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मेरे घर के आगे कचरा मत डालो...

Bhola Tiwari Jul 07, 2019, 6:51 AM IST टॉप न्यूज़
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 कबीर संजय

रूस की राजधानी मास्को कुछ उसी तरह की समस्याओं का सामना कर रही है, जैसी कि दिल्ली की कर रही है। पूरी राजधानी परेशान है कि अपना कचरा कहां डाले। 

राजधानी दिल्ली में प्रवेश करते ही आपको कचरे के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ दिखाई पड़ेंगे। इन लैंडफिल साइट पर लगभग तीस साल से कचरा डंप किया जा रहा है। इसके चलते इनकी ऊंचाई लगातार बढ़ती जा रही है। यहां तक कि गाजीपुर लैंडफिल साइट के बारे में अनुमान है कि अगले साल तक इसकी ऊंचाई ताजमहल की ऊंचाई से भी ज्यादा हो जाएगी। भालस्वा, गाजीपुर, ओखला और नरेला-बवाना लैंडफिल साइट में दिल्ली का ज्यादातर कचरा डंप किया जाता है। इनमें नरेला-बवाना को छोड़ दिया जाए तो बाकी की लैंडफिल साइट पर कचरा डालने की मियाद लगभग पंद्रह साल पहले ही समाप्त हो गई। लेकिन, वैकल्पिक जगह का अभाव है। आखिर दिल्ली अपना कचरा कहां डाले। 

मास्को भी कुछ ऐसी समस्या का सामना कर रहा है। यूरोपियन यूनियन से अलग यहां पर भी कचरे को डंप किया जाता रहा है। इसके चलते लैंडफिल साइट भर चुके हैं। वर्ष 2012 में हुई वर्ल्ड बैंक की स्टडी के मुताबिक यूरोपियन यूनियन के देश औसतन 60 फीसदी तक कचरे को रीसाइकिल करते हैं। जबकि, रूस सिर्फ चार फीसदी कचरे को रीसाइकिल करता है। रूस एक बड़े विस्तार वाला देश है। पहले समझा जाता रहा होगा कि जगह की तो कोई कमी है नहीं। इसका दुष्परिणाम यह है कि यहां पर लगभग स्विटजरलैंड के क्षेत्रफल के बराबर जमीन पर कचरा डंप किया जाता है। 

जो कचरा डंप किया जाता है, उसके सड़ने से मीथेन जैसी खतरनाक गैस निकलती है। इसके सड़ने से लीचेट निकलता है जो रिस-रिसकर भूमिगत जल को प्रदूषित करता है। कचरे के पहाड़ में लगने वाली आग पूरे वातावरण को प्रदूषित कर देती है। यह वह समस्याएं हैं जो कचरे के पहाड़ों के चलते पैदा होती है। दिल्ली के लोग इसका सामना लंबे समय से कर रहे हैं। 

रूस की सरकार ने इससे निपटने के लिए नए उपाय निकाले। उसने मास्को का कचरा ग्रामीण इलाकों में डंप करने की शुरुआत की। मास्को का कचरा वहां से हजार किलोमीटर दूर के ग्रामीण इलाकों में डाला जा रहा है। इसके चलते ग्रामीण इलाकों में भयंकर विरोध पैदा हो गया है। इन लोगों का कहना है कि अपना कचरा हमारे घर के आगे मत फेंको। 

याद करें कि दिल्ली में लगभग दो साल पहले ऐसा ही वाकया हो चुका है। गाजीपुर लैंडफिल साइट के ढह जाने की घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद शासन की तरफ से आदेश आया कि गाजीपुर लैंडफिल साइट पर फेंका जाने वाला कचरा रानीपुर खेड़ा गांव में डाला जाए। जब निगम के ट्रक यहां पर कचरा डालने पहुंचे तो हजारों ग्रामीण वहां पर एकत्रित हो गए। वो वहीं धरने पर बैठ गए। 

उनका भी कहना था कि अपना कचरा हमारे घर के सामने मत डालो। गौर से देखिए तो यही कवायद हर जगह चल रही है। अमीर मुल्क गरीब देशों में कचरा डाल रहे हैं। शहर का कचरा गांव में फेंका जा रहा है। अमीर का कचरा गरीब के घर डाला जा रहा है। यानी मजा तो अमीर का, कचरा गरीब का। 

हाल ही में इसे जलवायु रंगभेद का नाम दिया गया है। यह भी एक प्रकार का रंगभेद और शोषण है। जिसका डटकर प्रतिवाद हर जगह किया जा रहा है। 

(रूस के लैंडफिल साइट पर कचरा डालने की तस्वीर इंटरनेट से)

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