ब्रेकिंग न्यूज़
BIG NEWS : आतंकी संगठन अल-कायदा मॉड्यूल का  भंडाफोड़, 9 आतंकी गिरफ्तार         BIG NEWS : पश्चिम बंगाल और केरल में एनआईए की छापेमारी, अल-कायदा के नौ आतंकी गिरफ्तार         BIG NEWS : दिशा सालियान के साथ चार लोगों ने कियारेप !         अनिल धस्माना को NTRO का बनाया गया अध्यक्ष         जहां शिवलिंग पर हर बारह साल में गिरती है बिजली         BIG NEWS : पाकिस्तान की नई चाल, गिलगित-बल्तिस्तान को प्रांत का दर्जा देकर चुनाव कराने की तैयारी         BIG NEWS : सहायक पुलिस कर्मियों पर लाठीचार्ज, कई घायल, आंसू गैस के गोले छोड़े         BIG NEWS : सर्दी के मौसम में लद्दाख में मोर्चाबंदी के लिए सेना पूरी तरह तैयार          “LAC पर चीन को भारत के साथ मिलकर सैनिकों की वापसी प्रक्रिया पर काम करना चाहिए” :  विदेश मंत्रालय प्रवक्ता         BIG NEWS : जम्मू कश्मीर पहुंचे सेनाध्यक्ष ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा, उपराज्यपाल से भी की मुलाकात         BIG NEWS : 'मैं भी मारा जाऊंगा'         एक ऐसा मंदिर जहां पार्वतीजी होम क्वारैंटाइन में और महादेव कर रहे हैं इंतजार         अदृश्य भक्त करता है रोज भगवान शिव की आराधना , कौन है वो ?         BIG NEWS : सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ठिकाना ढूंढ निकाला, भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद         BIG NEWS : “भारत बड़ा और कड़ा क़दम उठाने के लिए तैयार”: राजनाथ सिंह         BIG NEWS : श्रीनगर एनकाउंटर में तीन आतंकियों को मार गिराया         इलाहाबाद में एक मंदिर ऐसा, जहां लेटे हैं हनुमान जी         यहां भगवान शिव के पद चिन्ह है मौजूद         BIG NEWS : दोनों देशों की सेनाओं के बीच 20 दिन में तीन बार हुई फायरिंग         BIG NEWS : मॉस्को में विदेश मंत्रियों की मुलाकात से पहले पैंगोंग सो झील के किनारे चली थी 100-200 राउंड गोलियां- मीडिया रिपोर्ट         BIG NEWS : पाकिस्तानी सेना ने सुंदरबनी सेक्टर में की गोलाबारी, 1 जवान शहीद         CBI को दिशा सलियान की मौत की गुत्थी सुलझाने वाले कड़ी की तलाश !         हर साल बढ़ जाती है इस शिवलिंग की लंबाई, कहते हैं इसके नीचे छिपी है मणि         कलयुग में यहां बसते हैं भगवान विष्णु...         BIG NEWS : देश से बाहर प्याज निर्यात पर प्रतिबंध         BIG NEWS :  LAC पर हालात बिल्कुल अलग, हम हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार : राजनाथ सिंह          BIG NEWS : गांदरबल में हिज्बुल मॉड्यूल का पर्दाफाश, हथियारों के साथ 3 हिज्बुल आतंकी गिरफ्तार         भाषा के सवाल को अनाथ छोड़ दिया गया है ...         कैलाश पर्वत श्रृंखला के पहाडि़यों पर कब्जा करने के बाद उमंग में नहा गए सेना के जवान         शिव के डमरू से बंधे हैं स्वरनाद और सारे शब्द          BIG NEWS : कैलाश पर्वत-श्रृंखला पर भारत का कब्जा         BIG NEWS : चीन कर रहा भारत की जासूसी, लिस्ट में पीएम नरेंद्र मोदी समेत कई बड़ी हस्तियों के नाम शामिल         सुरंगों के जरिए आतंकवादी कर रहे हैं घुसपैठ, हथियार सप्लाई के लिए पाकिस्तान कर रहा ड्रोन का इस्तेमाल : डीजीपी दिलबाग सिंह         BIG NEWS : दिल्ली दंगे मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, JNU के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद गिरफ्तार        

प्रकृति के मित्र हैं गिद्ध

Bhola Tiwari Jul 22, 2019, 5:00 AM IST टॉप न्यूज़
img


 कबीर संजय

केवल तीन दशकों में गिद्धों की 99.95 फीसदी आबादी साफ हो गई। अस्सी के दशक में भारत में इनकी संख्या चार करोड़ से ज्यादा थी। लेकिन, अब सिर्फ 19 हजार गिद्ध ही बचे हैं। बीते शुक्रवार को वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संसद में इसकी जानकारी दी। 

साहित्य और मुहावरों में भले ही गिद्धों को विलेन की भांति प्रस्तुत किया जाता रहा हो लेकिन सच्चाई यह है कि गिद्ध प्रकृति के मित्र हैं। वे मरे हुए जीवों को खाकर साफ कर देते हैं। शवों की साफ-सफाई का काम उनसे बेहतर कोई नहीं करता। बड़े अफसोस की बात है कि वे बड़ी तेजी से समाप्त होते जा रहे हैं। 

सबसे पहले नब्बे के दशक के अंतिम दौर में यह गौर किया गया कि गिद्धों की संख्या कम होती जा रही है। लेकिन, जब तक उनके कारणों का पता लगता और बचाव के उपाय किए जाते, उनकी लगभग आबादी साफ हो गई। जानवरों को दी जाने वाली डाइक्लोफेनॉक दवा के चलते गिद्धों के गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं। दरअसल, यह दवा पशुओं को दी जाती थी। यह दवा लेने वाले पशु की मौत हो जाए और उस पशु का शव गिद्ध खाए, तो उसकी जान पर भी संकट आ जाता था। 

बाद में डाइक्लोफेनॉक दवा का पशुओं में इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया। इसकी बजाय अब मेलाक्सीकम दवा का इस्तेमाल किया जाता है। यह दवा गिद्धों के लिए हानिकारक नहीं हैं। लेकिन, जब तक इन उपायों पर काम किया जाता गिद्ध समाप्त होने की कगार पर पहुंच चुके थे। 

प्रकाश जावड़ेकर द्वारा संसद में दी गई सूचना के मुताबिक वर्ष 2015 में किए गए सर्वे के मुताबिक भारत में फिलहाल सफेद पूंछ वाले छह हजार गिद्ध, लंबी गर्दन वाले 12 हजार गिद्ध और बेलनाकार गर्दन वाले एक हजार गिद्ध बचे हुए हैं। 

ईकोसिस्टम से गिद्धों के गायब होने के तमाम असर आसानी से देखे जा सकते हैं। जगह-जगह पर पशुओं के शव सड़ते रहते हैं। इससे हानिकारक तत्व आसपास की प्रकृति और पर्यावरण को दूषित करते हैं। ऐसे सड़ते हुए मांस को खाकर गीदड़ और कुत्ते पहले से ज्यादा हिंसक और पागल भी हो रहे हैं। इनके काटने के चलते रेबीज के इलाज का बोझ भी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 

गिद्ध के गायब होने की बहुत बड़ी कीमत चुकाई जा रही है। वह भी सिर्फ जरा सी लापरवाही, असावधानी या दूरदर्शिता के अभाव के चलते। 

(बेलनाकार गर्दन वाले गिद्ध की फोटो इंटरनेट से साभार। इस गिद्ध की संख्या एक हजार ही रह गई है। जबकि, बचपन में यह अपने पंखों में हमारी पतंगे लपेट कर उड़ जाता था।)

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links