ब्रेकिंग न्यूज़
हम छीन के लेंगे आजादी....         माल महाराज के मिर्जा खेले होली         भारत और अमेरिका में 3 अरब डॉलर का रक्षा समझौता         सीएए भारत का अंदरुनी मामला : डोनाल्‍ड ट्रंप         लड़खड़ाई धरती पर सम्भलकर आगे बढ़ गए हिम्मती लोग          शाहीन बाग : उपाय क्या है?          भारत में दक्षिणपंथी विमर्श एक चिंतनधारा कम प्रॉपेगेंडा ज्यादा          मिलकर करेंगे इस्लामी आतंकवाद का सफाया : ट्रंप         मोदी ट्रंप की यारी : भारत की तारीफ, आतंक पर PAK को नसीहत         भारत और अमेरिका रक्षा सौदे में बड़ा डील करेगा : डोनाल्ड ट्रंप         "एक्टिव फार्मास्युटिकल इनग्रेडिएंट"(एपीआई) के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर है भारत         कुछ ही देर में प्रेसिडेंट ट्रंप पहुंच रहे हैं इंडिया         अनब्याही माँ : चपला के बहाने इतिहास को देखा          संभलने का वक्त !          अनब्याही माताएं : नरमुंड दरवाजे पर टांगकर जश्न मनाया करते थे....         ताकि भाईचार हमेशा बनी रहे!          अब शत्रुघ्न सिन्हा पाकिस्तान के राष्ट्रपति से मिलकर कश्मीर मुद्दे पर सुर में सुर मिलाया         सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों को मार गिराया, सर्च ऑपरेशन जारी         खून बेच कर हेरोइन का धुआं उड़ाते हैं गढ़वा के युवा         कब होगी जनादेश से जड़ों की तलाश          'नसबंदी का टारगेट', विवाद के बाद कमलनाथ सरकार ने वापस लिया सर्कुलर         पीढ़ियॉं तो पूछेंगी ही कि गाजी का अर्थ क्या होता है?         मातृ सदन की गंगा !         ओवैसी की सभा में महिला ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए         एक बार फिर चर्चा में हैं सामाजिक कार्यकर्ता "तीस्ता सीतलवाड़",शाहीनबाग में उन्हें औरतों को सिखाते हुए देखा गया         कनपुरिया गंगा, कनपुरिया गुटखा, डबल हाथरस का मिष्ठान और हरजाई माशूका सी साबरमती एक्सप्रेस..         शाहीन बाग में वार्ता विफल : जिस दिन नागरिकता कानून हटाने का एलान होगा, हम उस दिन रास्ता खाली कर देंगे         फ्रांस में विदेशी इमामों और मुस्लिम टीचर्स पर प्रतिबंध         'राष्ट्रवाद' शब्द में हिटलर की झलक, भारत कर सकता है दुनिया की अगुवाई : मोहन भागवत         आतंकवाद के खिलाफ चीन ने पाकिस्तान का साथ छोड़ा         दिमाग में गोबर, देह पर गेरुआ!          त्राल में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया         CAA-NRC-NPR के समर्थन में रिटायर्ड जज और ब्यूरोक्रेट्स ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र         अनब्याही माँ : चपला के बहाने इतिहास को देखा          भारतीय पत्रकारिता को फफूंदी बनाने वाली पत्रकार यूनियनें..         ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ भारत बना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था        

राजनीति के आगे मजबूर

Bhola Tiwari Jul 09, 2019, 7:30 AM IST टॉप न्यूज़
img

 दिनेश मिश्रा

बिहार की बागमती नदी पर तटबंधों का निर्माण तीन स्तरों पर हुआ है। सबसे पहले 1956 में हायाघाट से लेकर बदलाघाट तक तटबंध बना जो कोसी तटबंधों के निर्माण की देखा-देखी स्थानीय नेताओं के दबाव के कारण बना। कोसी पर तटबंध उस समय बन रहा था और गंडक परियोजना को हाथ में लेने पर गंभीर विमर्श चल रहा था। बागमती किसी गिनती में ही नहीं थी। तब बागमती को घेरने की मुहिम चलाई गई ताकि उस क्षेत्र के लोगों को लगे कि उस क्षेत्र के नेतागण भी सरकार से कुछ काम करवा सकते हैं। इंजीनियर तबका इसके पक्ष में नहीं था मगर राजनीति के आगे मजबूर था।

तब एक तर्क खोजा गया कि बागमती एक चंचल नदी है और ऐसी धारा बदलने वाली नदी पर तटबंध बनाना उचित नहीं होगा। लेकिन कहा गया कि हायाघाट से बदलाघाट तक नदी की धारा स्थिर है अत: नदी की उस लम्बाई में तटबंध बनाए जा सकते हैं और वह बना भी दिये गए। इसका लाभ नेताओं को मिला।

फिर आया 1970 का दशक जब तपबंधों का बाजार जम चुका था और उसमें आम जनता को छोड़कर बाकी सभी संबंधित पक्षों को अपना-अपना फ़ायदा दिखाई पड़ने लगा था। तब बागमती के ऊपरी क्षेत्र में सीतामढ़ी जिले में नेपाल से सटे ढेंग से लेकर रुन्नीसैदपुर तक तटबंध बनाए गये और इसमें 1975-77 में लगी एमरजेंसी ने बहुत मदद की। डर के मारे इस तटबंध का विरोध हो ही नहीं सकता था। 

लेकिन रुन्नीसैदपुर से हायाघाट तक तटबंध फिर भी नहीं बना क्योंकि इंजीनियरों का तब भी यह मानना था कि इस लंबाई में नदी एक ऐसे इलाके से होकर गुजरती है जिसका आकार तश्तरी जैसा है और ऐसी जगह में नदी पर तटबंध बनाना उचित नहीं होगा। ऐसा करने से जल-जमाव की भीषण समस्या पैदा होगी और बीच का क्षेत्र गहरा होने के कारण तटबंध बहुत ऊंचा होगा जिसका रख-रखाव कठिन होगा। नदी की धारा तो यहां अस्थिर है ही।

2007 में यह तश्तरी का आकार भी सरकार के अनुसार बदल कर सपाट हो गया, नदी की धारा भी स्थिर हो गई और अब नदी बीच की इस लंबाई में भी बाँधने लायक हो गई और इस पर भारी स्थानीय विरोध के बावजूद काम शुरू कर दिया गया। न लोग मानते थे और न सरकार टस से मस होने के लिये तैयार थी। नतीजा यह हुआ कि जब सरकार मजबूत पड़ती थी तब काम चालू हो जाता था और जब जनता मजबूत पड़ती थी तो वह काम रुकवा देती थी। आज भी वही कशमकश की स्थिति बनी हुई है।

यहाँ कुछ प्रश्नों के उत्तर खोजने होंगे और कायदे से तभी काम आगे बढ़ना चाहिए।

1. क्या नदी की जो धारा 1950 और 1970 के दशक में अस्थिर थी वह 2007 में स्थिर हो गई जबकि नदियों की धारा स्थिर होने में सदियाँ गुज़र जाती हैं। यह बात इंजीनियरों और भूगर्भशास्त्रियों से बेहतर दूसरा कौन बता सकता है?

2. क्या कभी हायाघाट से लेकर बदलाघाट और ढेंग से लेकर रुन्नीसैदपुर तक बने तपबंधों की उपयोगिता का मूल्यांकन किया गया है और क्या उस रिपोर्ट को तैयार करने में स्थानीय लाभुकों से कभी मशविरा किया गया है? क्या उस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है? अगर कोई मूल्यांकन नहीं हुआ है तो क्यों नहीं हुआ और ऐसी परिस्थिति में स्थानीय लोगों की मर्जी के ख़िलाफ़ तटबंधों का निर्माण क्यों किया जा रहा है?

3. तश्तरीनुमा जमीन पर तटबंध बनाने का परिणाम क्या होगा यह किसी ने सोचा है?

4. इस क्षेत्र में या किसी भी क्षेत्र में तटबंध सुरक्षित रहेगा इसकी कोई व्यक्ति या संस्था जिम्मेदारी लेने के लिये तय्यार है?

5. क्या तटबंधों के भीतर कैद होनेवाले लोगों की सुरक्षा के लिये पुनर्वास की गृह-निर्माण के लिए दी जाने वाली सुविधा दिये जाने के अलावा और भी कोई सुविधा दिये जाने का प्रस्ताव है? उनकी खेती की जमीन के बदले जमीन दिये जाने का कोई प्रस्ताव है या नहीं?

Similar Post You May Like

Recent Post

Popular Links