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क्या वाकई कुछ बड़ा होनेवाला है जम्मू-कश्मीर में?

Bhola Tiwari Aug 05, 2019, 8:58 AM IST टॉप न्यूज़
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 अजय श्रीवास्तव

जम्मू-कश्मीर में जो हालात बन रहें हैं वो वहाँ कुछ बड़ा होने के संदेश हीं दे रहें हैं।सरकार द्वारा सुरक्षा एड़वाइजरी जारी करने के साथ वहाँ अफरातफरी का माहौल है।अमरनाथ यात्रा जो पंद्रह अगस्त तक चलनी थी,उसे समयपूर्व समाप्त किया जा रहा है।श्रद्धालुओं को निकालने के लिए सारा प्रशासनिक अमला लग गया है, एन.आई.टी,श्रीनगर के छात्रों से तुरंत कैंपस खाली कराया गया।कश्मीर घाटी में चल रही विभिन्न परियोजनाओं से बाहरी लोगों को निकालकर उनके राज्यों को भेजा जा रहा है।

खबर है कि कल रात से नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और राज्य के वरिष्ठ नेताओं को उनके घर हीं "नजरबंद" करके रखा गया है।जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त 25,000 हजार जवानों को लगाया गया है जो चप्पे चप्पे की निगरानी कर रहें हैं।बीएसएफ को एलओसी की जिम सुपुर्द की गई है जो सरकार के सख्त और निर्णायक रूख को दिखाती है।अपुष्ट खबर तो ये भी है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से हथियार जमा करवा लिया गया है,मगर घाटी के एक पत्रकार ने इस खबर की पुष्टि करने से इंकार कर दिया है।

अब प्रश्न उठता है कि सरकार क्या करनेवाली है?क्या धारा 35(A) और धारा 370 को निलंबित किया जाएगा?क्या प्रदेश को तीन राज्यों में बाँटा जाएगा?क्या लगातार घुसपैठ कर रहे पीओके में भारत सरकार कडी कार्रवाई कर टेररिस्ट कैंपों को नष्ट करेगी?एक और संभावना ये है कि केन्द्र सरकार जम्मू-कश्मीर में साफ-सुथरी, हिंसामुक्त चुनाव कराना चाहती है, जो बिना कड़ाई के संभव नहीं है।

गौरतलब है कि जब से इमरान खान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वार्ता कर पाकिस्तान लौटे हैं, सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से हलचल तेज हो गई है।ट्रंप ने मध्यस्थता की बात क्या कह दी,पाकिस्तान कश्मीर मसले को हाइलाइट करने में लग गया है।सीमापार से घुसपैठ इतनी बढ़ी है कि कडी सुरक्षा के बावजूद अमरनाथ यात्रा ट्रैक से स्नाइपर राइफल, आईईडी, पाकिस्तान निर्मित लैंडमाइन की बरामदगी ये दर्शाती है कि पाकिस्तान कश्मीर में बड़ी आतंकी कार्रवाई कर दूनिया का ध्यान इस विवाद पर केन्द्रित कराना चाहता है।डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता वाले बयान के बाद कश्मीर घाटी कोई भी बड़ी आतंकवादी कार्रवाई हुईं तो पाकिस्तान ये कहेगा कि भारत कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन कर रहा है।पाकिस्तान इस समय भारत पर कडा दवाब बनाना चाहता है, जो भारत कभी होने नहीं देगा।नवंबर में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव है,भारत चाहेगा कि नये राष्ट्रपति के चुने जाने के पहले कश्मीर में कोई बडी घटना न घटे जिससे मामले का अंतराष्टीयकरण हो।

दूसरी वजह जो भाजपा के घोषणापत्र में है,वह है जम्मू-कश्मीर से धारा 35(A) और धारा 370 को हटाना।भाजपा "एक देश,एक कानून" की नीति की पक्षधर रही है जो देश को एक सूत्र में जोड़ती है।केन्द्र सरकार इस मुद्दे पर बेहद गंभीर है और मुझे लगता है अगर इस समय इस विवादित कानून को नहीं हटाया गया तो शायद हीं भविष्य में कभी मंका मिले।प्रदेश की खुशहाली और विकास के लिए इस सड़े गले कानून को हटाना बेहद जरूरी है।किसी भी राज्य के प्रगति के लिए औद्योगिक विकास बेहद महत्वपूर्ण है, इन धाराओं के चलते कोई वहाँ जमीन खरीद नहीं सकता और कश्मीरियों के पास इतना पैसा नहीं है कि वे बड़े उद्योग धंधे स्थापित कर सकें।कल-कारखाने लगने से हीं रोजगार बढ़ेंगे और बेरोजगारी पर लगाम लगाया जा सकता है।वहाँ के युवाओं को रोजगार चाहिए तब उनका ध्यान आतंकवाद जैसे मुद्दों से दूर हटेगा।

केन्द्र सरकार चाहती है कि जम्मू कश्मीर में बर्फ पड़ने से पहले विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो जाए,इस वजह से भी ये कवायद हो सकती है।रक्तहीन चुनाव जम्मू कश्मीर का भविष्य निर्धारण करेगा इसमें किसी को भी शंका नहीं होनी चाहिए।सरकारी आँकड़ों के अनुसार घाटी में अभी कुल 270-75 आतंकी मौजूद हैं, जिनमें 115 विदेशी आतंकी हैं और लोकल 162 आतंकी हैं।सूत्रों के अनुसार लगभग 200 आतंकी सीमापार से घुसपैठ की फिराक में हैं।अभी कल हीं सात पाकिस्तानी सेना के जवानों और आतंकी को घुसपैठ के समय मार गिराया गया है।

पाकिस्तान आरोप लगा रहा है कि भारत उसके क्षेत्र में "क्लस्टर बमों" का इस्तेमाल कर रहा है जो जनेवा संधि और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।ये आरोप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री दोनों ने लगाएं हैं।सच क्या है कोई नहीं जान सकता, मगर अपनी आत्मरक्षा में कोई भी देश किसी भी हथियार का इस्तेमाल कर सकता है।

ये मसला कितना गंभीर है कि कल छुट्टी के दिन भी गृहमंत्री अमित शाह दिनभर हाईलेवल मीटिंग करते रहे।अमित शाह की अध्यक्षता में जारी इस बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और गृहसचिव राजीव गाबा के अतिरिक्त कई सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

आज संभवतः प्रधानमंत्री हाईलेवल मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे और उसके बाद इसकी संसद में घोषणा हो सकती है।उम्मीद है आज इस रहस्य से परदा उठेगा और फिर हम जैसे पत्रकार इसकी समीक्षा करेंगे,मगर ये तो तय मानिए जो भी होगा वो कुछ बड़ा होगा,अलग हट के होगा।

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