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निन्नी को अपने हरम में लाना चाहता था गयासुद्दीन

Bhola Tiwari Jul 19, 2019, 5:32 AM IST टॉप न्यूज़
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गुजरी रानी मृगनयनी की कहानी

एसडी ओझा

निन्नी अपने भाई अटल के साथ ग्वालियर के नजदीक राई गाँव में रहती थी । माँ बाप मर चुके थे । केवल दोनों भाई बहन रह गये थे । ये आपस में मिल जुलकर रहते थे । एक और लड़की थी । उसका नाम था साखी । साखी निन्नी की सहेली थी । निन्नी गुजर थी जबकि साखी अहीर बिरादरी से थी , पर दोनों की गजब की दोस्ती थी । दोनों एक दुसरे के बिना नहीं रह सकतीं थीं । निन्नी का रुप लावण्य अद्भुत था । उसकी सुंदरता के चर्चे ग्वालियर, चित्तौड़, अहमदाबाद और दिल्ली तक फैला हुआ था । निन्नी को शिकार का भी तगड़ा शौक था । वह अपनी सहेली साखी के साथ घने जंगलों में जाकर मनोवांछित शिकार किया करती थी । उन दिनों दिल्ली की तख्त पर गयासुद्दीन खिलजी का राज था । गयासुद्दीन निन्नी को अपने हरम में लाने के लिए लालायित था ।

गयासुद्दीन खिलजी ने निन्नी को प्रभावित करने के लिए एक नट नटी दम्पति को भेजा । नट नटी राई गांव में जाकर गयासुद्दीन का यशोगान करने लगे । वे निन्नी के घर भी आए । निन्नी के आगे भी उन नट नटी ने गयासुद्दीन की वीरता और शौर्य के बहुत बहुत कसीदे पढ़े थे, लेकिन निन्नी पर इसका कुछ प्रभाव नहीं पड़ा । कहते हैं कि तंग आकर गयासुद्दीन खिलजी ने निन्नी के अपहरण की भी योजना बनाई थी । उसने इस काम के लिए हथियारों से लैस दो घुड़सवार भेजे थे। घुड़सवारों ने निन्नी को उसकी सहेली साखी के साथ जंगल में घेर लिया था । निन्नी जंगल में शिकार करने आयी थी । इसलिए उसके पास भी हथियार था । उस चपल चटक चतुर बालिका ने उन दोनों घुड़सवारों को मार गिराया था । तब से गयासुद्दीन ने निन्नी को अपने हरम में लाने का विचार त्याग दिया ।

एक बार ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर के पास राई गांव का पुजारी पहुँचा । पुजारी को राई में एक मंदिर बनवाया था । इस नेक कार्य के लिए उसे आर्थिक मदद की दरकार थी । जब राजा को पता चला कि पुजारी निन्नी के गांव से आया है तो उन्होंने तुरंत पुजारी को आर्थिक मदद प्रदान कर दी थी । तय हुआ कि मंदिर के निर्माण के बाद प्राण प्रतिष्ठा के दिन राजा मानसिंह तोमर खुद उस आयोजन में भाग लेंगे । जब मंदिर का निर्माण पूरा हो गया तो राजा प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उपस्थित हुए । पूरे गांव को वंदनवार से सजाया गया था । राजा मान सिंह तोमर के ऊपर पुष्प वर्षा हुई थी । निन्नी ने स्वंय आगे आकर राजा की आरती उतारी । पुजारी ने निन्नी का परिचय कराया । राजा उसके रुप लावण्य पर मोहित हो गये । मूर्ति का जलाभिषेक पास में बहती सांक नदी के जल से हुआ था ।

दूसरे दिन राजा ने निन्नी के शिकार कौशल का प्रदर्शन देखा । उसने एक अरने भैंसे का सींघ पकड़कर आनन फानन में जमीन पर गिरा दिया था । निन्नी का रुप लावण्य और शिकार कौशल से प्रभावित राजा ने तत्क्षण हीं निन्नी के आगे विवाह का प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया । निन्नी ने विनम्रता से कहा - महाराज यह मेरा अहो भाग्य होगा कि आप जैसे शूर वीर से मेरा नाता जुड़ रहा है , लेकिन मेरे बचपन से हीं सांक नदी जुड़ी हुई है । मैं इसी का पानी पीती हूँ । यदि आप सांक का पानी अपने महल तक पहुँचा सकें तो मैं आपसे विवाह करने के लिए सहर्ष तैयार हूँ । राजा ने निन्नी को ऐसा करने का वचन दिया और ग्वालियर लौट गये ।

निन्नी के भाई अटल ने यथाशक्य बहन की शादी के लिए दिन रात एक कर तैयारी की । शादी धूमधाम से हुई । राई गांव के लोगों ने भी इस विवाह में काफी मदद की । विदाई के समय निन्नी अपने भाई से लिपटकर बहुत रोई । उसने भाई से कहा था - "भईया मैं तो जा रही हूँ । मेरे बाद मेरी सहेली साखी तुम्हारा ख्याल रखेगी । आप इससे शादी जरुर कर लेना ।" अटल व साखी की शादी में एक अड़चन थी । साखी अहीर विरादरी की थी तो अटल गुजर था । इसका भी तोड़ निकाला गया । अटल को गाँव वालों को भोज भात देना पड़ा । तब कहीं अटल और साखी की शादी सम्पन्न हुई । साखी को भी एक आसरा मिल गया । साखी के माता पिता दोनों मर चुके थे ।

ग्वालियर पहुँचकर राजा मानसिंह तोमर ने सबसे पहले सांक नदी को राई से ग्वालियर तक लाने के लिए अपने सभासदों की सभा की । उस सभा में जाने माने तकनीकी जानकार भी उपस्थित थे । जानकारों ने बताया कि ग्वालियर राजमहल तक राई से सांक नदी का पानी लाना मुश्किल है । उतनी ऊंचाई पर पानी चढ़ाना नितांत हीं मुश्किल होगा । फिर क्या था । किले की तलहटी में एक महल का निर्माण कराया गया , जिसे निन्नी के जाति पर "गुजरी महल" कहा गया । गुजरी महल तक सांक नदी का पानी पहुँच गया था । राजा के महल से गुजरी महल तक एक सुरंग का निर्माण हुआ था , जिसके जरिए राजा निन्नी से मिलने आते थे । राजा ने निन्नी को एक नया नाम दिया- मृगनयनी ।

ग्वालियर पहुँच कर मृगनयनी ने चित्रकला और संगीत में प्रवीणता प्राप्त की । डा रामकुमार वर्मा ने " मृगनयनी " नाम से एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखा है , जिसमें निन्नी का बहुत सुंदर चरित्र चित्रण किया है । मृगनयनी ने राजा से अनुरोध कर बड़ी रानी के पुत्र विक्रम सिंह का राज्य अभिषेक करवाया था । उसने अपने पुत्रों के लिए कुछ नहीं मांगा । वह कैकेयी नहीं बनना चाहती थी । मृगनयनी से पैदा हुए बच्चे तोमर वंश के नहीं कहलाए । ये तोंगर कहलाए । तोंगर वंश के लोग आज भी हैं जो गाहे बेगाहे तोमर वंश के क्षत्रियों की हर सम्भव मदद करते हैं । आखिर खून का रिश्ता जो है ।

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