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एक गांव ऐसा भी जहां बरसात के पहले खाद्य सामग्री इकट्ठा करना होता है

Bhola Tiwari Jul 05, 2019, 7:51 PM IST टॉप न्यूज़
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पंकज गुप्ता

लातेहार :  आज देश की संसद मेंं बजट पेश हो रहा है। बजट में इस बात  का उल्लेख है कि हर गांव को बिजली, हर घर को पानी, हर किसी को मकान देने पर सरकार कृतसंकल्प है। और इस बात की चर्चा पूरे देश में हो रही है, लेकिन झारखंड में लातेहार एक जिला है। हमारे जिले की एक पंचायत के कई गांव के लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कल जिला मुख्यालय काम करने कैसे जाएंगे। हमारे बच्चे कल स्कूल कैसे जाएंगे। अगर उस स्कूल चले भी गए तो वो सही सलामत लौट के कैसे आएंगे। पूरा गांव ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि गांव में कोई भी बीमार न पड़े, वरना घर में ही मौत हो जाएगी। यह एक विडंबना ही है। दो अलग-अलग धाराओं की सोच।

दरसअल में बारिश का मौसम  लातेहार के बेदी पंचायत के लिए मुसीबत भरी होती है। पूरा देश जब मना रहा होता है की बारिश हो ताकि गर्मी से राहत मिले और कृषि का काम पूरा हो। मगर बारिश की मौसम की आहट से परेशान होकर बेदी पंचायत के करीब आधा दर्जन गांव पूरे बारिश के मौसम के हिसाब से अनाज इकट्ठा करने में लग जाता है। जो परिवार ऐसा नहीं कर पाता है, उसे भूखे मरने की नौबत आ जाती है। क्योंकि बरसात में जिला मुख्यालय से इन गांवों का कनेक्शन पूरी तरह कट जाता है। जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए केवल एक ही रास्ता बचता है, उसका नाम है रेलवे का पुल। रेलवे पुल से आना जाना वाकई में हथेली पर मौत को लेकर चलने के बराबर है। इसके कई उदाहरण इन गांवों में मिल जाएंगे। लिहाजा इसकी फरियाद गांव वालों ने कई बार पंचायत से लेकर जिले तक और जिले से लेकर राजधानी तक की, मगर हालात गुजरे जमाने वाले ही हैं।

हालांकि शहर में यह चर्चा-ए-आम है कि झारखंड में डबल इंजन की सरकार है। कहने का मतलब यह है राज्य में भी भाजपा की सरकार और केंद्र में भी भाजपा की सरकार। राजनेता यह धारणा बनाते हैं की विकास की रेल तेज रफ्तार से दौड़ रही है। और उधर बेंदी पंचायत के हेसला, जेर, गोदना, कोदाग, जामुनटोला आदि गांव के लोग कहते हैं कि यह सोच बेईमानों की सोच है। 

बेंदी पंचायत के आधा दर्जन गांव के करीब 5000 लोग बरसात के दिनों में जिला मुख्यालय से कट जाते है। जिला मुख्यालय से कटने का कारण सड़क और पुल का नहीं होना है। अगर लोगों को जिला मुख्यालय जाना होता है तो वह अपने जान को जोखित में डाल कर धरधरी नदी पर बने रेलवे ट्रैक पार कर जाते है। गांव के लोग इस बात को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि इस बारिश के मौसम में कोई घर में बीमार ना हो, वरना घर में ही दम तोड़ देगा।

गांव में उरांव, खेरवार, वेश्य, अगेरिया, प्रजापति आदि जाति के लोग निवास करते है। 1 वर्ष पहले की बात है। हेसला गांव के संतोष प्रसाद का रेलवे पुल पार करने के दौरान पुल से गिरने पर पैर-हाथ टूट गया था। संतोष कि पत्नी समिता देवी ने बताया कि घर का समान लेने लातेहार जा रहे थे। रेलवे पुल पार करने के दौरान अपने वाहन लेकर पुल के निचे गिर गए, जिससे पैर-हाथ टूट गया था। साथ ही शरीर में काफी चोट आई थी। आज वह शरीर से काफी कमजोर हो गए है। गांव के ग्रामीण मुगलू अगेरिया ने बताया कि सरकार तो विकास की बात करती है, लेकिन आजादी के 72 वर्ष गुजर गये, क्षेत्र का विकास नहीं हो सका। हमलोगों को जिला मुख्यालय जाने के लिए सड़क-पुल नहीं है। इसलिए बरसात के दिनों में जिला मुख्यालय से कट जाते है।

छात्र सुनिल प्रजापति और छात्रा लक्ष्मी कुमारी की परेशानी थोड़ी अलग है। करियर बनाने की परेशानी। विद्यालय पहुंचने की परेशानी। पढ़ाई करने की परेशानी। गांव की माताओं का पूरा समय इस बात को लेकर बीत जाता है कि हे ईश्वर, बच्चे शाम को सही सलामत स्कूल से घर लौट आएं। ऐसे हालात पर भी न तो जनप्रतिनिधियों को शर्म आती है और ना ही प्रशासनिक अधिकारियों के कानो पर जू रेंगती है।

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