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Bhola Tiwari Jul 10, 2019, 7:38 AM IST टॉप न्यूज़
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 ध्रुव गुप्त

पाकिस्तान के जाने-माने समाजसेवी 92 साल के अब्दुल सत्तार ईधी का करीब 2 साल पहले कराची में निधन मानवता के लिए एक बड़ी क्षति थी। वे मानवता की सेवा के लिए विश्व भर में विख्यात ईधी फाउण्डेशन के अध्यक्ष थे। भारत विभाजन के बाद गुजरात से पाकिस्तान के कराची में जा बसे ईधी साहब ने साल 1951 में पांच हज़ार की जमा पूंजी से एक डाक्टर की मदद से एक छोटी-सी डिस्पेंसरी और एम्बुलेंस सेवा शुरू की। काम कुछ चल निकला तो पत्नी बिलकिस बानो के साथ उन्होंने ईधी फाउंडेशन की स्थापना की। यह फाउंडेश अपने हज़ारों एम्बुलेंसों के साथ चौबीसों घंटे मुफ्त सेवा देने वाली आज दुनिया की सबसे बड़ी एम्बुलेंस सेवा है। यह गरीबों को निःशुल्क चिकित्सा, अनाथ बच्चों और स्त्रियों के लिए आश्रय और नशेड़ियों के लिए सुधार गृह उपलब्ध कराता है।अपनी सेवा के छह दशकों में ही इसने बीस हज़ार लावारिस नवजात बच्चों को परवरिश, पचास हज़ार अनाथों को आश्रय और शिक्षा एवं चालीस हज़ार से ज्यादा नर्सों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है।ईधी साहब को पाकिस्तान के सबसे सम्मानित नागरिक का दर्ज़ा हासिल है जिन्हें 'द हफिंग्टन पोस्ट' ने दुनिया के महानतम जीवित मानवसेवी का नाम दिया। इतना सब कुछ हासिल होने के बावज़ूद सादगी ऐसी कि दो जोड़े कपड़ों और एक जोड़ी चप्पल में सालो साल गुज़ार देते थे ! उन्हें लेनिन शान्ति पुरस्कार, रमन मैगसेसे पुरस्कार, पाल हैरिस फेलो रोटरी इन्टरनेशनल फाउन्डेशन सम्मान और अन्तर्राष्ट्रीय बालजन पुरस्कार हासिल हुए थे। भारत में वे तब चर्चा में आए जब यहां से भटककर मूकबधिर भारतीय बच्ची गीता 2003 में पाकिस्तान सीमा पर पहुंच गई। ईधी साहब ने उसे पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया और बड़ी हो जाने पर भारत के हवाले किया। पिछले साल गीता जब भारत लौटी तो उसके साथ ईधी फाउंडेशन के सदस्य भी आए थे। गीता का एक दशक से भी ज्यादा ख्याल रखने के लिए प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईधी फाउंडेशन को एक करोड़ रुपये का अनुदान देने की घोषणा की. लेकिन ईधी साहब ने उन्हें धन्यवाद देते हुए सेवा के लिए कोई अनुदान स्वीकार करने से मना कर दिया। उन्होंने एक बार कहा था-'मैं पढ़ा-लिखा तो नहीं हूं, लेकिन मार्क्स और लेनिन की किताबें पढ़ी हैं। कर्बला वालों की ज़िन्दगी भी पढ़ी है। मैं तुम्हें बताता हूँ कि असल जंग किसकी है। अस्ल जंग अमीर और ग़रीब की है; ज़ालिम और मज़लूम की है।'

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