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मॉब लिंचिंग का विरोध धार्मिक ऐनक लगाकर नहीं हो।

Bhola Tiwari Jul 07, 2019, 10:49 PM IST टॉप न्यूज़
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शाहनावज़ हसन( राजनीतिक संपादक) 

 नई दिल्ली :  उच्चतम न्यायालय ने मॉब लिंचिंग को एक अलग अपराध की श्रेणी में रखने की बात है और सरकार से कहा है कि इसकी रोक थाम के लिए क़ानून बने।उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि कोई नागरिक अपने हाथ में क़ानून नहीं ले सकता. ये राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि वो क़ानून व्यस्था बनाए रखें।कोर्ट ने कहा, 'कोई भी नागरिक अपने आप में क़ानून नहीं बन सकता है. लोकतंत्र में भीड़तंत्र की इजाज़त नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को सख्त आदेश दिया कि वो संविधान के मुताबिक काम करें।


पिछले दिनों सरायकेला जिला में तबरेज़ अंसारी की हत्या भीड़तंत्र द्वारा चोरी का आरोप लगाकर की गयी थी।तबरेज़ की हत्या का विरोध और हत्या का समर्थन धार्मिक आधार पर किया जारहा है ऐसा करना समाज में अराजकता को बढ़ावा देगा।तबरेज़ की हत्या को जायज़ करार देने वालों का यह तर्क है कि वह देर रात उस गांव में चोरी करने गया था इसलिये लोगों ने इसकी पिटाई की,वहीं इस हत्या के विरोध में खड़े अधिकांश लोग ऐसे हैं जो तबरेज़ की हत्या को धार्मिक ऐनक लगाकर देख रहे हैं,वे हत्या का विरोध केवल इसलिये कर रहे हैं क्योंकि तबरेज़ एक मुस्लिम युवक था। 

भीड़तंत्र को न्याय करने की छूट देना समाज मे अराजकता को बढ़ावा देगा ऐसा करने की अनुमति देकर हम एक नई परंपरा की शुरुआत करेंगे।

भीड़तंत्र द्वारा हत्या के मामले

तबरेज़ अंसारी की भीड़तंत्र द्वारा हत्या का विरोध बिलकुल जायज़ है परंतु जो लोग आज तबरेज़ अंसारी की हत्या के विरोध में खड़े हैं वे तब क्यों खामोश थे जब 18 मई 2017 को ही पूर्वी सिंहभूम ज़िले के बागबेड़ा थाना क्षेत्र में भीड़ ने बच्चा चोरी का आरोप लगाकर एक महिला समेत चार लोगों को बेरहमी से पीटा, इसमें दो सगे भाइयों, गौरव वर्मा और विकास वर्मा की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।दूसरी घटना 19 अगस्त 2017 को गढ़वा जिले के बरकोल खुर्द गांव के तेनडांड़ जंगल में भीड़ ने दस लोगों को कथित तौर पर मांस के साथ पकड़ा, उनकी पिटाई की। इनमें से रमेश मिंज नामक एक व्यक्ति की अस्पताल में मौत हो गई।तीसरी घटना 6 सितंबर 2018 को पलामू ज़िले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र में तिसिबार गांव के लोगों ने तीन लोगों को चोर बताकर इतना पीटा कि इनमें से बबलू मुसहर नामक एक व्यक्ति की मौत अगली सुबह इलाज के दौरान हो गई।भीड़तंत्र के हत्या का विरोध धार्मिक ऐनक लगाकर करना भी पूरी तरह अनुचित है।

भीड़तंत्र को न्याय करने का अधिकार किसी क़ीमत पर नहीं दिया जासकता,ऐसा करने की अनुमति देकर हम में से कोई भी सुरक्षित नहीं रह सकता।

धार्मिक ऐनक लगाकर विरोध करने वालों का उद्देश्य न्याय के नाम पर धर्म विशेष की भावना को भड़का कर इसे राजनीतिक रंग देना है।सभ्य समाज में ऐसी घटनाओं को बढ़ावा नहीं दिया जासकता।हर उस व्यक्ति को न्याय मिले जिनकी हत्या मॉब लिंचिंग से हुयी केवल तबरेज़ अंसारी ही नहीं ब्लिक गौरव वर्मा , विकास वर्मा, रमेश मिंज, बबलू मुसहर सभी को न्याय मिलना चाहिये,चाहे वह किसी भी जुर्म में पकड़े क्यों नहीं गये हों,क्योंकि किसी को भी सज़ा देने का अधिकार हमारा संविधान नहीं देता।

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