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वियतनाम : हिंदू राज्य से दो कदम आगे

Bhola Tiwari Jul 05, 2019, 7:31 AM IST टॉप न्यूज़
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एस डी ओझा

 वियतनाम का प्राचीन नाम चम्पा था , जिसकी राजधानी अमरावती थी . पहली सदी में हीं यहाँ हिन्दू राज्य की स्थापना हो गई थी . जो लोग चम्पा के हिन्दू मतावलम्बी हो गए थे उन्हें चम और अन्य को चम मलेच्छ या किरात कहा गया . चम्पा राज्य चीन के प्रभुत्व में था . अपने अधिकार व सम्प्रभुता की रक्षा हेतु चम्पा नरेश को चीन के राजा को समय समय पर अपना राजदूत मण्डल भेजकर मुद्रा के साथ साथ कई तरह के भेंट प्रदान करना होता था . दुसरी शताब्दी आते आते चीन की प्रभुत्व क्षमता धीरे धीरे क्षीड़ होने लगी .

चम्पा के प्रथम ऐतिहासिक नरेश का नाम श्रीमार था . उसके बाद क्रमशः भद्र वर्मन और गंगाराज गद्दी पर बैठे . अपने अंतिम समय में गंगा राज ने वैराग धारण कर लिया था . गंगाराज भारत में गंगा नदी के तट पर कुटी बनाकर रहने लगे थे . उनकी भारत में हीं मृत्यु हो गई थी . सन् 377 से 1307 तक यहाँ हिन्दू राजाओं का शासन था . हिन्दू राजाओं के शासन काल को राजवंश प्रथम , द्वितीय , तृतीय , चतुर्थ , पांडुरंग वंश , भृगु वंश , दक्षिण वंश आदि में विभाजित किया गया है . 1307 से 1360 तक स्थानीय बो दे लोगों का शासन था . कुछ दिनों तक शक्तिरैदपुति वंश का भी शासन था .उसके बाद से सत्ता स्थानीय राजाओं के हाथ में आ गई थी.1853 -1883 तक चम्पा देश डच लोगों के भी अधीन था .

उदारता सहनशीलता चम्पा के धार्मिक जीवन की विशेषताऐं थीं . यज्ञों में अनुष्ठानों को महत्व दिया जाता था . चम्पा के लोग गणेश , शिव व बिष्णु के उपासक थे . ये बिष्णु के अवतार राम और कृष्ण की भी पूजा करते थे .प्राचीन चम्पा संस्कृति के अवशेष आज भी वियतनाम में मिलते हैं . संस्कृत में लिखे बहुत से शिलालेख मिले हैं . कुछ शिलालेख अंगिका भाषा में भी मिले हैं , जिससे पता चलता है कि यहाँ की भाषा संस्कृत के बाद अंगिका रही होगी . संस्कृत दरबार की भाषा थी . सारे प्राचीन राजाओं के नाम संस्कृत में होते थे यथा - भद्र वर्मन , गंगा राज , मनोरथ वर्मन , देव वर्मन , विजय वर्मन आदि . चम भाषा भी बाद में अस्तित्व में आ गई थी , जिसकी लिपि ब्राह्मी लिपि से निकली थी .

 कालांतर में इस देश में इस्लाम ने पाँव पसारना शुरू कर दिया . आज वियतनाम में मुस्लिम , हिन्दू व वौद्ध धर्मावलम्बी रह रहे हैं . इनकी लिपि चाइनीज हो गई है . कुछ लोग स्थानीय देवी देवताओं की भी पूजा करते हैं.यहाँ की कुल आबादी 86लाख है. जनसंख्या के मामले में विश्व में वियतनाम का 13 वां स्थान है .

वियतनाम में संघर्ष क्षमता कमाल की है . अमेरिका से 1 नवंबर सन् 1955 से 30 अप्रैल सन् 1975 तक यानी के पूरे 20 साल तक संघर्ष करता रहा.अमेरिका वियतनाम पर हरेक 8 मिनट पर बम गिराता रहा था . जितनी आबादी युद्ध में पूरे विश्व में खत्म हुई होगी उसकी आधी तो वियतनाम में हीं खत्म हो गई थी . अंत में अमेरिका को हार मानकर एकतरफा युद्ध विराम करना पड़ा था . वियतनाम के इस जज्बे , जीवटता व संघर्ष क्षमता को प्रणाम .


              कितने करुण चीत्कारों का कर्ज चुका ,

              वियतनाम खड़ा आज अटल, अविचल .

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