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ऐतिहासिक "मुस्लिम महिला विवाह सरक्षण विधेयक 2019" राज्यसभा से पास,मोदी सरकार की विशेष उपलब्धि

Bhola Tiwari Jul 31, 2019, 12:49 PM IST टॉप न्यूज़
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अजय श्रीवास्तव

कल भारतीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक दिन था,राज्यसभा में विपक्षी दलों के कमजोर और लचर विरोध के बावजूद "तत्काल तीन तलाक विधेयक" 84 के मुकाबले 99 वोटों से पारित हो गया।गौरतलब है कि यह विधेयक लोकसभा में भारी बहुमत से पारित हो गया था।चूँकि राज्यसभा में सरकार बहुमत से थोड़ा पीछे है मगर सटीक रणनीति और पाँच कांग्रेसी सांसदों के संभावित बगावत से नरेंद्र मोदी सरकार की राहें आसान हो गई।आपको बता दें मतविभाजन में गैरहाजिर रहे करीब 20 विपक्षी सदस्यों में से पाँच कांग्रेस के हैं,जिन्होंने अपने पूर्वजों के ऐतिहासिक भूल का परिमार्जन कर लिया है, यद्यपि पार्टी व्हिप के उल्लंघन से उनकी सदस्यता खतरे में पड़ेगी मगर "मोदी है तो मुमकिन है" फार्मूला इस समय सुपरहिट है और उससे सबकुछ मुमकिन है।

हम इतिहास के किताबों में झांकें तो हर लोकप्रिय कानून का समाज के बहुत से तबके में विरोध हुआ है और अभी भी हो रहा है।विरोध का मतलब ये नहीं है कि विरोधी देशद्रोही है या अनपढ़ है।आप सतीप्रथा, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को देख सकते हैं।राजा राममोहन राय और उनके जैसे बहुत से समाज सुधारकों के वर्षों प्रयास के बाद इन कुरितियों पर काबू पाया जा सका था,वैसे हीं तत्काल तीन तलाक पर हुआ।दरअसल ये मुद्दा समाज के एक वर्ग विशेष की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है और उनके कुछ बड़े लोग उसकी गलत ब्याख्या कर समाज के अंदर एक लाईन खींच दी है,जो महिलाओं के उत्पीड़न की मुख्य वजह बन गई है।

सरकार को बहुत संयम और विवेक से इस मसले पर आगे कदम बढ़ाना होगा,भडकाऊ बयानों से काम नहीं बनने वाला।गिरिराज सिंह जैसे बड़बोले मंत्रियों की जुबान पर ताला लगना बेहद जरूरी है,मुझे उम्मीद है सरकार इस विषय पर गौर करेगी।ओवैसी जैसे लोगों को बयानों में संयम रखना होगा नहीं तो कब चिंगारी शोला बनकर उभर जाती है पता नहीं लगता, वैसे भी हमारा इतिहास दंगों से भरा पडा है।

मैं नहीं मानता सभी मुसलमान इस कानून के विरोधी हैं,25% से ये संख्या अधिक नहीं है, जिन्हें प्यार और परस्पर सहयोग से समझाया जा सकता है।किसी की भी बहन,बेटी को कोई एक झटके में तीन तलाक बोलकर छोड़ दे ये गलत है।माँ-बाप इतने लाड-प्यार से अपनी बच्ची की परवरिश करता है और उसके निकाह के बाद उसका शौहर तीन तलाक बोलकर कैसे उससे छुटकारा पा सकता है?

इस कानून के मुताबिक तत्काल तीन तलाक देने वाले पति को तीन साल की सजा और जुर्माना दोनों सहना होगा।अब पीडिता या परिवार के सदस्य एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।एफआईआर दर्ज होने के बाद बिना वारंट के भी गिरफ्तारी हो सकती है।अब पुलिस जमानत नहीं दे सकती, ये अधिकार मजिस्ट्रेट को सौंप दिया गया है, जो अपने स्वविवेक से फैसला करेगा कि जमानत दी जाय या नहीं।मजिस्ट्रेट को पति-पत्नी में सुलह करवाकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार दिया गया है।तलाक पर फैसला होने तक बच्चा माँ के संरक्षण में रहेगा और पति को गुजाराभत्ता देना होगा।

तत्काल तीन तलाक समाज की कुरीति है और इसे बदलने की सख्त जरूरत है, नहीं तो हर साल देश भर में लाखों लड़कियाँ अपने शौहर के जुल्म-ओ-सितम का शिकार होती हैं और उसके साथ उसका अबोध बच्चा भी इसका शिकार होता है।

मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिये एक महत्वपूर्ण भाषण की याद आ गई।उन्होंने कांग्रेस के सांसदों की तरफ देखते हुए कहा था कि इतिहास ने शाहबानो प्रकरण के षमय अपनी भूल को सुधारने आ मौका दिया था मगर तुष्टिकरण की राजनीति के कारण आप ऐसा नहीं कर सके।जबकि सुप्रीमकोर्ट आपके साथ था।आज एक बार फिर मौका आया है अपनी भूल सुधार का।गौरतलब है कि उस समय राजीव गांधी की सरकार थी और वे शहाबुद्दीन और एमजे अकबर के दवाब में आकर संसद में कानून बनाकर सुप्रीमकोर्ट के आदेश को पलट दिया था।केन्द्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने इसी मुद्दे पर अपना इस्तीफा राजीव गांधी को सौंप दिया था।

मुझे उम्मीद हीं नहीं पूर्ण विश्वास है कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर अपने विवादित मंत्रियों के भडकाऊ बयानों पर पाबंदी लगाएगी, नहीं तो इस जीत का जायका खराब हो सकता है।ये ऐतिहासिक विधेयक है और देश के सभी नागरिकों को इसका सम्मान करना चाहिए जो हमारी बहन-बेटियों के हक में है।अब कोई दुबई में बैठकर मोबाइल फोन पर तीन तलाक नहीं दे पाएगा और देगा तो उसकी जगह जेल होगी।

अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं को अपने समाज की महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडा होना होगा, नहीं तो कल समाज आपको हीं कुसूरवार ठहरायेगा और आपके पास जवाब नहीं होगा।समय के साथ बदलना हीं सभ्य समाज का लक्षण है, जो दकियानूसी विचारों को डिफेंड करेगा,समय के साथ परिवर्तनशील नहीं होगा,समय उसे डस्टबिन में स्वतः डाल देगा।आज समाज कहाँ से कहाँ जा रहा है और हम पूरानी दकियानूसी बातों में उलझे पड़ें हैं।आप ये बोलकर बच नहीं सकते कि इस्लाम में निकाह कांन्टैक्ट होता है, न कि जन्मों जन्मों का बंधन।हजरत एक जिंदगी का तो किसी को पता नहीं आप सात जन्मों का उदाहरण देकर बच नहीं सकते।

ऐतिहासिक सफलता की बधाई स्वीकार करें नरेंद्र मोदी सरकार।

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