खारिज करता है।"

कुरैशी ने एक और ट्वीट में कहा,"हम पाकिस्तान का दौरा कर रहे अमरीका प्रतिनिधिमंडल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से स्पष्ट करने का इरादा रखते हैं।"

एक प्रेस विज्ञप्ति में पाकिस्तान के विदेशमंत्री ने कहा,"भारत सरकार की ओर से उठाया गया कोई भी एकतरफा कदम इस विवादित स्टेटस को नहीं बदल सकता है, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने प्रस्ताव में निर्धारित किया है।भारत के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान के लोग कभी भी इसे स्वीकार नहीं करेंगे।पाकिस्तान भी इस अंतरराष्ट्रीय विवाद का एक पक्ष है और वह अपने पास मौजूद हर विकल्प का इस्तेमाल इस अवैध कदम को रोकने के लिए करेगा।"

मुझे उम्मीद हीं नहीं पूर्ण विश्वास है कि भारत सरकार इस मुद्दे को बडी संजीदगी से निपटेगी।कश्मीरियों में आक्रोश चरम पे है,पिछले सत्तर साल से वे जिस माहौल और परिस्थितियों में जी रहें हैं उनसे निकलने में कुछ वक्त लगेगा।सरकार को उनके दिल जीतने का प्रयास करना चाहिए और सरकार करेगी भी।कश्मीर घाटी में किसी भी आंदोलन को बंदूक से कुचलने से बचना होगा, क्योंकि इससे मुद्दे का अंतराष्टीयकरण होगा जो भारत के हित में नहीं होगा।कहते हैं कि सबको बदला जा सकता है मगर पडोसी नहीं।कश्मीर में सैन्य विकल्पों से बच बचाकर कुटनीति की राह पकडनी होगी क्योंकि इस समय अमेरिका में एक अस्थिर मानसिकता का आदमी प्रेसिडेंट है जो कभी भी कुछ भी कर सकता है।वैसे भी मध्यस्थता की पेशकश कर ट्रंप ने भारत को बैकफुट पर ला हीं दिया है।

पाकिस्तान इस मुद्दे पर चुपचाप तो नहीं बैठेगा क्योंकि ये उसकी फितरत नहीं है।भारत को संयम से उसके अगले चतुर चालों पर नजदीकी नजर रखनी होगी और मुझे लगता है भारत ऐसा कर भी रहा है।

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