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BIG STORY : काबुल में क्या कर रहा है ISI चीफ !

Bhola Tiwari Sep 05, 2021, 8:34 AM IST टॉप न्यूज़
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सिद्धार्थ सौरभ

नई दिल्ली : पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख के काबुल दौरे से अब साफ हो गया कि पाकिस्तान किस कदर अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार में अपनी पैठ बढ़ाने की भरसक कोशिशें कर रहा है। इस बात के कई सबूत मिले हैं कि पाकिस्तानी सेना पंजशीर पर कब्ज़ा जमाने में भी तालिबान के साथ मिलकर लड़ रही है।

जी हां, तालिबान की ओर से अफगानिस्तान में सरकार बनाने की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद शनिवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युद्ध से थके हुए देश में सब ठीक हो जाएगा। हालांकि आईएसआई प्रमुख के दौरे की घोषणा नहीं की गई थी। पाकिस्तान ऑब्जर्वर अखबार की खबर के मुताबिक इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हमीद के नेतृत्व में वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारियों का एक शिष्टमंडल आगामी तालिबान सरकार से बातचीत के लिए काबुल पहुंचा है।

मीडिया में एक वीडियो आया है, जिसमें पत्रकार उनसे ये सवाल पूछते दिखते हैं कि क्या आप तालिबान के किसी वरिष्ठ नेता से मुलाकात करेंगे? इसपर आईएसआई प्रमुख ने कहा कि ये स्पष्ट नहीं ह। अफगानिस्तान के हालात के बारे में पूछे जाने पर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद ने कहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। इससे पहले पाकिस्तान ऑब्जर्वर ने खबर दी थी कि आईएसआई के प्रमुख तालिबान के शीर्ष अधिकारियों और कमांडरों से मुलाकात कर सकते हैं। खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और अन्य मुद्दों पर तालिबान के नेतृत्व के साथ बातचीत की जाएगी।


खैर, काबुल में बनने वाली तालिबानियों की सरकार तो अफगानिस्तान की होगी, लेकिन उसके कंधे पर हाथ अमेरिका का होगा। यह हाथ सीधे तौर पर अफगानिस्तान की सरकार में दखल तो नहीं देगा लेकिन अमेरिका को जो करना होगा वह पाकिस्तानी और अफगानी आतंकियों के माध्यम से करता रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है अमेरिका अफगानिस्तान की जमीन को नहीं छोड़ पा रहा है। क्योंकि इसमें उसके मध्य एशिया के बहुत से हित छुपे हुए हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अफगानिस्तान में बनने वाली तालिबानियों की सरकार में अमेरिका की पूरी तक दखलअंदाजी होगी। बस इसका रास्ता पाकिस्तान होकर ही आएगा।

दरअसल तालिबानी नेता अब्दुल गनी बरादर को अमेरिका की गुजारिश पर ही पाकिस्तान की जेल से रिहा किया गया था। आज अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का सुप्रीम नियुक्त किया जा रहा है। विदेश मामलों के जानकार कर्नल (रि.) जीएम गुहा कहते हैं कि अफगानिस्तान में अमेरिका का दखल उसे मध्य और दक्षिण एशिया में हमेशा से मजबूती प्रदान करता रहा है। यही वजह है कि अफगानिस्तान से जाने के बाद भी अमेरिका इस इलाके से दूर नहीं होना चाहेगा। क्योंकि अफगानिस्तान के साथ-साथ अमेरिका की प्रमुख पसंद पाकिस्तान ही है।

कर्नल गुहा कहते हैं चूंकि अफगानिस्तान से आधिकारिक तौर पर अमेरिका विदा हो चुका है इसलिए वह पाकिस्तान के कंधे पर बंदूक रखकर अफगानिस्तान की सत्ता को चलाता रहेगा। इसकी भूमिका पहले ही बन चुकी है। वह बताते हैं जिस तरीके से अब्दुल गनी बरादर को अफगानिस्तान का सबसे बड़ा नेता चुना जा रहा है उसमें अमेरिका की शह पर पाकिस्तान का सबसे बड़ा योगदान है। क्योंकि अमेरिका से शांति समझौते के लिए अब्दुल गनी बरादर को पाकिस्तान की जेल से अमेरिका के कहने पर ही छोड़ा गया था। उसके बाद अब्दुल गनी बरादर ने अपने आतंकियों और अमेरिकी सैनिकों के बीच शांति बहाली के लिए स्थापित किए जाने वाली सभी शर्तों को माना भी।

विशेषज्ञों का कहना है कि दरअसल अमेरिका अफगानिस्तान को भौगोलिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण मानता है। साउथ एशिया मामलों के जानकार डॉक्टर अनुज भट्ट बताते हैं कि अफगानिस्तान में रहकर अमेरिका, चीन, रूस, पाकिस्तान और भारत को बहुत बारीकी से नजर रखेगा। क्योंकि अब यहां पर अमेरिकी फौजी और अमेरिका के सीक्रेट एजेंट खुले तौर पर मौजूद नहीं रहेंगे। ऐसे में अमेरिका को डर है कि कहीं चीन रूस और भारत मिलकर उसके सारे खेल को ना बिगाड़ दें। डॉक्टर भट्ट का कहना है कि अमेरिका इस बात से भी डरा हुआ है कि उसकी अनुपस्थिति में अगर चीन, अफगानिस्तान समेत आसपास के मुल्कों पर हावी हो गया तो भी उसका नुकसान होगा और अगर रूस भारी पड़ा तो भी उसका नुकसान होगा। विशेषज्ञों का कहना है क्योंकि भारत की 'वेट एंड वॉच' रणनीति से अमेरिका अभी भी घबराया हुआ है। अमेरिका चाहता है कि भारत अफगानिस्तान को लेकर अपनी कूटनीतिक रणनीति को सामने लाएं ताकि भारत का अफगानिस्तान के लिए रुख स्पष्ट समझा जा सके।

कहने को तो अमेरिका अफगानिस्तान में तालिबानियों की सत्ता बना कर पूरे तरीके से गुणाभाग करने में जुड़ा हुआ है, लेकिन पाकिस्तान का रोल खुलकर सामने आने लगा है। अफगानिस्तान में सरकार गठन से पहले शनिवार को आईएसआई प्रमुख फैज हमीद काबुल पहुंच गए। विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि फैज हमीद अफगानिस्तान में सरकार गठन से लेकर होने वाले मंत्रियों के चयन से लेकर अन्य लोगों को दी जाने वाली जिम्मेदारियों की पूरी फेहरिस्त लेकर पहुंचे हुए हैं। यह लिस्ट पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान को मुहैया कराई जा रही है, ताकि उसके कहने पर ही वहां पर तालिबान के आतंकियों को कैबिनेट में शामिल किया जा सके। विदेशी मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है इनमें कई ऐसे लोगों के नाम भी हैं जो पाकिस्तान से लेकर अफगानिस्तान की जेलों में लंबे समय तक बंद रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा मुहैया कराई गई लिस्ट में जिन आतंकियों के नाम हैं वह आईएसआई से लेकर सीआईए की खुफिया एजेंसी से जुड़े हुए लोग हैं।

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